कथित धर्मांतरण को लेकर छत्तीसगढ़ बंद का मिला-जुला असर, कई जिलों में दुकानें बंद

रायपुर. छत्तीसगढ़ में कथित धर्मांतरण और कांकेर जिले में धर्मांतरित परिवार के एक व्यक्ति को दफनाने को लेकर हाल ही में हुई झड़प के विरोध में सर्व हिंदू समाज द्वारा बुलाए गए एक दिवसीय ‘छत्तीसगढ़ बंद’ का बुधवार को पूरे राज्य में मिला-जुला असर रहा.
बंद के दौरान राज्य के कई शहरों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ, जबकि अन्य जगहों पर इसका आंशिक असर देखने को मिला.
राज्य के रायपुर, दुर्ग, बस्तर, राजनांदगांव, कोरबा, बिलासपुर, बीजापुर और सरगुजा जिलों में ज्यादातर दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे. वहीं, बलरामपुर जैसे कुछ ग्रामीण इलाकों और जिलों में बंद का असर अपेक्षाकृत सीमित रहा.

राजधानी रायपुर में प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर एक मॉल में क्रिसमस समारोह के लिए की गई सजावट और तैयारियों में तोड़फोड़ की. अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया था. हालांकि, कई जगहों पर यातायात प्रभावित हुआ क्योंकि मुख्य रूप से दक्षिणपंथी संगठनों के प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन किया और कथित धर्मांतरण को रोकने के लिए सख्त कानूनों की मांग करते हुए सड़कों को जाम कर दिया. कई जिलों में व्यापार और वाणिज्य निकायों ने बंद को समर्थन दिया. विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम चौधरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यह विरोध राज्य में कथित जबरन धर्मांतरण की ओर ध्यान आर्किषत करने के उद्देश्य से किया गया था.

उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी बहुल इलाकों में मिशनरियों द्वारा नियमों का उल्लंघन करने और धर्मांतरण करने की लगातार घटनाएं सामने आ रही है. कांकेर जिले के बड़ेतेवड़ा गांव में हाल की घटना का जिक्र करते हुए चौधरी ने दावा किया कि स्थानीय लोगों द्वारा ईसाई रीति-रिवाजों के अनुसार पिता को गांव में दफनाने से मना करने के बावजूद, गांव के सरपंच ने कथित तौर पर शव को दफनाने का काम किया, जिससे तनाव और झड़पें हुईं. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से नाराज होकर सर्व हिंदू समाज ने राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया.

चौधरी ने कहा कि पूरे राज्य में जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन हुए, और राज्यपाल और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन अधिकारियों को सौंपे गए, जिसमें एक सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने की मांग की गई. उन्होंने कहा कि अन्य मांगों में आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना, धर्मांतरण को रोकना और धर्मांतरित व्यक्तियों को जाति-आधारित आरक्षण से हटाना शामिल है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया था. उन्होंने बताया कि तोड़फोड़ की कुछ घटनाओं को छोड़कर, देर शाम तक पूरे राज्य में स्थिति काफी हद तक शांतिपूर्ण और नियंत्रण में रही.

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ”तोड़फोड़ के बारे में शिकायतें मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी.” उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अक्टूबर में पहले कहा था कि सरकार राज्य विधानसभा के हाल ही में खत्म हुए शीतकालीन सत्र में एक सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लाएगी, हालांकि विधेयक पेश नहीं किया गया था. इस बीच, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि यह बंद, सरकार और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा प्रायोजित था.

क्षेत्र में 16 दिसंबर से तनाव बढ़ रहा था जब अमाबेड़ा पुलिस थाना इलाके के बडेतेवड़ा गांव के सरपंच राजमन सलाम ने अपने पिता के शव को अपनी निजी ज.मीन पर दफनाया था. सलाम ईसाई धर्म को मानते हैं, कुछ ग्रामीणों ने उनके पिता का अंतिम संस्कार ईसाई रीति-रिवाजों के अनुसार किए जाने पर आपत्ति जताई थी. जिसके बाद प्रशासन ने गांव से शव को निकालकर दूसरी जगह दफना दिया था.

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