
मध्य प्रदेश: धार में विवादित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने परिसर को हिंदू देवी वाग्देवी का मंदिर माना है, जिससे दोनों समुदायों में तनाव का माहौल बना हुआ है। हिंदू पक्ष के वकील के अनुसार, अदालत ने इस विवाद में मंदिर होने का फैसला दिया है, जबकि जैन समाज और मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी गई है। इस फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और शहर में फ्लैग मार्च निकाला गया है।
धार में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, भोजशाला परिसर को मंदिर का दर्जा
कंटेंट:धार शहर में भोजशाला मामले पर हाईकोर्ट के फैसले को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर दिया गया है। अदालत ने परिसर को मां वाग्देवी का मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष का समर्थन किया है। इसके मद्देनजर, धारा 144 लागू कर दी गई है और पुलिस ने आसपास के क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया है। शहर में ड्रोन कैमरे से निगरानी भी की जा रही है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
भोजशाला विवाद में हिंदू पक्ष का दावा: “बनवाया गया मंदिर, खिलजी के आदेश पर तोड़ा गया”
कंटेंट:हिंदू पक्ष ने अदालत में तर्क दिया है कि परमार वंश के राजा भोज ने 1034 में भोजशाला परिसर में देवी सरस्वती का मंदिर बनवाया था। हिंदू वकीलों का यह भी कहना है कि 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के आदेश पर मंदिर को तोड़ दिया गया और उसके अवशेषों का उपयोग कर मस्जिद का निर्माण किया गया। इस दावे के आधार पर, वह कोर्ट से इस परिसर को फिर से मंदिर बनाने की मांग कर रहे हैं।
धार में भारी सुरक्षा के बीच निकाला गया फ्लैग मार्च, कोर्ट का फैसला अभी बाकी
कंटेंट:भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट का फैसला आने से पहले ही धार में सुरक्षा बलों ने तैनाती बढ़ा दी है। फ्लैग मार्च के साथ ही, ड्रोन कैमरों से शहर पर निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। कोर्ट का फैसला आने में कुछ ही घंटे बचे हैं, जिससे सभी पक्षों की नजरें कोर्ट पर टिकी हैं।
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने कहा: “सभी को मिलकर अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए”
कंटेंट:मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करेंगे और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि धार में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है और सभी को मिलकर कानून का सम्मान करना चाहिए।



