
रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के उत्तरी क्षेत्र में गुरु घासीदास-तमोर पिंगला बाघ अभयारण्य गठित करने का फैसला किया है. अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी. इंद्रावती (बीजापुर जिले में), उदंती-सीतानदी (गरियाबंद) और अचानकमार (मुंगेली) के बाद यह राज्य का चौथा बाघ अभयारण्य होगा. अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में गुरु घासीदास-तमोर पिंगला बाघ अभयारण्य गठित करने का निर्णय लिया गया.
उन्होंने बताया कि मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर एवं बलरामपुर जिलों में स्थित गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान तथा तमोर पिंगला अभयारण्य के क्षेत्रों को सम्मिलित करते हुए 2829.387 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में गुरूघासीदास-तमोर पिंगला बाघ अभयारण्य अधिसूचित करने का निर्णय लिया गया है. यह देश का तीसरा सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य होगा. अधिकारियों ने बताया कि आंध्र प्रदेश में नागार्जुनसागर श्रीशैलम बाघ अभयारण्य 3296.31 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के साथ देश का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है.
उन्होंने बताया कि राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक की अनुशंसा और केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण की सहमति के तहत इस बाघ अभयारण्य का गठन किया जा रहा है. अधिकारियों ने बताया कि इसके गठन की आगे की कार्यवाही के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को अधिकृत किया गया है. उन्होंने बताया कि बाघ अभयारण्य के गठन से राज्य में ईको-पर्यटन का विकास होगा साथ ही कोर एवं बफर क्षेत्र में स्थित ग्रामीणों के लिए गाइड, पर्यटक वाहन व रिजॉर्ट संचालन के साथ ही विभिन्न प्रकार के रोजगार सृजित होंगे. अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ परियोजना से अतिरिक्त बजट प्राप्त होगा, ताकि क्षेत्र के गांवों में आजीविका विकास के नए कार्य किए जा सकें.
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पिछले महीने मध्य प्रदेश के वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर राज्य सरकार को इस क्षेत्र को बाघ अभयारण्य घोषित करने के लिए अपना रुख स्पष्ट करने के वास्ते चार सप्ताह का समय दिया था.
दुबे ने बताया कि 2012 में छत्तीसगढ़ में रमन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार के दौरान राज्य वन्यजीव बोर्ड ने गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और तमोर पिंगला अभयारण्य के संयुक्त क्षेत्र को बाघ अभयारण्य घोषित करने का फैसला किया था.
दो साल बाद अगस्त 2014 में राज्य सरकार ने इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए एनटीसीए को प्रस्ताव भेजा था. इसके बाद एनटीसीए ने अक्टूबर 2014 में छत्तीसगढ़ में गुरु घासीदास-तमोर पिंगला बाघ अभयारण्य के निर्माण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी और इस संबंध में राज्य सरकार से अंतिम प्रस्ताव मांगा था. दुबे ने कहा कि उन्होंने सितंबर 2019 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें एनटीसीए की ओर से 2014 में इसे मंजूरी देने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा बाघ अभयारण्य को अधिसूचित करने में नि्क्रिरयता का आरोप लगाया गया था.
इसके बाद दिसंबर 2019 में भूपेश बघेल की अगुवाई वाली कांग्रेस की तत्कालीन सरकार में राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक के दौरान गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को बाघ अभयारण्य घोषित करने का निर्णय लिया गया था. उन्होंने कहा कि एनटीसीए ने 2021 में बाघ अभयारण्य के निर्माण के लिए अंतिम मंजूरी दी थी, लेकिन इसके बावजूद राज्य प्राधिकरण द्वारा कोई आगे की कार्रवाई नहीं की गई.
दुबे ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मंत्रिमंडल ने बुधवार को बाघ अभयारण्य के निर्माण को मंजूरी दे दी. राज्य के उत्तरी भाग में स्थित गुरु घासीदास-तमोर पिंगला के जंगल बांधवगढ़ (मध्य प्रदेश) और पलामू (झारखंड) बाघ अभयारण्यों के बीच एक गलियारा है.
उन्होंने कहा कि नया बाघ अभयारण्य बाघों के प्राकृतिक आवास को संरक्षित करेगा और उनकी सुरक्षा को बढ़ावा देगा. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को कांग्रेस की पिछली सरकार के दौरान बाघ अभयारण्य घोषित किया गया था, लेकिन इसे अधिसूचित नहीं किया जा सका. इसकी अधिसूचना में देरी हुई क्योंकि इस क्षेत्र में कोयला और मीथेन गैस के भंडार हैं.



