जम्मू-कश्मीर बैंक मामले में ED ने उमर अब्दुल्ला से पूछताछ की, पार्टी ने बताया ‘दुर्भावनापूर्ण’

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 07 Apr 2022 08:49 PM
जम्मू-कश्मीर बैंक मामले में ED ने उमर अब्दुल्ला से पूछताछ की, पार्टी ने बताया ‘दुर्भावनापूर्ण’
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नयी दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से करीब 12 साल पहले जब वह पद पर थे तब जम्मू-कश्मीर बैंक द्वारा एक इमारत की खरीद से संबंधित मामले में बृहस्पतिवार को पांच घंटे तक पूछताछ की. अधिकारियों ने यहां ये जानकारी दी.

नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) ने इस कदम को केंद्र द्वारा एक ‘‘द्वेषपूर्ण बदनामी’’ अभियान और केंद्र शासित प्रदेश के चुनावों की संभावित घोषणा से पहले सरकार द्वारा विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास करार दिया. उन्होंने बताया कि नेकां नेता आज सुबह 11 बजे संघीय जांच एजेंसी के मुख्यालय पहुंचे जहां इस साल की शुरुआत में ईडी द्वारा पंजीकृत मामले के संबंध में उनका बयान दर्ज किया गया. ईडी कार्यालय से निकलते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि वह इस मामले में आरोपी नहीं हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘उन्होंने मुझे लगभग 12 साल पुराने एक मामले में चल रही जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया. मैंने उन्हें जितना हो सके जवाब दिया. अगर उन्हें मेरी जरूरत होगी तो मैं उनकी और मदद करूंगा. उन्होंने मुझ पर कुछ भी आरोप नहीं लगाया.’’ अधिकारियों के अनुसार, मामला 2010 में बांद्रा-कुर्ला में जम्मू-कश्मीर बैंक की इमारत की खरीद से संबंधित है, जब तत्कालीन राज्य के पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू इसके अध्यक्ष थे.

उनके अनुसार, मुंबई में एक इमारत की तलाश के लिए द्राबू की अध्यक्षता में एक दो सदस्यीय समिति का गठन किया गया था और उनकी सिफारिश के आधार पर इमारत, जो आज तक बैंक की सबसे बड़ी संपत्ति है, की खरीद के लिए मंजूरी दे दी गई थी.
बैंक में तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री की भूमिका इसके अध्यक्ष की नियुक्ति को मंजूरी देने तक सीमित थी. नियमों की जानकारी रखने वाले बैंक अधिकारियों ने कहा कि बैंक के दिन-प्रतिदिन के संचालन में मुख्यमंत्री की कोई भूमिका नहीं है.

राज्य सरकार 68 प्रतिशत से कुछ अधिक शेयर के साथ बैंक में प्रमुख प्रवर्तक है. बैंक में मुख्य सचिव द्वारा 64.20 प्रतिशत शेयरों के साथ और वित्त सचिव द्वारा 3.83 प्रतिशत शेयरों के साथ प्रतिनिधित्व किया जाता है. उस समय मुख्य सचिव एस एस कपूर थे.
आरोप लगाया गया था कि बैंक ने 109 करोड़ रुपये में 42,000 वर्ग फुट की संपत्ति की खरीद को मंजूरी दी थी, लेकिन अंतत: समिति और वित्तीय संस्थान के तत्कालीन बोर्ड ने 172 करोड़ रुपये की लागत से 65,000 वर्ग फुट संपत्ति की खरीद को मंजूरी दे दी.

इसबीच, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पार्टी नेता उमर अब्दुल्ला से पूछताछ करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय के कदम की ंिनदा करते हुए इसे पूर्व मुख्यमंत्री का ‘‘द्वेषपूर्ण बदनामी’’ और केंद्रीय जांच एजेंसी का निरंतर दुरुपयोग करार दिया. पार्टी के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ‘‘हाल के वर्षों में हमने देखा है कि जहां भी राज्य के चुनाव होने होते हैं, ईडी जैसी एजेंसियां आगे बढ़ती हैं और उन पार्टियों को निशाना बनाती हैं जो भाजपा को चुनौती देती हैं.’’ उन्होंने कहा कि उनके उपाध्यक्ष को समन भी उसी क्रम में है.

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस ‘मछली फंसाने के अभियान’ से भाजपा को कोई ठोस परिणाम नहीं मिलेगा और जब भी आवश्यकता होगी लोग नेशनल कॉन्फ्रेंस को जोरदार समर्थन देंगे.’’ प्रवक्ता ने कहा, ‘‘रमजान का पवित्र महीना होने और दिल्ली में उनका प्राथमिक निवास नहीं होने के बावजूद, अब्दुल्ला ने स्थगन या स्थान परिवर्तन की मांग नहीं की और नोटिस के अनुसार पेश हुए.’’ पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने ‘‘जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने की आदत बना ली है’’ और अब्दुल्ला से आज की पूछताछ ‘‘उसी दिशा में एक और कदम’’ था.

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘भाजपा का सार्थक विरोध करने वाले किसी भी राजनीतिक दल को बख्शा नहीं गया है, चाहे वह ईडी, सीबीआई, एनआईए, एनसीबी हो – सभी का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया गया है.’’

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