
सूरत/नयी दिल्ली. गुजरात की सूरत लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन पत्र रद्द होने और अन्य उम्मीदवारों के नाम वापस लिए जाने के बाद सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार मुकेश दलाल को इस सीट से निर्वाचित घोषित कर दिया गया. दलाल निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं जहां पर सात मई को मतदान होना था. सूरत जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार दलाल को छोड़कर सूरत लोकसभा सीट के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने वाले सभी आठ उम्मीदवारों ने अंतिम दिन अपना नाम वापस ले लिया जिनमें चार निर्दलीय, तीन छोटे दलों के नेता और बहुजन समाज पार्टी के प्यारेलाल भारती शामिल हैं.
निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि सूरत सीट से कांग्रेस उम्मीदवार नीलेश कुम्भाणी का नामांकन प्रस्तावकों के हस्ताक्षर में प्रथम दृष्टया विसंगति होने के बाद रविवार को रद्द कर दिया गया था. कुम्भाणी का नामांकन रद्द होने के बाद पार्टी के वैकल्पिक उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करने वाले सुरेश पडसाला का नामांकन पत्र भी रद्द कर दिया गया था.
जिलाधिकारी सह चुनाव अधिकारी सौरभ पारधी ने दलाल को निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र सौंपने के बाद मीडियार्किमयों से कहा, ”मैं घोषणा करता हूं कि भाजपा उम्मीदवार मुकेश कुमार चंद्रकांत दलाल को सूरत संसदीय क्षेत्र से सदन के लिए विधिवत निर्वाचित घोषित किया जाता है.” भाजपा की गुजरात इकाई के अध्यक्ष सी.आर.पाटिल ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”सूरत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पहला कमल भेंट किया है. मैं सूरत लोकसभा सीट से अपने उम्मीदवार मुकेश दलाल को निर्विरोध निर्वाचित होने पर बधाई देता हूं.” कांग्रेस ने दावा किया कि भाजपा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई)के मालिकों और व्यापारिक समुदाय के गुस्से से डर गई थी और उसने सूरत लोकसभा सीट पर भी ‘मैच फिक्सिंग’ का प्रयास किया, जिसे सत्तारूढ़ पार्टी 1984 से जीतती आ रही है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”तानाशाह की असली ‘सूरत’ एक बार फिर देश के सामने है! जनता से अपना नेता चुनने का अधिकार छीन लेना बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान को खत्म करने की तरफ बढ़ाया एक और कदम है.” उन्होंने कहा, ”मैं एक बार फिर कह रहा हूं, यह सिर्फ सरकार बनाने का चुनाव नहीं है, यह देश को बचाने का चुनाव है, संविधान की रक्षा का चुनाव है.” कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि लोकतंत्र खतरे में है.
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ” लोकतंत्र खतरे में है. आप क्रोनोलॉजी (घटनाक्रम) समझिए. सूरत जिला निर्वाचन अधिकारी ने सूरत लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी नीलेश कुम्भाणी का नामांकन रद्द कर दिया है. कारण तीन प्रस्तावकों के हस्ताक्षर के सत्यापन में खामी बताया गया है.” रमेश ने कहा, ”कुछ इसी तरह का कारण बताकर अधिकारियों ने सूरत से कांग्रेस के वैकल्पिक उम्मीदवार सुरेश पडसाला के नामांकन को खारिज कर दिया. कांग्रेस का कोई उम्मीदवार नहीं रह गया है. भाजपा प्रत्याशी मुकेश दलाल को छोड़कर बाकी सभी उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया है.”
उन्होंने कहा, ”सात मई 2024 को मतदान से लगभग दो सप्ताह पहले ही 22 अप्रैल, 2024 को सूरत लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार को ”निर्विरोध” जिता दिया गया.” रमेश ने कहा, ”प्रधानमंत्री मोदी के अन्याय काल में एमएसएमई मालिकों और व्यवसायियों की परेशानियों एवं गुस्से को देखते हुए भाजपा इतनी बुरी तरह से डर गई है कि वह सूरत लोकसभा के ‘मैच को फिक्स’ करने का प्रयास कर रही है. इस सीट को वे लोग 1984 के लोकसभा चुनाव के बाद से लगातार जीतते आ रहे हैं!”
