
संयुक्त राष्ट्र. भारत ने चीन की अध्यक्षता में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में कहा कि यूएनएससी के स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने का विरोध करने वाले देश यथास्थितिवादी व्यवस्था के समर्थक हैं, जिनकी सोच संकीर्ण और दृष्टिकोण गैर-प्रगतिशील है.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने इस बात पर जोर दिया कि इस रवैये को “अब स्वीकार नहीं किया जा सकता.” उन्होंने कहा, “‘ग्लोबल साउथ’ से अनुचित व्यवहार जारी नहीं रखा जा सकता. भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों के प्रमुख देश संयुक्त राष्ट्र के निकायों में उचित प्रतिनिधित्व के हकदार हैं. जहां तक सुरक्षा परिषद की बात है, इसका मतलब स्थायी श्रेणी की सदस्यता से है.” ‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संर्दिभत करने के लिए किया जाता है.
पंद्रह सदस्यीय सुरक्षा परिषद में “बहुपक्षवाद का अभ्यास और वैश्विक शासन में सुधार” विषय पर आयोजित खुली बहस के दौरान हरीश ने कहा कि यूएनएससी में सुधारों के लिए तीन मूलभूत सिद्धांतों पर अमल आवश्यक है, जिनमें स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सदस्यों की संख्या में वृद्धि, ‘टेक्स्ट’ आधारित वार्ता की शुरुआत और महत्वाकांक्षी समयसीमा में ठोस परिणाम हासिल किया जाना शामिल है.
उन्होंने कहा, “जो लोग स्थायी श्रेणी के विस्तार का विरोध कर रहे हैं, वे संकीर्ण सोच वाले यथास्थितिवादी हैं. उनका दृष्टिकोण साफ तौर पर गैर-प्रगतिशील है. इसे अब स्वीकार नहीं किया जा सकता.” हरीश ने पिछले साल सितंबर में आयोजित “भविष्य का शिखर सम्मेलन” में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से की गई इस टिप्पणी का जिक्र किया कि “सुधार प्रासंगिकता की कुंजी है.”
उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र के मूल निकाय और ढांचे इतिहास की एक अलग अवधि का प्रतिनिधित्व करते हैं और भारत सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करने के मामले में सुसंगत, स्पष्ट और एक प्रमुख आवाज रहा है.” हरीश ने कहा, “हमारी दुनिया बदल चुकी है और संयुक्त राष्ट्र को समय के साथ बदलने की जरूरत है. इसे 1945 के बजाय वर्तमान वैश्विक व्यवस्था को प्रतिबिंबित करना होगा.”
भारत सुरक्षा परिषद में सुधार का मुखर समर्थक रहा है. उसने संयुक्त राष्ट्र निकाय की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की पैरवी की है. भारत का कहना है कि 1945 में स्थापित 15 सदस्यीय परिषद 21वीं सदी में उद्देश्य के लिए उपयुक्त नहीं है और समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है. उसने इस बात पर जोर दिया है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का हकदार है. भारत आखिरी बार 2021-22 में अस्थायी सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का हिस्सा था.
जैश जैसे संगठनों के जरिये पाकिस्तान के आतंकवादी कृत्यों का हम शिकार रहे हैं: भारत
संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में कहा कि भारत जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के जरिये पाकिस्तान के आतंकवादी कृत्यों का शिकार रहा है और यह ”बड़ी विडंबना” है कि आतंकवाद का वैश्विक केंद्र इस संकट के खिलाफ लड़ने का दावा करते हुए अपनी पीठ थपथपाता है.
चीन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार द्वारा मंगलवार को परिषद की ‘बहुपक्षवाद का अभ्यास, वैश्विक प्रशासन में सुधार’ विषय पर खुली बहस में जम्मू-कश्मीर के बारे में टिप्पणी करने के बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कड़े शब्दों में देश का रुख स्पष्ट किया.
हरीश ने कहा, ”पाकिस्तान आतंकवाद का वैश्विक केंद्र है, जो 20 से अधिक संयुक्त राष्ट्र-सूचीबद्ध आतंकवादी संगठनों को पनाह देता है और सीमा पार आतंकवाद का समर्थन प्रदान करता है.” उन्होंने कहा, ” इसलिए यह एक बड़ी विडंबना है जब पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे होने के लिए खुद की पीठ थपथपाता है. भारत जैश-ए-मोहम्मद और हरकत उल मुजाहिदीन जैसे कई अन्य आतंकवादी संगठनों के जरिये इस देश द्वारा किए गए आतंकवादी कृत्यों का शिकार रहा है.” पाकिस्तान स्थित कई आतंकवादी संगठन और लोग संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति’ के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं और उनकी संपत्ति जब्त की गई है, उनकी यात्रा पर प्रतिबंध हैं….
पूर्व में पाकिस्तान के मित्र चीन ने अक्सर भारत और अमेरिका जैसे उसके सहयोगियों द्वारा संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को काली सूची में डालने के लिए प्रस्तुत प्रस्तावों को बाधिक किया है. हरीश ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद का कोई भी रूप, प्रकार और उद्देश्य चाहे जो भी हो, उसे उचित नहीं ठहराया जा सकता.
उन्होंने कहा, ”कोई भी राजनीतिक शिकायत निर्दोष नागरिकों के खिलाफ किए गए आतंकवाद को उचित नहीं ठहरा सकती. यह संस्था अच्छे और बुरे आतंकवादियों के बीच कोई अंतर नहीं कर सकती है.” उन्होंने कहा कि डार को इस बात पर ध्यान देना चाहिए और परिषद का समय बर्बाद न किया जाए. हरीश ने साथ ही कहा कि जम्मू-कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न व अविभाज्य अंग था, है और रहेगा. वास्तव में यह पाकिस्तान है जिसने ” जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा” कर रखा है.
उन्होंने कहा, ”गलत सूचना और भ्रामक जानकारी, झूठ व मिथ्य प्रचार के पाकिस्तान के अभियान जमीनी हकीकत को नहीं बदल सकते.” जम्मू-कश्मीर में पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में हुए विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए हरीश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने चुनाव में हिस्सा लिया और अपनी सरकार चुनने के लिए बड़ी संख्या में मतदान किया. उन्होंने कहा, ”जम्मू-कश्मीर के लोगों की पसंद स्पष्ट है. पाकिस्तान की स्थिति से विपरीत, जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र जीवंत और मजबूत है…”



