
मुरादाबाद/लखनऊ/बलिया/जयपुर. उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में काम के कथित दबाव के चलते बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) की ड्यूटी कर रहे एक सहायक अध्यापक ने रविवार को अपने घर के स्टोर रूम में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस ने यह जानकारी दी. पुलिस सूत्रों के अनुसार मृतक की पहचान भोजपुर के बहेड़ी गांव के एक सहायक शिक्षक सर्वेश सिंह (46) के रूप में हुई है. सर्वेश भगतपुर टांडा गांव के एक स्कूल में तैनात था. वह सात अक्टूबर को बीएलओ बनाया गया था. तड़के करीब चार बजे सर्वेश की पत्नी बबली ने उसे फांसी पर लटकता पाया.
उन्होंने बताया कि मौके पर मिले एक कथित ‘सुसाइड नोट’ में सर्वेश ने घुटन और डर महसूस करने का जिक्र करते हुए लिखा है कि बीएलओ के काम के लिए दिया गया समय अपर्याप्त है. ठाकुरद्वारा के पुलिस क्षेत्राधिकारी आशीष प्रताप सिंह ने कहा, “बीएलओ सर्वेश सिंह ने आत्महत्या कर ली है और एक सुसाइड नोट छोड़ा है जिसमें लिखा है कि वह बीएलओ ड्यूटी का बोझ नहीं उठा पा रहे थे. उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.”
एसआईआर लोगों के लिए ‘मुसीबत का सबब’ : अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लोगों के लिए ‘मुसीबत का सबब’ करार देते हुए निर्वाचन आयोग से उत्तर प्रदेश में यह कवायद पूरी करने की अवधि कम से कम तीन महीने तक बढ़ाने की मांग की है. यादव ने रविवार को यहां एक बयान में कहा कि एसआईआर लोगों के लिए ‘मुसीबत का सबब’ बन गया है.
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में एक महीने के भीतर लगभग 16 करोड़ मतदाताओं की गणना और सत्यापन संभव नहीं है. बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) पर काम का अतिरिक्त दबाव है, जिसका असर उनकी शारीरिक-मानसिक स्थिति पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है. यादव ने कहा कि ऐसे में निर्वाचन आयोग ने एसआईआर का समय चार दिसंबर से 11 दिसंबर तक बढ़ाकर कोई अपेक्षित काम नहीं किया है.
उन्होंने कहा, ”समाजवादी पार्टी ने एसआईआर की समयावधि तीन महीने बढ़ाने की मांग की थी. इस व्यावहारिक और उचित मांग पर निर्वाचन आयोग ने कोई ध्यान नहीं दिया. लगता है कि निर्वाचन आयोग संवेदनाशून्य हो गया है. निर्वाचन आयोग को मतदाताओं की परेशानियों से कोई लेना देना नहीं है.” उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “इन स्थितियों में यह आशंका होती है कि निर्वाचन आयोग को अपनी साख, चुनाव की निष्पक्षता एवं पारर्दिशता की परवाह नहीं रह गई है? वह भाजपा सरकार के इशारे पर काम करने वाली संस्था बन गई है.”
यादव ने कहा, “निर्वाचन आयोग की अगर स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से एसआईआर कराने में रूचि है तो उसे उत्तर प्रदेश के करोड़ों मतदाताओं की एसआईआर की समय सीमा कम से कम तीन महीने होनी चाहिए.” उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में एसआईआर के कारण लाखों लोग मताधिकार से वंचित रह गए. शक यही होता है कि कहीं उत्तर प्रदेश में भी होने वालों चुनावों के मद्देनजर विपक्षियों के वोट काटने की साजिश तो नहीं हो रही है? लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ यह खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता है.
बलिया में संतोषजनक काम नहीं करने पर 28 बीएलओ पर मुकदमे की मांग
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में बैरिया तहसील क्षेत्र के 28 बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए बैरिया थाने में तहरीर दी गई है.
बैरिया तहसील के उपजिलाधिकारी और सहायक निर्वाचन अधिकारी आलोक प्रताप सिंह ने रविवार की शाम ‘पीटीआई-भाषा’ को
बताया कि शनिवार को एसआईआर की समीक्षा की गई. इसमें पाया गया कि 28 बीएलओ ने लक्ष्य से 25 फीसदी से भी कम कार्य पूरा किया है जो इनके गंभीर लापरवाही बरतने का संकेत है. उन्होंने बताया कि इन 28 बीएलओ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए बैरिया थाने में तहरीर दी गई है. बैरिया क्षेत्र के पुलिस उपाधीक्षक मोहम्मद फहीम कुरैशी ने रविवार की शाम को बताया कि इस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
राजस्थान के धौलपुर में एसआईआर डेटा अपलोड करते समय बीएलओ की मौत
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य में लगे 42 वर्षीय बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) की अपने घर पर अचानक गिरकर मौत हो गई. पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी. पुलिस ने बताया कि अनुज गर्ग शनिवार देर रात मतदाता डेटा अपलोड करते समय बेहोश हो गए. उनके परिवार ने आरोप लगाया कि वह अत्यधिक दबाव में काम कर रहे थे. अनुज धौलपुर शहर के गौशाला सेक्टर में बीएलओ के पद पर तैनात थे. पुलिस ने बताया कि प्रताप विहार कॉलोनी स्थित अपने घर में चाय मांगने के कुछ ही मिनट बाद वह जमीन पर गिर पड़े.
अनुज की बहन वंदना गर्ग ने बताया कि अनुज काम के बोझ के कारण हर रात देर तक काम करते थे. उन्होंने कहा, “उस रात भी वह मतदाता फ.ॉर्म अपलोड कर रहे थे. उन्होंने चाय मांगी, लेकिन पीने से पहले ही वह बेहोश हो गए.” वंदना ने बताया कि परिवार अनुज को जिला अस्पताल ले गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. रविवार सुबह निहालगंज पुलिस और जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. समरवीर सिंह बयान दर्ज करने के लिए अनुज के घर गए. बाद में पोस्टमॉर्टम किया गया. अनुज राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बारां में शिक्षक थे और 2012 में सेवा में शामिल हुए थे.



