निर्वाचन आयोग लागू कर रहा है आरएसएस का एजेंडा : माकपा

नयी दिल्ली. बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने बुधवार को उसपर ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एजेंडे’ को लागू करने का आरोप लगाया. पार्टी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में ‘घुसपैठियों’ की मौजूदगी का जिक्र करते हुए इस एजेंडे को देश के सामने रखा था.

अठारह अगस्त को पार्टी पोलित ब्यूरो की बैठक के बाद बुधवार को जारी एक बयान में माकपा ने दावा किया कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू से ही विवादों में रहा, क्योंकि स्थापित मानदंडों के बावजूद 24 जून की इस घोषणा से पहले राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श नहीं किया गया था. माकपा ने कहा, ”एसआईआर में घर-घर जाकर गणना करने की प्रक्रिया निर्धारित की गई थी, जिसके साथ 11 दस्तावेज. में से किसी एक के साथ एक लिखित आवेदन जमा करना था – लेकिन बिहार में ऐसे अधिकतर कागजात कम ही लोगों के पास हैं.

उसने आरोप लगाया,”वास्तव में, इसका तात्पर्य मतदाता सूची से नाम हटाना था, क्योंकि यह एक नयी प्रक्रिया थी जिसमें बिना दस्तावेज वाले नागरिकों को गैर-नागरिक माना गया और उन्हें स्वत? ही सूची से हटा दिया गया. यह अनुच्छेद 326 और सार्वभौमिक मताधिकार के सिद्धांत का पूर्ण उल्लंघन था.” माकपा ने कहा कि विपक्षी दलों ने सामूहिक रूप से निर्वाचन आयोग से मुलाकात की, लेकिन उन्हें ऐसा कोई आश्वासन दिये बगैर तुरंत खारिज कर दिया गया कि बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित होने की स्थिति को ठीक किया जाएगा, फलस्वरूप, पार्टियों ने शीर्ष अदालत का रुख किया.

वामपंथी दल ने दावा किया, ”जैसा कि कई शोधकर्ताओं ने बताया है, मताधिकार से वंचित लोगों में एक बड़ी संख्या महिलाओं, अल्पसंख्यक समुदायों या गरीब परिवारों के लोगों की है. इस प्रक्रिया को लेकर बिहार में व्यापक असंतोष है.” माकपा ने कहा, ”सभी विपक्षी दल इस प्रक्रिया का विरोध करने के लिए एकजुट हो गए हैं. निर्वाचन आयोग आरएसएस के एजेंडे को लागू कर रहा है और इस एजेंडे को प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपने संबोधन में तथाकथित ‘घुसपैठियों’ के खिलाफ अभिव्यक्त किया था, ऐसे में निर्वाचन आयोग का पक्षपातपूर्ण चरित्र लोगों के बीच अभियान चलाकर और उन्हें लामबंद करके उजागर किया जाना चाहिए.” उसने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु के एक निर्वाचन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ‘वोट चोरी’ के खुलासे के बाद उसका समाधान करने में ‘विफल’ रहने के कारण निर्वाचन आयोग के खिलाफ आशंकाएं बढ़ रही हैं जबकि वह एक स्वतंत्र भूमिका निभाने के लिए अधिकृत एक संवैधानिक निकाय है.

माकपा ने कहा,”यह खुलासा निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड से प्राप्त दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित था. मुख्य चुनाव आयुक्त ने सार्वजनिक रूप से इन आरोपों का उपहास किया, झूठ का पुलिंदा फैलाया, जिससे निर्वाचन आयोग का यह पक्षपातपूर्ण रवैया और भी स्पष्ट हो गया कि वह स्पष्ट रूप से भाजपा के पक्ष में है.” वामपंथी दल ने यह भी दावा किया कि सरकार संसद में एसआईआर पर बहस की अनुमति नहीं दे रही है . मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण की आलोचना करते हुए माकपा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का उल्लेख किये जाने की कड़ी निंदा की.

माकपा ने कहा,”इसके माध्यम से मोदी आरएसएस को वैध ठहराने का प्रयास कर रहे हैं, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कोई भूमिका नहीं निभाई.” उसने कहा, ”अपने द्वारा घोषित जन-विरोधी सुधारों के अलावा, प्रधानमंत्री ने एक ‘जनसांख्यिकी मिशन’ के गठन की भी घोषणा की, जिसका इस्तेमाल घुसपैठियों की पहचान के नाम पर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने और परेशान करने के लिए किया जाएगा. इसका उद्देश्य आरएसएस के उस अभियान को वैध बनाना है जिसमें सभी मुसलमानों को घुसपैठियों के रूप में चित्रित किया जाता है और फिर उन्हें देश से बाहर निकालने की मांग की जाती है.”

अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए शुल्कों पर, माकपा ने दावा किया कि इनसे भारत के कृषि, मत्स्य पालन और एमएसएमई क्षेत्रों, विशेष रूप से कपड़ा निर्माताओं पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा, जबकि रूस से तेल खरीद बंद करने से मुद्रास्फीति बढ़ेगी. उसने कहा, ”भारत सरकार को अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकना चाहिए. इसके बजाय, उसे अपने संबंधों में विविधता लाने और बहुध्रुवीयता को मजबूत करने का प्रयास करना चाहिए.”

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