हर किसी को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बोस

कोलकाता. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस को बृहस्पतिवार को कलकत्ता विश्वविद्यालय (सीयू) के बाहर तृणमूल कांग्रेस की छात्र शाखा ने काले झंडे दिखाए. बोस विश्वविद्यालय में एक पुरस्कार समारोह में शामिल होने गए थे. काले झंडे दिखाये जाने की घटना के संबंध में पूछे जाने पर बोस ने संवाददाताओं से कहा, ”हर किसी को विरोध जताने का अधिकार है. इस बात का चयन उन्हें करना होगा कि वे किस तरीके से विरोध करना चाहते हैं.” जब उनसे कहा गया कि तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद (टीएमसीपी) के कुछ समर्थक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तो उन्होंने कहा, ”राजनीतिक दलों को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है.”

सीयू की कार्यवाहक कुलपति शांता दत्ता ने संवाददाताओं से कहा, ”जिन लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया वे विश्वविद्यालय के छात्र नहीं बल्कि बाहरी लोग हैं, जिनके परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. माननीय उच्च न्यायालय ने स्वयं ही प्रमाण-पत्र और डिप्लोमा प्रदान करने के समारोह का मार्ग प्रशस्त किया था और हमने कुलाधिपति को आमंत्रित करते हुए समारोह का आयोजन किया.” दत्ता ने कहा कि छात्रों की इच्छा है कि यह समारोह निर्बाध रूप से हो, क्योंकि यदि उन्हें आधिकारिक रूप से दस्तावेज नहीं मिले तो उन्हें करियर और ‘प्लेसमेंट’ में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है.

टीएमसीपी समर्थकों ने कहा कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पुरस्कार समारोह आयोजित करने के कथित अनियमित तरीके का विरोध कर रहे थे. टीएमसीपी समर्थकों ने बोस के खिलाफ भी नारे लगाए. राजभवन के एक अधिकारी ने बताया कि राज्यपाल को कॉलेज स्ट्रीट परिसर में विश्वविद्यालय के प्रमाण पत्र और पदक वितरण समारोह की अध्यक्षता करनी थी. किसी भी अप्रिय घटना को रोकने तथा राज्यपाल का परिसर में सुचारू रूप से प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए कॉलेज स्ट्रीट स्थित विश्वविद्यालय परिसर के चारों ओर बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद था.

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