
नयी दिल्ली. दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी के ओलंपिक और पैरालंपिक पदक विजेताओं के लिए नकद पुरस्कार राशि में बढ़ोतरी की है. यह जानकारी मंगलवार को मंत्री आशीष सूद ने दी. सूद ने मेधावी छात्रों को मुफ्त लैपटॉप प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री डिजिटल योजना को मंजूरी देने की भी घोषणा की. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसले लिये गये.
सूद ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”आज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में कैबिनेट की बैठक हुई. इसमें दिल्ली के विकास के साथ छात्रों और युवाओं के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए.” उन्होंने कहा, ”मुख्यमंत्री खेल प्रोत्साहन योजना के तहत ऐतिहासिक फैसले लिए गए. ओलंपिक और पैरालंपिक पदक विजेताओं को पहले तीन करोड़ रुपये, दो करोड़ रुपये और एक करोड़ रुपये दिए जाते थे लेकिन खेल पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहित करने के लिए अब ओलंपिक तथा पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेताओं को सात करोड़ रुपये, रजत पदक विजेताओं को पांच करोड़ रुपये और कांस्य पदक विजेताओं को तीन करोड़ रुपये दिए जाएंगे.” सूद ने घोषणा की कि दिल्ली सरकार में स्वर्ण और रजत पदक विजेताओं को ग्रुप ए की नौकरियां दी जाएंगी, जबकि कांस्य पदक विजेताओं को ग्रुप बी की नौकरियां दी जाएंगी.
उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले युवा खिलाड़ियों को कोचिंग और प्रशिक्षण के लिए पांच-पांच लाख रुपये दिए जाएंगे. यह मानदेय कक्षा छह से 12 तक के छात्रों को दिया जाएगा.
सूद ने कहा कि पहले राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक विजेताओं को तीन लाख रुपये, रजत पदक विजेताओं को दो लाख रुपये और कांस्य पदक विजेताओं को एक लाख रुपये दिए जाते थे लेकिन अब सरकार ने राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में कोई भी पदक जीतने पर 11 लाख रुपये प्रदान करने का निर्णय लिया है.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों में भाग लेने वाले ‘एलीट खिलाड़ियों’ को सरकार प्रति वर्ष 20 लाख रुपये प्रदान करेगी. सूद ने यह भी घोषणा की कि मुख्यमंत्री डिजिटल योजना के तहत युवाओं के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए छात्रों को मुफ्त लैपटॉप प्रदान किए जाएंगे. उन्होंने कहा, ”अच्छे अंकों के साथ दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले 1,200 मेधावी छात्रों को लैपटॉप दिए जाएंगे. इससे वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों को लाभ होगा.”



