
महाराष्ट्र के जालना जिले में मनोज जारांगे के मराठा आरक्षण आंदोलन के समानांतर ओबीसी एक्टिविस्टों ने जवाबी भूख हड़ताल शुरू की थी। पुलिस ने कानून-व्यवस्था, तनाव और यातायात प्रभावित होने की आशंका का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी और सोमवार को चार ओबीसी एक्टिविस्टों को हिरासत में ले लिया। दूसरी ओर, जारांगे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 10वें दिन भी जारी है और उनकी मांग मराठा समुदाय के पात्र लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र के जरिए OBC आरक्षण का लाभ दिलाने से जुड़ी है।
पुलिस ने इलाके में तनाव बढ़ने, कानून-व्यवस्था बिगड़ने और यातायात प्रभावित होने की आशंका जताते हुए OBC प्रदर्शनकारियों को वहां विरोध-प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी थी। प्रदर्शनकारियों को यह भी बताया गया था कि जिस जगह पर वे आंदोलन कर रहे हैं, उसके इस्तेमाल के लिए उनके पास ग्राम पंचायत या जमीन के मालिक की अनुमति नहीं है। जालना के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस ने ओबीसी एक्टिविस्ट मंगेश ससाने, विट्ठल तलेकर, बाबासाहेब बतुले और सतीश कुलाल को हिरासत में लिया है।
ससाने ने रविवार को आरोप लगाया था कि सरकार एक समुदाय को विशेष तवज्जो दे रही है। उन्होंने कहा था कि ओबीसी समुदाय को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना होगा।
जारांगे की भूख हड़ताल का 10वां दिन
इस बीच, मनोज जारांगे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल सोमवार को 10वें दिन में प्रवेश कर गई। उनके एक सहयोगी ने पहले बताया था कि मेडिकल मदद, पानी और IV फ्लूइड लेने से इनकार करने के बाद जारांगे की तबीयत बिगड़ गई है।
ओबीसी के तहत मराठा आरक्षण की मांग
जारांगे मराठा समुदाय के लिए ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण की मांग कर रहे हैं। उनकी मांगों में हैदराबाद और सतारा के गजट रिकॉर्ड को लागू करना तथा मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को कुनबी जाति का प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है।
कुनबी पारंपरिक रूप से खेती-किसानी से जुड़ा समुदाय है और आधिकारिक तौर पर ओबीसी श्रेणी में आता है। इस श्रेणी में शामिल होने के कारण पात्र कुनबी समुदाय के लोग शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लाभ के हकदार होते हैं।



