आबादी के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होगा : खरगे

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 16 Mar 2025 09:44 PM
आबादी के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होगा : खरगे
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गदग. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को कहा कि यदि निर्वाचन क्षेत्रों की परिसीमन प्रक्रिया जनसंख्या पर आधारित होगी, तो यह दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होगा, क्योंकि इससे लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा. खरगे ने लोगों से इस ‘अन्याय’ के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह किया. कांग्रेस अध्यक्ष ने पूर्व मंत्री स्वर्गीय केएच पाटिल के जन्मशती समारोह को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की और शिक्षा पर कथित रूप से कम जोर दिए जाने तथा शैक्षणिक संस्थानों में बड़ी संख्या में रिक्तियों पर चिंता जताई.

खरगे ने कहा, ”केंद्र सरकार सहकारी संघवाद की बात करती है. अगर सहकारी संघवाद है, तो लोगों को वह धनराशि क्यों नहीं मिल रही, जिसके वे हकदार हैं? क्या कर्नाटक में सहकारी समितियों को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से वह धनराशि मिल रही है, जो उन्हें मिलनी चाहिए? इसमें 58 प्रतिशत की कमी आई है.” कांग्रेस अध्यक्ष ने कर्नाटक के लोगों से एकजुट होने और उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, ”जब मुद्दा कर्नाटक और उसके विकास से संबंधित हो, तो सभी को एक सुर में बोलना चाहिए.” खरगे ने कहा, ”जनसंख्या के आधार पर परिसीमन की योजना बनाई जा रही है. इसके जरिये दक्षिण भारत में संसदीय और विधानसभा सीटों की संख्या कम करने का प्रयास किया जा रहा है.” उन्होंने कहा कि परिसीमन से उत्तरी राज्यों के प्रतिनिधित्व में 30 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ”ऐसी खबरें सामने आ रही हैं और हमें इंतजार करना चाहिए तथा देखना चाहिए. यदि ऐसा होता है, तो यह अन्याय होगा. हमें इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होना चाहिए.” खरगे ने केंद्र सरकार पर विभिन्न संस्थानों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा क्षेत्र को वह महत्व नहीं मिल रहा, जिसका वह हकदार है.

उन्होंने शिक्षा के लिए केंद्रीय वित्त पोषण में कटौती का आरोप लगाते हुए कहा, ”नवोदय विद्यालय हों, केंद्रीय विद्यालय हों या विश्वविद्यालय हों, जितने रिक्त पद भरे जाने चाहिए, जितने शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए, उसके मुकाबले महज 50 प्रतिशत पदों पर ही र्भितयां हो रही हैं.” खरगे ने सवाल किया, ”यदि केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान), आईआईएम (भारतीय प्रबंधन संस्थान) और केंद्रीय विद्यालयों में 50 प्रतिशत पद खाली रहेंगे, तो हमारे बच्चे कैसे पढ़ेंगे और आगे बढ़ेंगे?”

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