
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू पर कटाक्ष करते हुए कहा कि छह साल पहले उन्होंने विशेष राज्य के दर्जे की मांग को लेकर राष्ट्रीय जनजांत्रिक गठबंधन (राजग) छोड़ दिया था, लेकिन अब सिर्फ अमरावती के लिए ‘विशेष वित्तीय सहायता प्राप्त कर सके.
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह सवाल भी किया कि यह घोषणा करने में 10 साल क्यों लग गए कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में जिसका वादा किया गया था उसे लागू किया जाएगा? सरकार ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के विकास के लिए कई उपायों की घोषणा की. इसमें राज्य की राजधानी (अमरावती) के विकास के लिए चालू वित्त वर्ष और भविष्य के वर्षों में 15,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था करना भी शामिल है. लोकसभा में केंद्रीय बजट 2024-25 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार राजधानी शहर के विकास के लिए विशेष वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराएगी.
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”2018 में आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने में ‘नॉन बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री की विफलता के कारण चंद्रबाबू नायडू ने राजग छोड़ दिया था. उस नाटक के छह साल बाद ऐसे समय में जब सरकार समर्थन के लिए नायडू के सांसदों पर निर्भर है, वह अमरावती के लिए केवल ”विशेष वित्तीय सहायता” प्राप्त करने में कामयाब रहे हैं.” उन्होंने सवाल किया, ”यह घोषणा करने में 10 साल क्यों लग गए कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में जिसका वादा किया गया था उसे लागू किया जाएगा?”
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”यह बेहद निराशाजनक है कि डेटा और सांख्यिकी पर वित्त मंत्री की घोषणा में दशकीय जनगणना के लिए धन जारी करने का कोई उल्लेख नहीं है, जो कि 2021 में होनी थी, लेकिन अभी भी नहीं कराई गई है. आजादी के बाद यह पहली बार है कि सरकार समय पर जनगणना कराने में विफल रही है.” उन्होंने दावा किया कि जनगणना नहीं होने का राज्य की प्रशासनिक क्षमताओं पर परिणाम गंभीर हैं और इसका एक उदाहरण 10-12 करोड़ वे लोग हैं जिन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के दायरे से बाहर रखा गया है. रमेश ने कहा, ”इसका मतलब यह भी है कि सरकार अपने राजग के सहयोगियों के आह्वान के बावजूद, सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना से बचना जारी रखेगी.”



