मोदी सरकार चुनाव के बाद बढ़ाई पेट्रोल और डीजल की कीमतों को वापस ले: सिद्धरमैया

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Fri, 15 May 2026 04:50 PM
मोदी सरकार चुनाव के बाद बढ़ाई पेट्रोल और डीजल की कीमतों को वापस ले: सिद्धरमैया
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बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाए जाने की ंिनदा करते हुए इसे वापस लेने की मांग की और कहा कि अभी कीमतें बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है।

सिद्धरमैया ने कहा, “हम तो कहते आ रहे थे कि चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ेंगी। जब हमने (कांग्रेस सरकार ने) यह कहते हुए कीमतों में मामूली बढ़ोतरी की कि हमारी कीमतें अन्य राज्यों की तुलना में कम हैं, तो भाजपा ने हमारी आलोचना की। सत्ता में आने के बाद से नरेन्द्र मोदी ने कई बार ईंधन की कीमतें बढ़ाई हैं।” उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद थी और ऐसा हो भी गया।

उन्होंने कहा, “पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से आम लोगों, विशेषकर किसानों, मजदूरों और गरीबों के जीवन पर असर पड़ेगा। हम इसकी कड़ी ंिनदा करते हैं। नरेन्द्र मोदी को इस समय कीमतें बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं थी। हम ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग करते हैं।”

शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। चार वर्षों से अधिक समय बाद ईंधन की कीमतों में यह पहली बढ़ोतरी है। कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के कारण तेल विपणन कंपनियों का घाटा बढ़ने के बीच यह वृद्धि की गई है। यह बढ़ोतरी असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के कुछ सप्ताह बाद हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार केंद्र में सत्ता में आई थी, तब रसोई गैस (एलपीजी) की कीमत 413 रुपये प्रति सिलेंडर थी। उन्होंने पूछा, “आज इसकी कीमत कितनी है? इस बढ़ोतरी के साथ-साथ अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ गई हैं।”

उन्होंने कहा, “उपलब्धता की समस्या के साथ अगर कीमतों में भी वृद्धि होती है तो इसका सामान्य जनजीवन पर असर पड़ेगा।” सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नीट (यूजी) 2026 की परीक्षा आयोजित कराने में “विफल” रही है, जिसके कारण बड़ी संख्या में छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ रही है।

तीन मई को आयोजित नीट (यूजी) 2026 परीक्षा को प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बीच मंगलवार को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा कथित “अनियमितताओं” की व्यापक जांच के निर्देश दिए जाने पर केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने प्राथमिकी दर्ज की। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को घोषणा की कि नीट (यूजी) की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।

उन्होंने यह भी बताया कि अनियमितताओं के आरोपों के बाद किए जा रहे सुधारों के तहत, अगले वर्ष से मेडिकल प्रवेश परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी।
कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कार्यान्वयन के बारे में पूछे जाने पर सिद्धरमैया ने कहा, “एसआईआर का कार्यान्वयन किया जाएगा और हम भी इसके लिए आवश्यक तैयारियां कर रहे हैं।”

निर्वाचन आयोग ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि कर्नाटक सहित 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में 36.73 करोड़ मतदाताओं के लिए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनीक्षण के तीसरे चरण को 30 मई से चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। जिन राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया निर्धारित है, उनमें विपक्षी शासित पंजाब, झारखंड, कर्नाटक और तेलंगाना शामिल हैं। कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची सात अक्टूबर को जारी की जाएगी।

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