हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व मां लक्ष्मी की आराधना, चंद्रमा की पूजा और सुख-समृद्धि की कामना के लिए खास होता है। इस अवसर पर कुछ पारंपरिक उपाय किए जाते हैं, जिनके बारे में धार्मिक मान्यता है कि इनसे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
शरद पूर्णिमा कब मनाई जाएगी?
पंचांग के अनुसार, 24 अक्तूबर 2026 को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्तूबर को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है। शाम के समय पूजा-पाठ और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।
मां लक्ष्मी की कृपा पाने के उपाय
- पूजा: शाम को घर के पूजा स्थल पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की विधि-विधान से पूजा करें। दीपक जलाएं, पुष्प अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
- पाठ: मान्यता है कि इस दिन श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ होता है। श्रद्धा से मंत्र जाप करने पर मन को शांति मिलती है।
- चांदी के सिक्के और कौड़ियां: पूजा में चांदी के सिक्के और सात कौड़ियां रखने की परंपरा है। इन्हें हल्दी और केसर अर्पित करके मां लक्ष्मी से धन-धान्य और बरकत की प्रार्थना करें। पूजा के बाद इन्हें साफ और सुरक्षित स्थान या तिजोरी में रखा जा सकता है।
- श्री यंत्र की पूजा: इसे भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मां लक्ष्मी का स्मरण करें और श्री सूक्त का पाठ करें।
शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने की परंपरा क्यों है?
इस दिन चावल और दूध की खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा प्रचलित है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृत के समान गुणों वाली मानी जाती हैं। इसी विश्वास के चलते खीर को रात में खुले स्थान पर रखकर बाद में प्रसाद के रूप में खाने की परंपरा है। मौसम बदलने के दौरान दूध से बनी खीर खाना भारतीय खानपान की परंपराओं का हिस्सा भी रहा है।
हालांकि, चंद्रमा की किरणों से खीर में औषधीय गुण या अमृत बनने का दावा धार्मिक मान्यता है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं।
शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस रात मां लक्ष्मी के पूजन और जागरण का विशेष महत्व बताया गया है। भक्त धन, सुख, शांति और परिवार की खुशहाली के लिए मां लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं। इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा करना, जरूरतमंदों की सहायता करना और परिवार के साथ पर्व मनाना शुभ माना जाता है। पूजा के साथ स्वच्छता, संयम और सेवा जैसे मूल्यों को अपनाना भी इस त्योहार की भावना को सार्थक बनाता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। इसकी सटीकता और संपूर्णता की पुष्टि नहीं की जाती।