
गुवाहाटी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने राजनयिक माध्यमों का उपयोग कर रही है क्योंकि पड़ोसी देश में उन्हें अत्याचार का सामना करना पड़ रहा है. शर्मा ने कहा कि हिंदुओं को सुरक्षा प्रदान करना बांग्लादेश सरकार की जिम्मेदारी है, जो पड़ोसी देश में धार्मिक अल्पसंख्यक हैं.
उन्होंने कछार जिले में एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा, ”बांग्लादेश में हो रही घटनाएं दुखद हैं. भारत सरकार पहले ही इस मामले में प्रतिक्रिया दे चुकी है. वहां धार्मिक अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना बांग्लादेश सरकार की जिम्मेदारी है.” मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यह सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न राजनयिक माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं कि बांग्लादेश सरकार हिंदुओं को सुरक्षा प्रदान करे.” उन्होंने कहा कि भारत के लोगों की प्रार्थनाएं बांग्लादेश के हिंदुओं के साथ हैं.
उन्होंने कहा, ”हम सभी वहां हिंदुओं द्वारा सामना की जा रही असुरक्षा, उत्पीड़न और गिरफ्तारी को लेकर चिंतित हैं. लेकिन हमें विश्वास है कि मोदी जी के प्रयासों से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी.” मुख्यमंत्री ने कहा कि बांग्लादेश से लगी राज्य की सीमा पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.
असम भी झारखंड में ‘दो-तीन चीजों’ का अध्ययन करने के लिए टीम भेजेगा: हिमंत
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने झारखंड मंत्रिमंडल के फैसले पर पलटवार करते हुए कहा है कि वह कुछ चीजों का अध्ययन करने के लिए दो प्रतिनिधिमंडल झारखंड भेजेंगे. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासियों की दशा के अध्ययन के लिए एक सर्वदलीय टीम असम भेजने का कुछ दिन पहले कैबिनेट बैठक के दौरान फैसला किया था. हालांकि, शर्मा ने यह नहीं बताया कि असम सरकार किन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए प्रतिनिधिमंडल भेजेगी.
शर्मा से शनिवार रात यहां भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब झारखंड सरकार के फैसले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ”पांच दिसंबर को हमारी कैबिनेट में झारखंड के कुछ इलाकों का दौरा करने के बारे में कुछ निर्णय लिए जाएंगे. हम भी वहां जाएंगे और दो-तीन चीजें देखेंगे.” झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता हेमंत सोरेन ने 28 नवंबर को झारखंड के 14वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, जिसके कुछ ही घंटों बाद उनकी सरकार ने असम में चाय बागानों की दशा का अध्ययन करने के लिए एक सर्वदलीय टीम गठित करने का निर्देश दिया था.
उन्होंने कहा, “वे यहां एक टीम भेज रहे हैं, लेकिन हम झारखंड में दो विशेष चीजें देखने के लिए दो प्रतिनिधिमंडल भेजेंगे. हम अगले सप्ताह निर्णय लेंगे.” झारखंड में हाल में हुए विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के सह-प्रभारी शर्मा ने कहा, “वे हमसे मिलने आएंगे, हम भी उनसे मिलने जाएंगे.” सोरेन सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले का एक कारण झामुमो नीत गठबंधन और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के बीच चुनाव के दौरान हुई जुबानी जंग भी माना जा रहा है. चुनाव प्रचार के दौरान शर्मा ने कई बार दावा किया था कि बांग्लादेश से बड़े पैमाने पर घुसपैठ हो रही है, जिसकी वजह से झारखंड के आदिवासी समुदाय की हालत खराब हो रही है.
कांग्रेस लिखकर दे तो असम में गोमांस पर प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हूं: हिमंत
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि अगर प्रदेश कांग्रेस प्रमुख भूपेन कुमार बोरा उन्हें पत्र लिखकर गोमांस पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध करें तो वह ऐसा करने के लिए तैयार हैं. मुस्लिम बहुल सामगुड़ी विधानसभा सीट पर हुआ उपचुनाव जीतने के लिए भाजपा पर लगे गोमांस वितरित करने के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने कहा कि उन्हें खुशी है कि कांग्रेस ने इस मामले को उठाया. इस सीट पर पहले लगातार पांच बार कांग्रेस को जीत मिली थी.
शर्मा ने शनिवार को यहां भाजपा की बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, ”सामगुड़ी सीट 25 साल तक कांग्रेस के पास रही. सामगुड़ी जैसे निर्वाचन क्षेत्र में 27,000 मतों के अंतर से हारना कांग्रेस के इतिहास की सबसे बड़ी शर्म की बात है. यह भाजपा की जीत से ज्यादा कांग्रेस की हार है.” पिछले महीने हुए उपचुनाव में भाजपा के दिप्लू रंजन शर्मा ने कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन के बेटे तंजील को 24,501 मतों के अंतर से हराया था.
