टमाटर, आलू, प्याज के दामों को लेकर कांग्रेस का प्रधानमंत्री पर निशाना; कहा- थाली से ‘टॉप’ नदारद

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 13 Nov 2024 08:40 PM
टमाटर, आलू, प्याज के दामों को लेकर कांग्रेस का प्रधानमंत्री पर निशाना; कहा- थाली से ‘टॉप’ नदारद

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नयी दिल्ली. टमाटर, प्याज और आलू के अधिक मूल्यों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर उनके एक पुराने वीडियो के माध्यम से निशाना साधते हुए कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि मोदी की नीतियों की विफलता के कारण गरीब की थाली से ‘टॉप’ नदारद है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर मोदी का एक वीडियो साझा किया जिसमें वह भारतीय परिवारों में ‘टॉप’ (इन तीनों सब्जियों) के महत्व के बारे में बात कर रहे थे.

उन्होंने टमाटर (टोमेटो का ‘टी’), प्याज (ऑनियन का ‘ओ’) और आलू (पोटेटो का ‘पी’) के लिए ‘टॉप’ शब्द का इस्तेमाल किया गया.
रमेश ने कहा, ”यह कैसी ‘टॉप’ प्राथमिकता है प्रधानमंत्री जी? आपने जिनके दाम प्राथमिकता में सबसे ऊपर रखने की बात कही थी उनके दाम आसमान छूते जा रहे हैं. इनकी वजह से सब्जियों की महंगाई दर 42 प्रतिशत तक पहुंच गई है. टमाटर की महंगाई दर 161.3 प्रतिशत, आलू की महंगाई दर 64.9 प्रतिशत और प्याज की 51.8 प्रतिशत है.” रमेश ने कहा, ”आपकी नीतियों की नाकामी की वजह से ‘टॉप’ गरीब की थाली से गायब हो रहा है.” कांग्रेस नेता ने मंगलवार को खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने के कारण महंगाई में वृद्धि को लेकर चिंता व्यक्त की थी और सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में वह खाद्य पदार्थों की कीमतों को मुद्रास्फीति के आकलन से बाहर कर सकती है.

रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था, ”खाद्य मुद्रास्फीति अब दोहरे अंक में पहुंच गई है. अक्टूबर में सब्जियों की कीमतों में 42.18 प्रतिशत की वृद्धि हुई. मुंबई जैसी जगहों पर प्याज अब 80 रुपये प्रति किलोग्राम की ऊंची कीमत पर बिक रहा है. खुदरा मुद्रास्फीति अब रिजर्व बैंक (आरबीआई) के छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर से ऊपर है.” उन्होंने कहा, ”यह सब सुस्त खपत, निवेश में कमी, स्थिर वास्तविक मजदूरी और व्यापक बेरोजगारी के साथ हो रहा है. जब खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि का सामना करना पड़ता है, तो सरकार का जोर केवल खाद्य पदार्थों की कीमतों को मुद्रास्फीति के आकलन से बाहर करने पर होता है.”

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अक्टूबर में बढ़कर 6.21 प्रतिशत हो गई, जो इससे पिछले महीने यानी सितंबर में 5.49 प्रतिशत थी. मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ी है. इस तरह खुदरा मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर के ऊपर निकल गई है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों से पता चलता है कि खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति अक्टूबर में बढ़कर 10.87 प्रतिशत हो गई, जो सितंबर में 9.24 प्रतिशत और पिछले साल अक्टूबर में 6.61 प्रतिशत थी.

महाराष्ट्र में भाजपा ने सबसे ज्यादा किसानों की ‘पीठ में छुरा घोंपा’ : कांग्रेस

कांग्रेस ने बुधवार को दावा किया कि महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने किसानों से ज्यादा किसी की ‘पीठ में छुरा नहीं घोंपा’ है. कांग्रेस के प्रभारी महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बढ़ती लागत के बावजूद किसानों को ‘शून्य सहायता’ प्रदान की है और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी दर्जा देने से भी इनकार कर दिया है.

रमेश ने कहा कि किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है, क्योंकि सूखे के दौरान उन्हें खराब उपज का सामना करना पड़ता है और जब बारिश प्रचुर मात्रा में होती है – जैसे कि 2024 में – तो किसानों को अधिक उपज के कारण कीमतों में अचानक गिरावट का सामना करना पड़ता है.

