न्यायालय ने बुजुर्ग महिला वकील से ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के जरिए ठगी करने के आरोपियों की रिहाई रोकी

बेंगलुरु की महिला ने 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले में करीब 32 करोड़ रुपये गंवाए

नयी दिल्ली/बेंगलुरु/हैदराबाद. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक दुर्लभ कदम उठाते हुए अदालतों को उन लोगों को जेल से रिहा करने से रोक दिया जिन पर शीर्ष अदालत की 72 वर्षीय महिला वकील से ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के जरिए 3.29 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है. इसने कहा कि इस मामले में ”असाधारण आदेश” की जरूरत है.

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, ”हमें इन मामलों से सख्ती से निपटना होगा ताकि सही संदेश जाए. एक असाधारण घटना के लिए असाधारण हस्तक्षेप की आवश्यकता है.” पीठ ने ‘सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन’ (एससीएओआरए) द्वारा दायर हस्तक्षेप आवेदन को रिकॉर्ड में लिया, जिसमें महिला वकील के मामले को आगे बढ़ाया गया और अपराध के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आग्रह किया गया.

एससीएओआरए के अध्यक्ष विपिन नायर ने कहा कि बुजुर्ग महिला वकील की सारी जमा पूंजी चली गई और इस वर्ष मई में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद गिरफ्तार किए गए आरोपी वैधानिक जमानत पर रिहा होने वाले हैं. पीठ ने अभ्यावेदनों पर संज्ञान लेते हुए तुरंत आदेश दिया, ”इस बीच, संदिग्ध विजय खन्ना और अन्य सह-आरोपियों को किसी भी अदालत द्वारा रिहा नहीं किया जाएगा. वे किसी भी राहत के लिए इस अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं.” न्यायमूर्ति कांत ने नायर से कहा, ”हम किसी के जीवन और स्वतंत्रता के विरुद्ध नहीं हैं, लेकिन इस मामले में असाधारण आदेश की जरूरत है. हमें इन मामलों से सख्ती से निपटना होगा ताकि सही संदेश जाए. असाधारण घटना के लिए असाधारण हस्तक्षेप की आवश्यकता है.”

नायर ने कहा कि पुलिस आरोपियों से 42 लाख रुपये से अधिक की राशि बरामद करने में सफल रही, लेकिन यह मामला ऐसे अपराधों से संबंधित प्रक्रियागत शून्यता और जांच संबंधी लचरता को दर्शाता है, क्योंकि मजिस्ट्रेट द्वारा पीड़ित के बैंक खाते में धनराशि जमा करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद बैंक धनराशि स्वीकार करने से इनकार कर रहा है.

पीठ ने कहा कि जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे, जो कई एजेंसियों के लिए आंखें खोलने वाले होंगे. इसने नायर से कहा, ”बस अगली सुनवाई की तारीख का इंतजार कीजिए.” पीठ ने सॉलिसिटर जनरल मेहता से इस मुद्दे पर गौर करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई 24 नवंबर के लिए सूचीबद्ध कर दी.

बेंगलुरु की महिला ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाले में करीब 32 करोड़ रुपये गंवाए

कर्नाटक के बेंगलुरु की 57 वर्षीय एक महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने छह महीने से अधिक समय तक चले एक ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाले में कथित तौर पर लगभग 32 करोड़ रुपये गंवा दिए. यह शायद कर्नाटक में इस प्रकार की सबसे बड़ी साइबर धोखाधड़ी है और इस संबंध में एक मामला दर्ज कर लिया गया है. यह जानकारी पुलिस ने सोमवार को दी.

धोखेबाजों ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अधिकारी बनकर स्काइप के माध्यम से महिला पर लगातार निगरानी रखकर उसे “डिजिटल अरेस्ट” की स्थिति में रखा. ठगों ने महिला को गिरफ्तार करने की धमकी दी और उससे सारी वित्तीय जानकारी हासिल कर ली तथा 187 बैंकिंग लेनदेन करने के लिए दबाव डाला.

शहर के इंदिरानगर की सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी शिकायत में कहा कि अंत में ‘क्लीयरेंस लेटर’ मिलने तक धोखबाजों ने उसे छह महीने से अधिक समय तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के धोखे में रखा. महिला ने अपनी शिकायत में कहा कि इसकी शुरुआत 15 सितंबर, 2024 को एक व्यक्ति के फोन से हुई, जिसने डीएचएल अंधेरी से होने का दावा करते हुए आरोप लगाया कि उसके नाम से बुक किए गए पार्सल में क्रेडिट कार्ड, पासपोर्ट और ‘एमडीएमए’ है और उसकी पहचान का दुरुपयोग किया गया है. मेथिलीन-डाइऑक्सीमेथाम्फेटामीन (एमएमडीए) एक मादक पदार्थ होता है.

इससे पहले कि महिला कोई जवाब दे पाती, कॉल व्यक्तियों के पास स्थानांतरित कर दी गई जिन्होंने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया और उसे धमकाया और दावा किया कि “सारे सबूत आपके खिलाफ हैं”. महिला की शिकायत के अनुसार जालसाज़ों ने उसे पुलिस से संपर्क नहीं करने की चेतावनी दी और कहा कि वे उसके घर पर नजर रख रहे हैं. शिकायत के अनुसार अपने परिवार और बेटे की होने वाली शादी के डर से, वह चुप रही.