सांसद की कथित टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा, ”दुख के बीच रकीबुल हुसैन ने एक अच्छी बात कही कि गोमांस खाना गलत है, है न? उन्होंने कहा है कि मतदाताओं को गोमांस परोसकर कांग्रेस-भाजपा का चुनाव जीतना गलत है.” शर्मा ने सवाल किया, ”मैं जानना चाहता हूं कि क्या कांग्रेस मतदाताओं को गोमांस की पेशकश करके सामगुड़ी जीत रही थी. वह सामगुड़ी को अच्छी तरह से जानते हैं. क्या इसका मतलब यह है कि गोमांस की पेशकश करके सामगुड़ी जीता जा सकता है?”
शर्मा ने कहा, ”मैं रकीबुल हुसैन से कहना चाहता हूं कि गोमांस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने खुद कहा है कि यह गलत है. उन्हें मुझे केवल लिखित में देने की जरूरत है कि न तो भाजपा और न ही कांग्रेस को गोमांस के बारे में बोलना चाहिए, बल्कि असम में इसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए. अगर हम ऐसा करते हैं, तो सभी समस्याएं हल हो जाएंगी.” मुख्यमंत्री ने कहा कि वह हुसैन के बयान की पृष्ठभूमि में गोमांस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का रुख जानने के लिए उन्हें पत्र लिखेंगे.
उन्होंने कहा, ”मैं भूपेन बोरा को पत्र लिखकर पूछूंगा कि क्या वह भी रकीबुल हुसैन की तरह गोमांस पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन करते हैं, और अगर ऐसा है तो मुझे बता दें. मैं गोमांस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दूंगा.ह्व शर्मा ने कहा, ”मुझे खुशी है कि रकीबुल हुसैन ने यह बयान दिया है, क्योंकि कम से कम एक कदम तो उठाया गया है. अब दूसरा कदम भूपेन बोरा को उठाना चाहिए.” असम में गोमांस का सेवन गैरकानूनी नहीं है, लेकिन असम मवेशी संरक्षण अधिनियम 2021 के तहत हिंदू, जैन और सिखों की बहुसंख्या वाले क्षेत्रों तथा किसी मंदिर या सत्र (वैष्णव मठ) के पांच किलोमीटर के दायरे में मवेशी वध और गोमांस की बिक्री पर प्रतिबंध है.
असम में पांच बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़कर वापस भेजा गया : हिमंत
असम पुलिस ने पांच बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ लिया और उन्हें पड़ोसी देश वापस भेज दिया. मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को यह जानकारी दी. हालांकि उन्होंने उस सीमावर्ती जिले का नाम नहीं बताया जहां अवैध अप्रवासियों को पकड़ा गया.
शर्मा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, “अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पांच और अवैध घुसपैठिए पकड़े गए! उच्च सतर्कता बरतते हुए असम पुलिस ने पांच अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ा और उन्हें सीमा पार भेज दिया.” उन्होंने बताया कि बिना वैध दस्तावेजों के सीमा पार करने की कोशिश कर रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान मोहम्मद नूर इस्लाम, मोहम्मद इमरान, यास्मीन अख्तर, इश्मो तारा अख्तर और मोहम्मद बाबुल हुसैन के रूप में हुई है. पड़ोसी देश में अशांति फैलने के बाद से असम में 160 से अधिक घुसपैठियों को पकड़कर वापस बांग्लादेश भेजा गया है. पूर्वोत्तर में 1,885 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पर चौकसी कड़ी कर दी गई है.
मणिपुर की स्थिति का असम पर असर पड़ेगा: हिमंत
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को कहा कि पड़ोसी राज्य मणिपुर की स्थिति का राज्य पर प्रभाव पड़ेगा. हिंसा प्रभावित मणिपुर की सीमा से सटी बराक घाटी में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हिंसा का कोई अन्य प्रभाव न हो.
कछार जिले में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए शर्मा ने कहा, “मुझे लगता है कि मणिपुर की स्थिति का असम पर कुछ असर जरूर पड़ेगा. इसीलिए हमने बराक घाटी में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि असम में इसका कोई असर न हो.” कछार जिले की बराक घाटी मणिपुर के जिरीबाम के साथ सीमा साझा करती है.
इंफाल घाटी और आसपास की पहाड़ियों में हुए संघर्षों से काफी हद तक अछूता रहा जातीय रूप से विविधतापूर्ण जिरीबाम इस वर्ष जून में एक खेत में एक किसान का क्षत-विक्षत शव पाए जाने के बाद हिंसा का गवाह बना. पिछले वर्ष मई से इंफाल घाटी स्थित मेइती और समीपवर्ती पहाड़ियों पर स्थित कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं.