उन्होंने कहा कि इसका एकमात्र समाधान वही है जिसकी कांग्रेस ने गारंटी दी है, राष्ट्रीय स्तर पर भी और राज्य स्तर पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा, और स्वामीनाथन आयोग के फॉर्मूले के अनुसार एमएसपी को लागू करना – मतलब खेती की समग्र लागत का 1.5 गुना मूल्य.

रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”वर्ष 2013: देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के किसानों को सोयाबीन के लिए 6,000 रुपए प्रति क्विंटल का दाम देने का वादा किया था. 2014: गुजरात के तत्कालीन और पूरी तरह से ‘बायोलॉजिकल मुख्यमंत्री’ ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का वादा किया, जिससे एमएसपी को कानूनी दर्जा मिलता. 2024: सोयाबीन लगभग 4,200 रुपए प्रति क्विंटल पर बिक रहा जो फडणवीस के 6,000 रुपए के वादे और 4,892 रुपए की तय एमएसपी से भी नीचे.” उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सोयाबीन अनुमानित रूप से 50 लाख हेक्टेयर में उगाया जाता है. इसके अलावा करीब 40 लाख हेक्टेयर में कपास भी उगाया जाता है, जिसकी कीमत भी हाल के वर्षों में गिरी है.

रमेश ने दावा किया, ”इन दोनों फसलों के किसानों को पूरी तरह से उनके हाल पर छोड़ दिया गया है. सरकार ने 13 लाख टन सोयाबीन खरीदने का बड़ा वादा किया था, लेकिन अब तक मुश्किल से 2,000 टन ही खरीदा जा सका है. आमतौर पर भारतीय कपास निगम द्वारा बड़े पैमाने पर कपास की खरीद की जाती है, लेकिन इस साल वह भी नहीं हो पाई है.” उन्होंने कहा, ”शायद ही कोई ऐसा कोई क्षेत्र है जहां भाजपा ने किसानों की पीठ में छुरा न घोंपा हो. उन्होंने बढ़ती इनपुट कीमतों पर कोई सहायता प्रदान नहीं की है. उन्होंने एमएसपी को कानूनी दर्जा देने से इनकार कर दिया है.” उनकी यह टिप्पणी महाराष्ट्र में 20 नवंबर को होने वाले चुनाव के लिये प्रचार के बीच आई है. मतगणना 23 नवंबर को होगी.

गोड्डा में अदाणी एसईजेड को ‘त्वरित मंजूरी’, जबकि जमशेदपुर का औद्योगिक केंद्र अधर में: जयराम रमेश

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बुधवार को दावा किया कि जमशेदपुर के महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र का आधे से अधिक हिस्सा 2015 से नियामकीय कारणों से अधर में लटका हुआ है, जबकि गोड्डा में अदाणी पावर के लिए एसईजेड परियोजना को 2019 में ‘तेजी से’ मंजूरी दी गई थी. रमेश ने कहा कि यह ‘दुखद स्थिति’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्राथमिकताओं को दर्शाती है. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने परियोजनाओं को वन और पर्यावरण मंजूरी देने में देरी की है, जिससे विकास बाधित हो रहा है. रमेश ने विश्वास जताया कि जमशेदपुर के लोगों ने ऐसे नेताओं- बन्ना गुप्ता (जमशेदपुर पश्चिम) और अजय कुमार (जमशेदपुर पूर्व) को वोट दिया है जो उनके साथ और उनके लिए खड़े रहेंगे. झारखंड विधानसभा चुनाव के पहले चरण में जमशेदपुर पूर्व और जमशेदपुर पश्चिम सीटों पर बुधवार को मतदान हुआ.

कांग्रेस नेता ने कहा, ह्लजमशेदपुर के महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र – आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र – का आधे से अधिक हिस्सा 2015 से विनियामकीय अनिश्चितता में है. इस विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में 1,200 इकाइयां हैं. इसमें 11 बड़े, 64 छोटे और 166 सूक्ष्म उद्योग शामिल हैं.ह्व उन्होंने कहा, ह्लसाल 2015 में झारखंड राज्य उद्योग विभाग ने आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में 276 एकड़ के एसईजेड के भीतर 54 एकड़ वन भूमि के बारे में स्पष्टीकरण दिया था.ह्व राज्य में दूसरे चरण के लिए मतदान 20 नवंबर को होगा और मतगणना 23 नवंबर को होगी.

By Yogesh Kumar Sahu