शिकायत के अनुसार महिला को दो स्काइप आईडी बनाने और वीडियो पर बने रहने का निर्देश दिया गया था. इसके अनुसार मोहित हांडा नामक एक व्यक्ति ने दो दिन तक उस पर नजर रखी, उसके बाद राहुल यादव ने एक हफ्ते तक उस पर नजर रखी. एक और जालसाज प्रदीप सिंह ने खुद को सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बताया और उस पर अपनी बेगुनाही साबित करने का दबाव डाला.

शिकायतकर्ता ने कहा कि ऐसा प्रतीत हुआ कि समूह को उसकी फ़ोन गतिविधि और लोकेशन की जानकारी थी, जिससे उसका डर और बढ. गया. शिकायतकर्ता ने कहा कि उन्होंने उसे आरबीआई की वित्तीय खुफिया इकाई से अपनी सारी संपत्ति का सत्यापन कराने को कहा और इसे आधिकारिक दिखाने के लिए जाली पत्र भी दिखाए.

उमारानी ने 24 सितंबर से 22 अक्टूबर तक अपने वित्तीय विवरण साझा किए और बड़ी रकम हस्तांतरित की. उन्होंने 24 अक्टूबर और तीन नवंबर के बीच दो करोड़ रुपये की कथित जमानत राशि जमा की, जिसके बाद “कर” के लिए और भुगतान किया गया. महिला को छह दिसंबर को उसके बेटे की सगाई से पहले ‘क्लियरेंस लेटर’ देने का वादा किया गया था, लेकिन उसे एक फज़र्ी पत्र मिला. इस दबाव के कारण महिला मानसिक और शारीरिक रूप से अस्वस्थ हो गई.

शिकायत के अनुसार पीड़िता को एक दिसंबर को ‘क्लियरेंस लेटर’ मिला लेकिन इतने दिनों तक तनाव झेलने के बाद वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गई जिससे उबरने और ठीक होने में एक महीने का समय लगा. उन्होंने कहा, “इस पूरे समय मुझे स्काइप पर बताना पड़ता था कि मैं कहां हूं और क्या कर रही हूं. प्रदीप सिंह नाम का यह व्यक्ति रोज़ाना संपर्क में रहता था. मुझे बताया गया था कि सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 25 फ़रवरी तक पैसे वापस कर दिए जाएंगे.” दिसंबर के बाद घोटालेबाजों ने ‘प्रोसेसिंग’ शुल्क की मांग की और रिफंड को फरवरी और फिर मार्च तक टालते रहे. 26 मार्च, 2025 को सभी तरह का संवाद बंद हो गया. शिकायतकर्ता ने शिकायत दर्ज कराने के लिए जून में अपने बेटे की शादी तक इंतजार किया. पीड़िता ने कहा, “187 लेनदेन के माध्यम से मुझसे लगभग 31.83 करोड़ रुपये की राशि वसूली गई, जो मैंने ही जमा की थी.” महिला ने अधिकारियों से पूरे मामले की जांच करने की मांग की है.

मेरे परिवार के एक सदस्य को दो दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया गया: अभिनेता नागार्जुन अक्किनेनी

अभिनेता नागार्जुन अक्किनेनी ने सोमवार को कहा कि छह महीने पहले उनके परिवार के एक सदस्य को धोखेबाजों ने दो दिनों के लिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया था. शहर के पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार और अन्य फिल्मी हस्तियों के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में नागार्जुन ने कहा कि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद अपराधी तुरंत गायब हो गए.

अभिनेता ने संवाददाताओं से कहा, ”मुझे याद है कि लगभग छह महीने पहले मेरे अपने घर में ठीक इसी तरह की घटना हुई थी. मेरे परिवार के एक सदस्य को दो दिनों के लिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया गया था. ये (धोखेबाज) गिरोह हमारा पीछा करते हैं और हमारी कमज.ोरियों का पता लगाने की कोशिश करते हैं.” संपर्क करने पर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इस घटना के संबंध में नागार्जुन ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई.

हालांकि, अधिकारी ने कहा कि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद धोखेबाज गायब हो गए होंगे. सज्जनार यहां ‘पायरेटेड’ फिल्में दिखाने वाली विभिन्न वबेसाइट चलाने वाले एम्मादी रवि की गिरफ्तारी पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. लोगों को धोखाधड़ी वाली वेबसाइट से सावधान रहने की चेतावनी देते हुए नागार्जुन ने कहा कि तेलंगाना पुलिस ने ”आरोपी को गिरफ्तार करके सराहनीय काम किया है”.

उन्होंने कहा कि ‘पायरेटेड’ वेबसाइट पर इस तरह की कार्रवाई से न केवल तेलुगु फिल्म उद्योग, बल्कि अन्य भाषाओं की फिल्मों को भी लाभ होगा. ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का एक ब­ढ़ता हुआ रूप है, जिसमें धोखेबाज कानून प्रवर्तन अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बनकर ऑडियो या वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ितों को धमकाते हैं और पैसे ऐंठने के इरादे से उन्हें बंधक बना लेते हैं.

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