दुर्ग: नौकरी लगवाने के नाम पर मानव तस्करी करने का आरोप, एक महिला समेत तीन गिरफ्तार

दुर्ग. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की पुलिस ने नौकरी लगवाने के नाम मानव तस्करी करने तथा दो लाख रुपये की ठगी के आरोप में मुंबई से एक महिला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भिलाई के निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर पुलिस ने मुंबई निवासी साजन शेख (36), रफीक खान (42) और एक महिला को गिरफ्तार किया है.

उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने दुर्ग के साइबर थाने में मामला दर्ज कराया था कि लाओस में भारी-भरकम वेतन पर कम्प्यूटर ऑपरेटर की नौकरी का विज्ञापन दिखाकर उससे दो लाख रुपए की धोखाधड़ी की गई है. अधिकारियों ने बताया कि शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की.

उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता से इस संबंध में पूछताछ की गई तो उसने बताया कि लाओस में कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद पर नौकरी लगवाने के नाम पर आरोपियों ने उसे जहां भेजा था, वहां उसे ठगी करने का प्रशिक्षण दिया गया और जब उसने ये काम करने से मना कर दिया तो उसे वापस भेज दिया गया और पैसे वापस नहीं किए गए.

उन्होंने बताया कि यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने इस मामले में मानव तस्करी से संबंधित धारा जोड़ी और मामले की जांच की.
अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी मुंबई के गोरेगांव में हैं, जिसके बाद दुर्ग से पुलिस दल को मुंबई भेजकर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.

अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में जानकारी मिली कि वे विदेश में नौकरी लगवाने का विज्ञापन दिखाकर लोगों को दूसरे देश भेजते थे, इसके लिए उन्होंने 2022 में वीएस इंटरप्राइजेज मैनपावर कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी बनाई थी.
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी इस कंपनी के माध्यम से सऊदी अरब, दुबई, ओमान, कुवैत में नौकरी लगवाने और वीजा सेवाएं देने के नाम पर पैसा लेते थे.

उन्होंने बताया कि आरोपी रफीक खान ने लाओस में कम्प्यूटर ऑपरेटर का काम दिलाने के लिए शिकायतकर्ता को एक महिला और साजन शेख से मिलवाया था. उन्होंने कहा कि तीनों ने शिकायतकर्ता को विश्वास में लेकर सेवाशुल्क के नाम पर लाख रुपये लिए. अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद आरोपियों ने उसे थाईलैंड के रास्ते लाओस भेज दिया, जहां उसे कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम करने के लिए कुछ वीडियो दिखाए गए, जो साइबर धोखाधड़ी के थे.

उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता ने काम करने से मना किया तो उसे लगभग पांच दिन रोककर वापस भेज दिया गया, लेकिन दो लाख रुपए वापस नहीं दिए. उन्होंने बताया कि जानकारी मिली है कि आरोपियों ने कई लोगों को इस तरह का लालच देकर विदेश भेजा. अधिकारियों ने बताया कि लाओस और थाईलैंड में साइबर गुलामी में फंसे लोगों को बचाने के लिए इंटर पोल के माध्यम से कार्रवाही की जाएगी.

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