
नई दिल्ली: आज भारत ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ बना रहा है। इस मौके पर डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की उस प्रतिक्रिया के रूप में वर्णित किया, जब उसकी शांति की प्रतिबद्धता को कमजोरी और संयम को निष्क्रियता समझा जाता है। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर एक प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए, एयर मार्शल भारती ने कहा कि भारत ने हमेशा ‘जियो और जीने दो’ के दर्शन का पालन किया है। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि जब भी इस भावना का उल्लंघन होता है, तो राष्ट्र निर्णायक और समझौताहीन कार्रवाई के साथ जवाब देता है। यह ऑपरेशन पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे।
उन्होंने आगे बताया हमने 7 मई को उनके 9 आतंकवादी कैंपों पर हमला किया और उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया। इसका सबूत सबके सामने है। हमने उनके 11 हवाई अड्डों पर हमला किया। हमने उनके 13 विमानों को नष्ट कर दिया, चाहे वे ज़मीन पर हों या हवा में।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान हमे कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा पाए हैं। न तो कोई सैन्य ढांचा और न ही ज्यादातर नागरिक ढांचे… वे चाहे कुछ भी कहें, याद रखें कि किस्से-कहानियां और बयानबाजी आपको जीत नहीं दिलाते। जीत का पैमाना तो ठोस तथ्य होते हैं…”
पाकिस्तान ने 100 से ज्यादा सैनिक मारे गए
इसी प्रेस वार्ता में मौजूद लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि पाकिस्तान ने 100 से ज्यादा सैनिक खो दिए। उन नौ आतंकवादी कैंपों में 100 आतंकवादी मारे गए।
उन्होंने कहा, उनकी सम्मान और पुरस्कारों की सूची, जो इंटरनेट पर जारी हुई थी, उससे हमें पता चला कि उनमें से कई पुरस्कार मरणोपरांत दिए गए थे। नियंत्रण रेखा पर हुई झड़पों में उन्हें जो नुकसान उठाना पड़ा, उसमें उन्होंने 100 से ज़्यादा सैनिक खो दिए। आखिरकार, अगर पाकिस्तानी अपनी युद्ध लड़ने की क्षमता में उतना ही निवेश करते, जितना वे अपनी कहानी गढ़ने में करते हैं, तो मुझे लगता है कि वे कहीं ज्यादा बेहतर प्रदर्शन करते।
आपरेशन सिंदूर ने भारती का सैन्य ताकत को दिखाया
इसी प्रेस वार्ता में अपनी बात रखते हुए वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद ने कहा ऑपरेशन सिंदूर ने हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व की रणनीतिक सोच को रेखांकित किया, जिसने एक सटीक और स्पष्ट जनादेश तथा आवश्यक ऑपरेशनल स्वतंत्रता प्रदान की, जिससे भारतीय रक्षा बलों द्वारा निर्णायक सैन्य कार्रवाई करना संभव हो सका। 6-7 मई की रात को, नौसेना के जवानों ने भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर आतंकी ठिकानों पर सटीक हमलों में भी हिस्सा लिया, जिससे तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और एकजुटता प्रदर्शित हुई।
जैसे-जैसे यह अभियान आगे बढ़ा, भारतीय नौसेना की अग्रिम तैनाती ने पाकिस्तानी नौसेना और वायु सेना की इकाइयों को रक्षात्मक मुद्रा अपनाने पर मजबूर कर दिया, वे काफी हद तक अपने बंदरगाहों तक ही सीमित रह गए या अपनी तटरेखा के करीब ही संचालित होते रहे। ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की उस क्षमता को साबित किया, जिसके तहत वह किसी भी असममित उकसावे का जवाब सोच-समझकर, सटीक और संतुलित बल के साथ दे सकता है।