उन्होंने कहा, ”हमारे चुनाव, हमारा लोकतंत्र, बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान सब कुछ भयंकर खतरे में हैं. मैं दोहरा रहा हूं कि यह हमारे जीवनकाल का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव है!” कांग्रेस के राजकोट सीट से उम्मीदवार परेश धनानी ने दावा किया कि भाजपा भ्रष्ट तरीकों से अर्जित धन का इस्तेमाल कर विपक्ष को तोड़ने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा, ”लोग इसे देख रहे हैं और वे सत्तारूढ़ दल को करारा जवाब देंगे.” प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पाटिल ने सूरत में संवाददाताओं से कहा कि जिस तरह से लोग भाजपा को अपना समर्थन दे रहे हैं, उसे देखते हुए हर कोई 400 सीट का लक्ष्य हासिल करने को लेकर आश्वस्त है.
उन्होंने कहा कि भाजपा गुजरात में शेष 25 सीट जीतेगी जहां पर एक ही चरण में सात मई को मतदान होगा. पाटिल ने कहा, ”कांग्रेस ने चुनाव से पहले यह दावा करके एक नाटक किया कि उसके उम्मीदवार के प्रस्तावकों का अपहरण कर लिया गया था. उस आरोप का उनके उम्मीदवार ने खुद खंडन किया था. पार्टी के नेताओं ने तब निर्वाचन अधिकारियों पर दबाव बनाने और अफवाहें फैलाने की कोशिश की. लेकिन, आज अंतत? सच्चाई की जीत हुई.” भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात में 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान सभी 26 सीट पर जीत हासिल की थी.
वर्ष 1951 से अब तक कम से कम 35 उम्मीदवारों ने हासिल की निर्विरोध जीत
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुकेश दलाल बीते 12 साल में लोकसभा चुनाव में निर्विरोध जीत हासिल करने वाले पहले उम्मीदवार बन गए हैं. वह लोकसभा चुनाव जीतने वाले भाजपा के संभवत: पहले उम्मीदवार बन गये हैं. सूरत संसदीय क्षेत्र से उनकी जीत से पहले अरुणाचल प्रदेश में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा के 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया.
एक चुनाव अधिकारी ने कहा कि सभी अन्य उम्मीदवारों के नामांकन वापस लेने के बाद दलाल सोमवार को निर्विरोध निर्वाचित हो गए.
इससे एक दिन पहले जिला निर्वाचन अधिकारी ने कांग्रेस उम्मीदवार नीलेश कुंभणी के प्रस्तावकों के हस्ताक्षर में प्रथम दृष्टया विसंगतियां पाईं, जिसके बाद उनकी उम्मीदवारी खारिज कर दी गई. सात चरण में हो रहे लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की यह पहली जीत है.
अठारहवीं लोकसभा के लिए दलाल के निर्विरोध चुनाव के पहले 1951 से अब तक हुए संसदीय चुनाव में कम से कम 34 अन्य उम्मीदवारों को बिना मुकाबला किए जीत हासिल हुई थी. समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव को 2012 में कन्नौज लोकसभा सीट के उपचुनाव में निर्विरोध जीत मिली. उनके पति अखिलेश यादव के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद यह सीट खाली हुई थी.
आम चुनाव में निर्विरोध जीत हासिल करने वाले अन्य नेताओं में वाई.बी. चव्हाण, फारूक अब्दुल्ला, हरेकृष्ण महताब, टीटी कृष्णामाचारी, पी एम सईद और एस सी जमीर का नाम शामिल है.
अब तक कांग्रेस पार्टी के सबसे अधिक उम्मीदवारों ने लोकसभा चुनाव में निर्विरोध जीत हासिल की है. सिक्किम और श्रीनगर लोकसभा सीट पर अब तक दो बार निर्विरोध निर्वाचन देखने को मिला है . अधिकतर उम्मीदवार सामान्य या नियमित चुनावों में निर्विरोध चुनाव जीते हैं जबकि डिंपल यादव समेत कम से कम नौ नेताओं ने उपचुनावों में निर्विरोध जीत हासिल की है. 1957 के आम चुनाव में अधिकतम सात उम्मीदवार निर्विरोध जीते, उसके बाद 1951 और 1967 के चुनावों में पांच-पांच उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत दर्ज की. 1962 में तीन और 1977 में दो जबकि 1971, 1980 और 1989 में एक-एक उम्मीदवार ने बिना किसी विरोध के जीत हासिल की.



