
वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को वाराणसी दौरे के दूसरे दिन ‘स्वर्वेद महामंदिर’ का लोकार्पण करते हुए कहा कि सरकार, समाज और संतगण, सब साथ मिलकर काशी के कायाकल्प के लिए कार्य कर रहे हैं. आज स्वर्वेद मंदिर का बनकर तैयार होना इसी ईश्वरीय प्रेरणा का उदाहरण है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को वाराणसी में दुनिया के सबसे बड़े ध्यान केंद्र ‘स्वर्वेद महामंदिर’ का उद्घाटन किया .
उन्होंने कहा, ”ये महामंदिर, मर्हिष सदाफल देव जी की शिक्षाओं, उनके उपदेशों का प्रतीक है. इस मंदिर की दिव्यता जितनी आर्किषत करती है, इसकी भव्यता हमें उतना ही अचंभित भी करती है. इसलिए मंदिर का भ्रमण करते हुए मैं खुद भी मंत्र-मुग्ध हो गया था.” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”स्वर्वेद महामंदिर भारत के सामाजिक और आध्यात्मिक सामर्थ्य का एक आधुनिक प्रतीक है. मैं देख रहा था, इसकी दीवारों पर स्वर्वेद के श्लोक बड़ी सुंदरता के साथ अंकित किये गये हैं. वेद, उपनिषद्, रामायण, गीता और महाभारत आदि ग्रन्थों के दिव्य सन्देश भी इसमें चित्रों के जरिये उकेरे गए हैं. इसलिए, ये मंदिर एक तरह से आध्यात्म, इतिहास और संस्कृति का जीवंत उदाहरण है. यहां हजारों साधक एक साथ विहंगम योग साधना कर सकते हैं. इसलिए, ये महामंदिर एक योग तीर्थ भी है और साथ-साथ ये ज्ञानतीर्थ भी है.”
उन्होंने कहा, ”मैं इस अद्भुत आध्यात्मिक निर्माण के लिए स्वर्वेद महामंदिर न्यास को और लाखों-लाख अनुयायियों को बधाई देता हूं. विशेष रूप से मैं पूज्य स्वामी श्री स्वतंत्र देव जी और पूज्य श्री विज्ञान देव जी का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं, जिन्होंने इस अनुष्ठान को पूरा किया.” उन्होंने कहा कि आपको याद होगा, दो वर्ष पहले इसी तरह हम अखिल भारतीय विहंगम योग संस्थान के वार्षिकोत्सव में एकत्रित हुये थे. एक बार फिर मुझे विहंगम योग संत समाज के शताब्दी समारोह के ऐतिहासिक कार्यक्रम में आने का अवसर मिला है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मर्हिष सदाफल देव जी ने पिछली सदी में ज्ञान और योग की दिव्य ज्योति प्रज्वलित की थी. इन सौ वर्षों की यात्रा में इस दिव्य ज्योति ने देश-दुनिया के लाखों-करोड़ों लोगों के जीवन को परिर्वितत किया है. उन्होंने कहा, ”इस पुण्य अवसर पर यहां 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ का आयोजन भी हो रहा है. मुझे खुशी है, मुझे विश्वास है, इस महायज्ञ की हर एक आहुति से विकसित भारत का संकल्प और सशक्त होगा.”
श्रद्धालुओं को संबोधित करने से पहले प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ‘स्वर्वेद महामंदिर’ का दौरा किया. यहां 20,000 से अधिक लोग एक साथ बैठकर ध्यान कर सकते हैं. सात मंजिला इस भव्य महामंदिर की दीवारों पर स्वर्वेद के श्लोक उकेरे गए हैं. स्वर्वेद महामंदिर प्राचीन दर्शन, आध्यात्मिकता और आधुनिक वास्तुकला का एक मिलाजुला रूप है.
देश अब ‘गुलामी की मानसिकता से मुक्ति’ और अपनी ‘विरासत पर गर्व’ की घोषणा कर रहा है: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि आजादी के सात दशक बाद आज समय का चक्र एक बार फिर घूमा है और देश अब ‘गुलामी की मानसिकता से मुक्ति’ और अपनी ‘विरासत पर गर्व’ की घोषणा कर रहा है. उन्होंने कहा, ”गुलामी के दौर में जिन अत्याचारियों ने भारत को कमजोर करने का प्रयास किया, उन्होंने सबसे पहले हमारे सांस्कृतिक प्रतीकों को ही निशाना बनाया. आजादी के बाद इन सांस्कृतिक प्रतीकों का पुर्निनर्माण आवश्यक था. अगर हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देते, तो देश के भीतर एकजुटता और आत्मसम्मान का भाव मजबूत होता. लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा हुआ नहीं.”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुर्निनर्माण तक का विरोध किया गया था और इस तरह की सोच दशकों तक देश पर हावी रही. इसका नतीजा यह हुआ कि देश हीन भावना के गर्त में चला गया. अपनी विरासत पर गर्व करना भूल गया.” प्रधानमंत्री ने कहा, ”आजादी के सात दशक बाद आज समय का चक्र एक बार फिर घूमा है. देश अब ‘गुलामी की मानसिकता से मुक्ति’ और अपनी ‘विरासत पर गर्व’ की घोषणा कर रहा है.”
उन्होंने कहा, ”जो काम सोमनाथ से शुरू हुआ था, वो अब एक अभियान बन गया है. आज काशी में विश्वनाथ धाम की भव्यता भारत के अविनाशी वैभव की गाथा गा रही है. आज महाकाल महालोक हमारी अमरता का प्रमाण दे रहा है.” मोदी ने कहा, ”आज केदारनाथ धाम भी विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है. बुद्ध र्सिकट का विकास करके भारत एक बार फिर दुनिया को बुद्ध की तपोभूमि पर आमंत्रित कर रहा है. देश में राम र्सिकट के विकास के लिए भी तेजी से काम हो रहा है और अगले कुछ सप्ताह में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी पूरा होने जा रहा है.” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक ऐसा राष्ट्र है, जो सदियों तक विश्व के लिए आर्थिक समृद्धि और भौतिक विकास का उदाहरण रहा है और अब सरकार, समाज और संतगण, सब साथ मिलकर काशी के कायाकल्प के लिए काम कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि आज हमारे तीर्थ स्थलों का विकास भी हो रहा है और भारत आधुनिक ढांचे की दृष्टि से नए रिकॉर्ड भी बना रहा है .
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”अब बनारस का मतलब है- विकास. अब बनारस का मतलब है -आस्था के साथ आधुनिक सुविधाएं. अब बनारस का मतलब है- स्वच्छता और बदलाव. बनारस आज विकास के अद्वितीय पथ पर अग्रसर है.”



