
नयी दिल्ली. वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के प्रमुख जगदंबिका पाल ने बुधवार को विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया है. विपक्षी सदस्यों का आरोप है कि पाल ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा समिति की बैठक के दौरान कांच की बोतल तोड़कर फेंके जाने की घटना के बारे में सार्वजनिक बयान देकर नियमों का उल्लंघन किया है.
पाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”मैंने समिति की किसी कार्यवाही या विचार-विमर्श के बारे में कोई खुलासा नहीं किया है. मैंने केवल समिति की बैठक के दौरान एक सदस्य द्वारा की गई हिंसक घटना और उसके बाद उसके निलंबन के बारे में बयान दिया है.” द्रमुक सदस्य ए. राजा और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया था कि पाल ने संसदीय समिति की उन बैठकों के नियमों का उल्लंघन किया है, जो बंद कमरे में आयोजित की जाती हैं.
पाल ने कहा, ”मैंने हमेशा संसदीय प्रक्रिया के नियमों का पालन किया है और सदन की गरिमा को बरकरार रखा है.” उनका कहना था कि वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने मंगलवार को समिति की बैठक के दौरान एक सदस्य द्वारा की गई हिंसा की घटना और उसके बाद की गई कार्रवाई पर एक बयान दिया.
बाद में ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में पाल ने कहा, ”यह केवल सांसद की सुरक्षा का सवाल नहीं है, यह सवाल है संसदीय प्रणाली, संसदीय परंपराओं की भविष्य की सुरक्षा का. कल की घटना संसदीय प्रणाली पर, उसके भविष्य पर एक कुठाराघात है और इसने उनपर एक गंभीर प्रश्न लगाया है.” पाल ने घटना के पीछे साजिश की आशंका के बारे में पूछे जाने पर कहा, ”साजिश हो या न हो, लेकिन मुझे लगता है कि जिस तरह की हिंसात्मक घटना हुई वह अराजकता की पराकाष्ठा है. यह कैसे मन में आ गया कि हम एक सांसद होकर बोतल तोड़कर अध्यक्ष पर फेंकें.”
उन्होंने कहा, ”प्रजातंत्र में सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष में रोज विचारों में सहमति-असहमति हो सकती है. विपक्ष के आज तक के संसदीय इतिहास में कल पहली बार कांच की बोतल तोड़कर सीधे मेरी ओर फेंकी गयी. इससे उनको भी चोट लगी. सारे विपक्ष के भी सांसद मौजूद थे. वे हतप्रभ थे. अगर वह कहीं मेरे चेहरे पर या मेरी आंख पर आकर लगती तो शायद आंख की रोशनी चली जाती. यह तो ईश्वर की कृपा है कि मैं बाल-बाल बच गया. बोतल मंच के नीचे सामने गिरी.”
पाल ने कहा, ”आखिर किस बात पर उन्होंने आपा खो दिया. सबसे पहले मैंने बोलने का अवसर दिया. उन्होंने पूरी बात कह ली. उसके बाद पांच सांसदों को भी हमने बुलाया था. अब हम जब सांसदों को सुन रहे हैं, वक्फ बोर्ड, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत-उलेमा-ए-हिंद को सुन रहे हैं, दरगाह कमेटी को सुन रहे हैं. हम 16 बैठकें कर चुके हैं. इतने विस्तार से किसी जेपीसी ने काम किया ही नहीं था. अगर जेपीसी सबसे बातचीत करके कोई रिपोर्ट तैयार कर रही है तो बलपूर्वक क्यों हिंसा की जा रही है.”
उन्होंने कहा कि जेपीसी में उत्तर प्रदेश से सांसद इमरान मसूद, संजय सिंह, रामपुर से सांसद मोहिबुल्ला नदवी शामिल हैं. उन्होंने कहा, ”आप इनको फोन करके पूछ लीजिये कि अध्यक्ष आपको बोलने देते हैं या नहीं. अगर वे कह देते हैं कि अध्यक्ष नहीं बोलने देते हैं तो मैं इस्तीफा दे दूंगा.” वक्फ संबंधी संसदीय समिति की बैठक में मंगलवार को उस समय बहुत ही नाटकीय घटनाक्रम हुआ जब तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने पानी वाली कांच की बोतल तोड़कर समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल की तरफ फेंक दी, जिसके बाद उन्हें एक दिन के लिए समिति की बैठक से निलंबित कर दिया गया. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय से तीखी बहस के दौरान बनर्जी गुस्से में आ गए और बोतल तोड़कर फेंक दी. इस दौरान उनकी अंगुलियों में चोट आई. पाल ने बनर्जी के आचारण की निंदा करते हुए कहा था कि ईश्वर उन्हें सद्बुद्धि दे.



