Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Mon, 27 Jul 2026 04:50 PM
दिल्ली/गुरुग्राम: सोनम वांगचुक ने अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ सोमवार को राजघाट पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद यहां पहुंचे थे। वांगचुक ने 26 दिन के उपवास और आंदोलन के समापन के बाद यह श्रद्धांजलि दी।
राजघाट पर श्रद्धांजलि देने के बाद उन्होंने अपने विचार साझा किए। वांगचुक ने कहा कि वह सबसे पहले महात्मा गांधी को याद करना चाहते थे। उन्होंने गांधीजी के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। उन्होंने देश को यह बताया कि गांधीजी का दिखाया रास्ता आज भी उतना ही सही और प्रासंगिक है जितना सौ साल पहले था। पिछले पांच-छह साल से वे लद्दाख में गांधीजी के इस तरीके को अपना रहे हैं। उन्होंने पाया कि यह तरीका बहुत सही और प्रासंगिक है। उन्हें पहले यकीन नहीं था कि यह राष्ट्रीय स्तर पर काम करेगा या नहीं।
मैं देश के लोगों को बधाई देता हूं: सोनम वांगचुक
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने राजघाट पर कहा कि मैं देश के युवाओं, आम लोगों और सभी नागरिकों को बधाई देना चाहता हूं। मैं बुजुर्गों, हर उम्र के लोगों और उन युवा आयोजकों को भी बधाई देता हूं, जिन्होंने इस आंदोलन को इतनी शांति से आगे बढ़ाया। हमें यह समझना होगा कि अगर कोई समाधान या कामयाबी मिली है, तो वह हमारी ताकत या लाठी-पत्थर के इस्तेमाल से नहीं मिली है। बल्कि, यह शांति की अपील और हमारी अपनी तकलीफों से मिली है।
इस्तीफा तो बस शुरुआत: सोनम वांगचुक
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा कि इस्तीफा तो बस शुरुआत है। अगर अब से इस मुद्दे को माना जाए और उस पर काम किया जाए, तो हमारा देश बेहतर बनेगा। मेरी नजर में यह प्रक्रिया पहले से ही चल रही है। अभी बातचीत चल रही है और मुझे उम्मीद है कि बहुत सकारात्मक बातचीत के ज़रिए देश के लिए सबसे सही रास्ता अपनाया जाएगा, जिससे हम आपसी सद्भाव से एक बेहतरीन सिस्टम लागू कर सकेंगे।
जानें वांगचुक पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल पर क्या बोले
पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल पर वांगचुक ने कहा कि यह अच्छी बात है। इस पर चर्चा होनी चाहिए और अच्छी तरह सोच-विचार के बाद सही कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग शांति से विरोध कर रहे हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। अगर शरारती तत्व बुरी नीयत से काम कर रहे हैं, तो हम यह नहीं कह सकते कि कुछ नहीं होगा। लेकिन, मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि शांतिपूर्ण विरोध हमारा संवैधानिक अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। बाकी, कानून अपना काम करेगा।
इस बार उन्हें यह देखकर भरोसा हुआ कि सौ साल बाद भी यह राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक है। वांगचुक ने कहा कि यह शायद आने वाले सौ या हजार साल तक भी ऐसा ही रहेगा। इसीलिए उन्होंने भारत और दुनिया के लोगों से अपील की। उन्होंने कहा कि लोग अपनी शिकायतें और बातें बापू द्वारा दिखाए गए शांति के रास्ते से रखें।
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