
ईटानगर. भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करते हुए रविवार को 60 सदस्यीय विधानसभा में 46 सीट जीतकर बहुमत हासिल कर लिया. निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी. राज्य में 60 में से 50 विधानसभा सीट के लिए 19 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के साथ मतदान हुआ था. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 10 सीट पहले ही निर्विरोध जीत ली थीं. अधिकारियों के अनुसार, जिन 50 सीट पर मतदान हुआ, उनमें से भाजपा ने 36 सीट पर जीत दर्ज की और मुख्यमंत्री पेमा खांडू निर्विरोध जीतने वाले 10 उम्मीदवारों में से एक हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा की जीत पर राज्य के लोगों का धन्यवाद व्यक्त किया.
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “धन्यवाद अरुणाचल प्रदेश! इस अद्भुत राज्य की जनता ने विकास की राजनीति को स्पष्ट जनादेश दिया है. अरुणाचल में भाजपा पर एक बार फिर अपना विश्वास जताने के लिए उन्हें मेरा आभार. हमारी पार्टी राज्य के विकास के लिए और भी अधिक उमंग के साथ काम करेगी.” मोदी ने यह भी कहा, “मैं चुनाव अभियान में अरुणाचल के असाधारण भाजपा कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत की सराहना करना चाहूंगा. जिस तरह वे पूरे राज्य में गए और लोगों से जुड़े, वह सराहनीय है.” नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) को पांच सीट मिलीं, जबकि पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल ने दो और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने तीन सीट पर जीत दर्ज की. कांग्रेस ने एक सीट जीती और तीन सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए हैं. भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में 2019 के विधानसभा चुनाव में 41 सीट पर जीत हासिल की थी.
पेमा खांडू: संगीत, खेल के शौकीन पेमा खांडू ने सीमावर्ती अरुणाचल प्रदेश में फिर खिलाया ‘कमल’
खेल और संगीत के शौकीन पेमा खांडू पिछले कुछ वर्षों में अरुणाचल प्रदेश में एक बड़े नेता के रूप में उभरे हैं, विशेषकर 2016 में पैदा हुए उस संवैधानिक संकट के बाद जिसके कारण राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा था. खांडू कुशल चुनावी रणनीतिकार के रूप में अपनी छवि बनाने में भी सफल रहे हैं. अपनी रणनीति की बदौलत ही उन्होंने इस पूर्वोत्तर राज्य में कमल (भाजपा का चुनाव चिह्न) फिर से खिलाया है.
भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करते हुए रविवार को 60 सदस्यीय विधानसभा में 46 सीट जीतकर बहुमत हासिल कर लिया. खांडू की राजनीतिक यात्रा एक व्यक्तिगत त्रासदी के बीच शुरू हुई. उनके पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दोर्जी खांडू का 2011 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन हो गया था. पेमा खांडू वर्ष 2000 में कांग्रेस में शामिल हुए और विभिन्न पदों पर रहे.
वह जून 2011 में अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र मुक्तो से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में विधानसभा उपचुनाव में निर्विरोध चुने गए. पेमा खांडू मुख्यमंत्री नबाम तुकी की सरकार में जल संसाधन विकास और पर्यटन मंत्री बने थे.
जनवरी 2016 में उस संवैधानिक संकट के बाद उनके नेतृत्व का दायरा तेजी से बढ़ा था, जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था.
जब केंद्र का शासन हटा तो वह भाजपा सर्मिथत कलिखो पुल के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बने. यह सरकार हालांकि कुछ ही समय चली. उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप से तुकी सरकार को बहाल कर दिया गया लेकिन तुकी ने शीघ्र ही इस्तीफा दे दिया. इसके बाद मात्र 37 वर्ष की आयु में खांडू जुलाई, 2016 में मुख्यमंत्री बन गये.
चीन की सीमा से लगते इस महत्वपूर्ण राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में पद संभालने के बाद से खांडू और उनके मंत्रिमंडल ने दो बार अपनी पार्टी बदली है-कांग्रेस से पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल प्रदेश (पीपीए) में और फिर भाजपा में, वह भी महज पांच महीने के अंतराल में.
उनके कार्यकाल के मात्र तीन महीने बाद ही सत्तारूढ़ कांग्रेस के 43 विधायक भाजपा की सहयोगी पीपीए में शामिल हो गए थे.
वर्ष 2019 में खांडू ने दूसरी बार मुक्तो विधानसभा सीट से जीत हासिल की और बिना किसी राजनीतिक अड़चन के मुख्यमंत्री बने.
राजनीति से परे खांडू अपने सांस्कृतिक योगदान के लिए जाने जाते हैं. वह एक संगीत प्रेमी हैं तथा आधिकारिक समारोहों में किशोर कुमार और मोहम्मद रफी के गीत गाकर श्रोताओं का मन मोह लेते हैं.
खेल, खांडू के अन्य जुनूनों में से एक है, जिसमें वे सक्रिय रूप से क्रिकेट टूर्नामेंटों का आयोजन करते हैं और स्थानीय एथलीट का समर्थन करते हैं तथा फुटबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन और वॉलीबॉल सहित विभिन्न खेलों में प्रतिभाओं को बढ़ावा देते हैं. दिल्ली के हिंदू कॉलेज से इतिहास में स्नातक खांडू मोनपा जनजाति से आते हैं, जो मुख्य रूप से तवांग और पश्चिमी कामेंग के कुछ हिस्सों में निवास करती है. बौद्ध धर्म को मानने वाले 45 वर्षीय खांडू इस बार भी सीमावर्ती जिले तवांग की मुक्तो सीट से निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं.



