कांग्रेस ने आपातकाल ‘थोपकर’ संविधान का गला दबाने का कार्य किया : मुख्यमंत्री योगी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 22 Dec 2025 07:47 PM
कांग्रेस ने आपातकाल ‘थोपकर’ संविधान का गला दबाने का कार्य किया : मुख्यमंत्री योगी
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्­यमंत्री योगी आदित्­यनाथ ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि जब राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के शताब्दी महोत्सव का अवसर आया तब कांग्रेस ने देश के अंदर आपातकाल ‘थोपकर’ संविधान का गला दबाने का कार्य किया. योगी ने शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सदन में वंदे मातरम पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा, “वंदे मातरम का सम्मान न केवल एक भावनात्मक अभिव्यक्ति है, बल्कि अपने संवैधानिक मूल्यों के प्रति राष्ट्रीय कर्तव्यों का बोध भी हम सबको कराता है.”

उन्होंने कहा, “यह राष्ट्र की आत्मा, संघर्ष और संकल्प का भी प्रतीक है. जब वंदे मातरम अपनी रजत जयंती मना रहा था तब देश में ब्रिटिश हुकूमत थी.” योगी ने कहा, “वंदे मातरम की रचना उस समय हुई थी, जब भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद बौखलाया हुआ ब्रिटिश हुकूमत दमन और अत्याचार की पराकाष्ठा पर पहुंच गया था और भारतीयों को यातनाएं दी जा रही थीं.” नेता सदन ने कहा कि उस समय देश की आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाने का मंच कांग्रेस थी और 1896 में पहली बार कांग्रेस के अधिवेशन में रविंद्र नाथ टैगोर ने इसे अपना स्­वर प्रदान किया था और यह पूरे देश के लिए एक मंत्र बन गया था.

उन्­होंने कहा, “लेकिन जब वंदे मातरम के शताब्दी महोत्सव का अवसर आया तब जिस कांग्रेस के मंच से पहली बार वंदे मातरम का गान हुआ था, उस कांग्रेस ने देश के अंदर (1975 में) आपातकाल थोपकर संविधान का गला दबाने का कार्य किया.” योगी आदित्­यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्­द्र मोदी के नेतृत्­व में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की साकार होती परिकल्पना का जिक्र करते हुए कहा, “आज 150 वर्ष वंदे मातरम के पूरे हो रहे हैं तो प्रधानमंत्री नरेन्­द्र मोदी के आभारी हैं, जिनके नेतृत्­व में भारत पूरे आत्­मविश्­वास के साथ एक विकसित भारत की संकल्पना के साथ आगे बढ़ा है.”

उन्होंने कहा, “जब हम वंदे मातरम की बात करते हैं तो हम सबके लिए एक गीत मात्र नहीं बल्कि यह हमारे देश के अंदर स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, उसका उद्घोष और भारत के क्रांतिकारियों के प्रति सच्ची भावना है.” मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की नीति अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक (मोहम्मद अली) जिन्ना कांग्रेस में थे वंदे मातरम विवाद का मुख्य मुद्दा नहीं था.

उन्होंने कहा, “जैसे ही जिन्ना ने कांग्रेस छोड़ी, उन्होंने इसे मुस्लिम लीग का हथियार बना लिया और जानबूझकर गाने को सांप्रदायिक रंग दिया. गाना तो वही रहा लेकिन एजेंडा बदल गया.” योगी ने कहा, “15 अक्टूबर, 1937 को लखनऊ से मोहम्मद अली जिन्ना ने वंदे मातरम के खिलाफ नारा लगाया और उस समय पंडित नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष थे. 20 अक्टूबर, 1937 को नेहरू ने सुभाष चंद्र बोस को एक पत्र लिखा, जिसमें कहा गया था कि इसका बैकग्राउंड मुसलमानों को असहज कर रहा है.”

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, क्रांतिकारियों के साहस और राष्ट्र के आत्मसम्मान का मंत्र है. मुख्यमंत्री ने वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि बैरकपुर में मंगल पांडेय, गोरखपुर में शहीद बंधु सिंह, मेरठ में धन सिंह कोतवाल और झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में देशभर में संघर्ष हुए. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संघर्ष की विफलता के बाद उपजी हताशा के दौर में वंदे मातरम् ने देश की सोई हुई आत्मा को जगाने का काम किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय डिप्टी कलेक्टर के रूप में ब्रिटिश शासन में कार्यरत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने आम जनमानस की भावनाओं को वंदे मातरम् के माध्यम से स्वर दिया. योगी ने कहा कि वंदे मातरम औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का प्रतीक बना.

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