सेंसर बोर्ड ‘भ्रष्टाचार’ मामला : अभिनेता विशाल के आरोपों पर सीबीआई ने दर्ज की प्राथमिकी

नयी दिल्ली. केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अभिनेता विशाल द्वारा लगाए गए आरोपों पर तीन लोगों और केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. विशाल ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी फिल्म ‘मार्क एंटनी’ के लिए प्रमाण पत्र प्राप्त करने के वास्ते 6.5 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ा. अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी.

प्राथमिकी में नामित आरोपी व्यक्तियों के परिसर सहित मुंबई में चार स्थानों पर छापेमारी के बाद यह कार्रवाई हुई है. सीबीआई ने र्मिलन मेनगा, जीजा रामदास, राजन एम. और सीबीएफसी के एक अज्ञात लोक सेवक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. विशाल ने बताया कि उनकी फिल्म को 24 घंटे के भीतर सीबीएफसी प्रमाण पत्र जारी करने की एवज में रिश्वत मांगी गई थी. ‘मार्क एंटनी’ 28 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जिसका निर्देशन अदिक रविचंद्रन ने किया है. भारत में फिल्मों की स्क्रीनिंग के लिए सीबीएफसी प्रमाणपत्र अनिवार्य है.

तमिल अभिनेता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से सीबीएफसी में भ्रष्टाचार में मामले पर ध्यान देने का अनुरोध किया है. अभिनेता विशाल ने आरोप लगाया कि सीबीएफसी में एक महिला अधिकारी ने एक दिन में प्रमाण पत्र जारी करने के लिए उनसे साढ़े छह लाख रुपये की कथित तौर पर मांग की थी. उन्होंने बताया कि अधिकारी ने कथित रूप से उनसे कहा था कि सीबीएफसी में यह आम बात है. सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने आरोपों में तत्काल जांच का आदेश दिया है.

सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया, ”यह आरोप लगाया गया है कि एक फिल्म को हिंदी में डब करने के लिए सितंबर 2023 के दौरान एक व्यक्ति ने अन्य लोगों के साथ मिलकर मुंबई सीबीएफसी से सेंसर प्रमाण पत्र दिलाने के नाम पर सात लाख रुपये रिश्वत की साजिश रची थी.” सीबीआई ने प्राथमिकी में आरोप लगाया कि मेनगा ने इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाई और उसने ही शुरू में सीबीएफसी मुंबई के अधिकारियों की ओर से रिश्वत की मांग की थी. अधिकारी के मुताबिक, बातचीत के बाद रिश्वत की राशि घटकर 6.54 लाख रुपये हो गई थी.

प्रवक्ता ने एक बयान में बताया, ”महिला ने सीबीएफसी मुंबई के अधिकारियों की ओर से दो अन्य आरोपियों के दो बैंक खातों में 6.54 लाख रुपये की रिश्वत कथित तौर पर प्राप्त की थी. जिसके बाद हिंदी में डब फिल्म के लिए 26 सितंबर 2023 को जरूरी प्रमाण पत्र सीबीएफसी मुंबई द्वारा कथित तौर पर जारी किया गया.” उन्होंने बताया कि यह भी आरोप लगाया गया है कि उक्त राशि के अलावा आरोपी महिला ने काम कराने के लिए 20 हजार रुपये की राशि अपने बैंक खाते में भी प्राप्त की थी.

विशाल ने एक पोस्ट में कहा कि फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए पहले उनकी निर्माता कंपनी से तीन लाख रुपये मांगे गए जबकि प्रमाणपत्र के लिए बाकी बचे साढ़े तीन लाख रुपये की मांगी की गई. अभिनेता ने कहा कि एक महिला अधिकारी ने उनकी टीम से कहा कि सीबीएफसी में यह आम बात है, जहां फिल्म निर्माताओं को सेंसर से मंजूरी प्राप्त करने के लिए रुपये देने होते हैं.

विशाल ने 28 सितंबर को एक वीडियो संदेश में कहा, ”सिल्वर स्क्रीन पर भ्रष्टाचार दिखाया जा रहा है, जो ठीक है. लेकिन असल जिंदगी में नहीं. हजम नहीं कर सकता. विशेषतौर पर सरकारी कार्यालयों में. इससे भी बुरा सीबीएफसी मुंबई कार्यालय में हो रहा है. अपनी फिल्म ‘मार्क एंटनी’ हिंदी संस्करण के लिए 6.5 लाख रुपये देने पड़े. तीन लाख स्क्रीनिंग के लिए और साढ़े तीन लाख प्रमाणपत्र के लिए.”

उन्होंने कहा, ”अपने करियर में ऐसे हालात का कभी सामना नहीं किया. कोई विकल्प नहीं था फिल्म की रिलीज आज होनी थी इसलिए मध्यस्थ मेनगा को रुपये देने पड़े.” उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ध्यान में लाना चाहता हूं. अपने लिए नहीं बल्कि भविष्य के निर्माताओं के लिए कर रहा हूं. कुछ नहीं हो रहा. मेरी मेहनत की गाढ़ी कमाई भ्रष्टाचार में गई?? ऐसा नहीं होगा. सबके लिए सबूत हैं. उम्मीद है की सच्चाई की जीत होगी.

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