आर्थिक वृद्धि, रोजगार के बीच संतुलन साधता है बजट, सभी वर्गों का ध्यान: सीतारमण

नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि बजट में आर्थिक वृद्धि, रोजगार, पूंजी निवेश और राजकोषीय मजबूती के बीच बेहतर संतुलन स्थापित के साथ सहयोगपूर्ण संघवाद को बढ़ावा दिया गया है. सीतारमण ने राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि बजट भाषण में किसी राज्य का नाम नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें कोई पैसा नहीं मिला है. विपक्ष संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन कर वास्तव में दुष्प्रचार करने का काम कर रहा है.

उन्होंने कहा , ”बजट में आर्थिक वृद्धि, रोजगार, पूंजी निवेश और राजकोषीय मजबूती के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया गया है. यह आर्थिक वृद्धि को गति देने के साथ रोजगार बढ़ाने वाला है.” सीतारमण ने कहा, ”बजट में सहकारी संघवाद को बढ़ावा दिया गया है. वित्त वर्ष 2024-25 में राज्यों को 22.91 लाख करोड़ रुपये दिए गए जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2.49 लाख करोड़ रुपये अधिक हैं.” बजट में केवल दो राज्यों का नाम होने और अन्य की अनदेखी करने को लेकर अलोचना पर वित्त मंत्री ने कहा, ”अगर बजट भाषण में किसी राज्य का नाम नहीं है तो इसका यह मतलब नहीं कि उसके लिए बजट में कोई आवंटन नहीं है.”

उन्होंने कहा, ”अगर पीछे के बजट को देखा जाए तो संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार ने भी अपने कई बजट भाषण में सभी राज्यों के नामों का उल्लेख नहीं किया था.” सीतारमण ने कहा, ”2004-05 के बजट में 17 राज्यों का नाम नहीं लिया गया. वहीं 2009-10 के पूर्ण बजट में 28 राज्यों का नाम नहीं था. अन्य बजट भाषण में भी कई राज्यों का उल्लेख नहीं था. क्या उन राज्यों को पैसा नहीं मिला?” केंद्रीय करों में कम हिस्सेदारी के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्रीय करों में हिस्सेदारी वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार दी जाती है और केंद्र सरकार उसका पूरी तरह से पालन कर रही है.

उन्होंने कहा, ”यह साफ होना चाहिए कि राज्यों को राशि शुद्ध कर राजस्व के आधार पर दी जाती है न कि सकल कर राजस्व के आधार पर. उपकर, सब्सिडी और कर संग्रह लागत घटाकर शुद्ध कर राजस्व का निर्धारण नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) करता है.” सीतारमण ने कहा, ”इसके उलट राजग सरकार ने राज्यों का जो भी बकाया है, उसका भुगतान समय पर किया है.” उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार का पूंजीगत व्यय 43.82 लाख करोड़ रुपये रहा जो एक दशक पहले संप्रग शासन के दौरान 2004-05 से 2013-14 के बीच 13.19 लाख करोड़ रुपये था.

वित्त मंत्री ने कहा, ”चालू वित्त वर्ष में 11.11 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय का निर्धारण किया गया है. यह पूंजीगत व्यय मद में अबतक का सर्वाधिक आवंटन है. यह वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान से करीब 17 प्रतिशत अधिक है.” उन्होंने कहा कि बजट का मकसद भारत को विनिर्माण कंपनियों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाना भी है.

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार राजकोषीय घाटे के लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. चालू वित्त वर्ष में इसे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.9 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य है. अगले वित्त वर्ष 2025-26 तक हम इसे 4.5 प्रतिशत से नीचे लाएंगे.
उन्होंने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज कर दिया कि बजट में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक क्षेत्र के लिए आवंटन में कटौती की गई है. उन्होंने कहा कि इसके उलट इन सभी क्षेत्रों के लिए आवंटन पिछले साल की तुलना में बढ़ा है. सीतारमण ने कहा कि कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए बजट में 1.52 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष से 8,000 करोड़ रुपये अधिक है. इसी तरह शिक्षा पर आवंटन बढ़कर 1.48 लाख करोड़ रुपये किया गया है.

सीतारमण ने महंगाई का जिक्र करते हुए कहा, ”यह सबको पता है कि तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की गलत नीतियों से मुद्रास्फीति 22 महीनों तक दहाई अंक के करीब चली गयी थी और यह वैश्विक औसत से अधिक रही थी. लेकिन आज यह काफी हद तक नियंत्रण में है. यह राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकार की बेहतर नीतियों का नतीजा है.” उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू- कश्मीर की वित्तीय स्थिति पहले से बेहतर हुई है.

दैनिक नकदी प्रबंधन के लिए जे एंड के बैंक से ‘हुंडी’ और ओवरड्राफ्ट की व्यवस्था का पुराना चलन अब समाप्त हो गया है. पिछले चार साल के दौरान, जे एंड के बैंक में उल्लेखनीय बदलाव आया है. बैंक को 2019-20 में 1,139 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. लेकिन 2023-24 में उसे 1,700 करोड़ रुपये का लाभ हुआ. वित्त मंत्री ने अग्निवीर योजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह सशस्त्र बलों को युद्ध के लिए तैयार और युवा बनाए रखने में मदद करेगी और इसपर राजनीति करने की कोई जरूरत नहीं है.

बजट चर्चा के दौरान चिदंबरम ने अग्निवीर योजना की आलोचना की और सरकार से इसे वापस लेने को कहा था. सीतारमण ने कहा कि यह योजना हमारे सशस्त्र बलों की क्षमताओं और युद्ध की तैयारी को बढ़ाने के लिए एक बहुत ही सुधारात्मक कदम है. उन्होंने राज्यों में पुलिस महानिदेशकों की नियुक्ति के संबंध में भ्रामक बयान देने के लिए कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को आड़े हाथ लिया.

नीट परीक्षा को लेकर विपक्ष की आलोचना पर सीतारमण ने कहा, ”इससे परिवारों के लिए कम लागत में चिकित्सा शिक्षा सुनिश्चित हुई है. निश्चित रूप से इससे कुछ निहित स्वार्थी तत्वों को नुकसान पहुंचा है. खासकर मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लोगों को क्योंकि अब मेडिकल सीटें बेचना संभव नहीं है.” उन्होंने कहा, ”यही कारण है कि एनईईटी लीक मामला सामने आने से पहले भी विशेष लॉबी एनईईटी के खिलाफ सक्रिय थी.”

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