
नयी दिल्ली. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिकों से दलहन और तिलहन की उच्च उपज वाली किस्में विकसित करने का आह्वान किया, ताकि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके और आयात पर निर्भरता घटायी जा सके.
96वें आईसीएआर स्थापना एवं प्रौद्योगिकी दिवस को संबोधित करते हुए चौहान ने अन्य देशों की तुलना में भारत में सोयाबीन की कम उत्पादकता का जिक्र किया. उन्होंने सोयाबीन फसल और सूरजमुखी के बीजों के तहत खेती के रकबे में क्रमिक गिरावट का भी उल्लेख किया.
चौहान ने कहा, ”हम पर्याप्त मात्रा में चावल और गेहूं उपजा रहे हैं, लेकिन दलहन और खाद्य तेलों का आयात कर रहे हैं. हम इस मुद्दे का समाधान कैसे करेंगे? …कम अवधि वाली और अधिक उपज देने वाली नई किस्में विकसित करने की जरूरत है.” उन्होंने कहा कि किसान कम उत्पादकता और कम लाभ देने वाली फसलें उगाने को इच्छुक नहीं हैं.” मंत्री ने आईसीएआर से अभियान के तहत फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों को दलहन और तिलहन की खेती के बारे में शिक्षित करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि कृषि में विविधता लाने से किसानों की आय चौगुनी हो सकती है, इसे हासिल करना ”असंभव कार्य नहीं है.” प्रयोगशाला से भूमि तक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की खाई को स्वीकार करते हुए, चौहान ने आईसीएआर अनुसंधान संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के बीच सहयोग का सुझाव दिया.
उन्होंने यह भी कहा कि आईसीएआर के बजट का केवल 20 प्रतिशत ही अनुसंधान पर खर्च किया जाता है, जबकि बाकी कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होता है. उन्होंने अनुसंधान खर्च बढ़ाने की आवश्यकता बताई. कार्यक्रम में, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने आईसीएआर से संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान को तेज करने का आग्रह किया.
उन्होंने पशुओं में खुरपका और मुंहपका रोग से निपटने के लिए समाधान और डेयरी किसानों के लिए किफायती आईवीएफ टीकों के विकास का आह्वान किया. इस कार्यक्रम में वर्ष 2023 में विकसित की जाने वाली 40 नवीन तकनीकों का प्रदर्शन किया गया. व्यावसायीकरण के लिए निजी क्षेत्र के साथ कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए. इस अवसर पर कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और एस पी सिंह बघेल तथा आईसीएआर के महानिदेशक हिमांशु पाठक उपस्थित थे.



