
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, जिनमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान चुनाव ड्यूटी पर तैनात कुछ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कथित तौर पर हटाए जाने के मामले में कोर्ट के दखल की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश वकील ने सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच को बताया कि जो लोग चुनाव करवा रहे हैं, वे भी वोट नहीं डाल पा रहे हैं। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 92 प्रतिशत मतदान पर खुशी व्यक्त की है।
याचिकाकर्ता को अपीलीय ट्रिब्यूनल के पास जाने का निर्देश
याचिकाकर्ता की दलील पर सीजेआई ने कहा, कृपया इस समस्या को अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने उठाएं। हम हर रोज अपने आदेश नहीं बदल सकते। पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चाहे वे इस साल वोट डाल पाएं या नहीं, वोटर लिस्ट में उनका नाम बने रहने के अधिक अहम अधिकार की कोर्ट द्वारा जांच की जाएगी। मामले में वकील ने तर्क दिया कि, ‘चुनाव ड्यूटी के लिए जारी आदेश में ईपीआईसी (मतदाता फोटो पहचान पत्र) नंबर का उल्लेख था, जिसे बाद में हटा दिया गया। अब, चुनाव ड्यूटी पर तैनात लोग वोट नहीं दे सकते। यह स्पष्ट रूप से मनमाना है।’
अपीलीय ट्रिब्यूनल को सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल चुनावों में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से बाहर किए गए लोगों को यह छूट दी है कि वे अपनी शिकायत लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास जा सकते हैं। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपीलीय ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया है कि वे उन बाहर किए गए लोगों के मामलों की बारी से पहले सुनवाई करें, जिनकी अपीलें लंबित हैं और जिन्होंने अपने मामले में तत्काल सुनवाई की जरूरत साबित की है।
मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने कहा, ‘ज्यादातर मुद्दों पर हमने 13 अप्रैल के अपने आदेश में विस्तार से बात की है। हम समझ सकते हैं कि रोजमर्रा के आधार पर मुद्दे उठ सकते हैं। हम याचिकाकर्ताओं और अन्य संबंधित पक्षों को यह छूट देते हैं कि वे प्रशासनिक पक्ष पर कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क कर सकते हैं। इसी तरह, अगर मामलों में न्यायिक दखल की जरूरत है, तो वे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क कर सकते हैं। जहां तक उन नामों का सवाल है जिन्हें एसआईआर में बाहर किया गया है और जिन्होंने अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने अपील दायर की है, ट्रिब्यूनल उनकी अपीलों पर बारी से पहले सुनवाई कर सकता है, खासकर उन अपीलकर्ताओं की जो तत्काल सुनवाई की जरूरत साबित कर पाते हैं।’



