अदालत ने सेंसर बोर्ड को फिल्म ‘गुठली लड्डू’ से ‘आपत्तिजनक’ शब्द हटाने की मांग पर निर्णय लेने को कहा

अहमदाबाद. गुजरात उच्च न्यायालय ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को हिंदी फिल्म ‘गुठली लड्डू’ में वाल्मीकि समुदाय के लिए ”आपत्तिजनक” शब्द के इस्तेमाल के बारे में 24 घंटे में फैसला लेने का निर्देश दिया. न्यायमूर्ति वैभवी नानावटी ने एक आदेश जारी कर सीबीएफसी को सिनेमैटोग्राफ अधिनियम 1952 की धारा छह के प्रावधानों के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए 24 घंटे के भीतर इस मुद्दे पर निर्णय लेने को कहा .

फिल्म के शुक्रवार (13 अक्टूबर) को प्रर्दिशत किए जाने के मद्देनजर अदालत ने सहायक सॉलिसिटर जनरल देवांग व्यास के अनुरोध पर पेश हुए अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे को इस आदेश से तुरंत सीबीएफसी को अवगत कराने का निर्देश दिया. बृहस्पतिवार को एक संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, फिल्म के निर्माताओं में से एक- यूवी फिल्म्स ने दलील दी कि फिल्म को विभिन्न समारोहों में प्रर्दिशत किया गया है और सीबीएफसी द्वारा ‘यू’ प्रमाणपत्र दिया गया है. ‘यू’ प्रमाणन वाली फिल्में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए होती हैं.

इससे पहले नौ अक्टूबर को न्यायमूर्ति नानावटी ने वाल्मीकि समुदाय के संबंध में आपत्तिजनक शब्द के इस्तेमाल को चुनौती देने वाली याचिका पर सीबीएफसी और निर्माताओं को नोटिस जारी किया था. ये नोटिस निमेश वाघेला की ओर से दायर एक याचिका पर जारी किए गए थे, जिसमें फिल्म से एक शब्द हटाने के साथ-साथ इसका प्रमाणन वापस लिये जाने का अनुरोध किया गया था.

याचिका में कहा गया है कि फिल्म में उक्त शब्द का इस्तेमाल सिनेमैटोग्राफ अधिनियम 1952 के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के प्रावधानों का उल्लंघन है. इसमें दावा किया गया है कि यह वाल्मीकि समुदाय की भावनाओं को आहत करता है. याचिकाकर्ता ने कहा कि वह फिल्म के विषय का विरोध नहीं करते हैं, लेकिन ”आहत करने वाले” शब्द के इस्तेमाल के साथ-साथ फिल्म को ‘यू’ प्रमाणपत्र देने के सीबीएफसी के फैसले के खिलाफ हैं.

इसमें यह भी कहा गया है कि फिल्म के ट्रेलर में मां और बेटे के बीच बातचीत के दौरान इस शब्द का कई बार इस्तेमाल किया गया है.
याचिका में कहा गया है, ”फिल्म गुठली लड्डू में वाल्मीकि समाज के एक बच्चे की पीड़ा का वर्णन किया गया है, लेकिन साथ ही, एक खास शब्द का कई बार इस्तेमाल किया गया है जिससे वाल्मिकी समाज के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं.”

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