पंजाब के किसानों ने कहा, बजट म्रें कृषि क्षेत्र की अनदेखी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 23 Jul 2024 08:38 PM
पंजाब के किसानों ने कहा, बजट म्रें कृषि क्षेत्र की अनदेखी
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चंडीगढ़/शिमला/नयी दिल्ली. पंजाब के किसानों ने मंगलवार को दावा किया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट में कृषि क्षेत्र की ‘अनदेखी’ की गई है और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने पर भी चुप्पी साधी गई है. सीतारमण ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की, जिसमें अनुसंधान और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने, तिलहन और दलहन उत्पादन को बढ़ाने और कृषि परिदृश्य में प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने के लिए एक व्यापक योजना की रूपरेखा तैयार की गई है.

अपने बजट भाषण में सीतारमण ने उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु-सहिष्णु फसल किस्मों को विकसित करने के लिए कृषि अनुसंधान ‘सेटअप’ की गहन समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया. हालांकि, किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के नेता सरवन सिंह पंढेर ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि बजट में कृषि क्षेत्र की ‘अनदेखी’ की गई है. पंढेर ने कहा, ”बजट में न तो एमएसपी को कानूनी गारंटी देने की बात है और न ही कृषि ऋण माफी की.” उन्होंने कहा कि इसके अलावा बजट में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए कोई योजना नहीं है.

हिमाचल प्रदेश के किसानों को खुश नहीं कर पाया आम बजट

सेब के आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क और कृषि आदानों (इनपुट) को जीएसटी छूट की प्रमुख मांगों को केंद्रीय बजट में पूरा नहीं किए जाने से हिमाचल प्रदेश के किसान निराश हैं. फल सब्जी फूल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के किसानों की उम्मीदें धराशायी हो गई हैं क्योंकि सस्ते सेब के आयात को रोकने के लिए सेब पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क की उनकी मुख्य मांग को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट में हल नहीं किया गया है.

उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, ”हम कृषि इनपुट और उपकरणों पर जीएसटी में छूट की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस संबंध में कुछ नहीं किया गया है.” सेब की खेती मुख्य रूप से शिमला, मंडी, कुल्लू और किन्नौर जिलों और चंबा, सिरमौर, लाहौल और स्पीति, कांगड़ा और सोलन जिलों के कुछ इलाकों में 21 विधानसभा क्षेत्रों में फैले 1,15,680 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है.

कृषि क्षेत्र ने ‘भविष्यदर्शी बजट’ की सराहना की, टिकैत ने इसे ‘खाली हाथ’ बताया

केंद्रीय बजट 2024-25 को लेकर कृषि क्षेत्र से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है. उद्योग विशेषज्ञों ने शोध और आत्मनिर्भरता पर इसके ‘ध्यान बिन्दु’ (फोकस) की प्रशंसा की है, जबकि कुछ किसान नेताओं ने बजट पर निराशा जताई है. कृषि उद्योग के विशेषज्ञों ने बजट को ”भविष्यदर्शी” बताते हुए इसकी सराहना की है, जिसमें कृषि-अनुसंधान और दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है.

हालांकि, भारत किसान यूनियन के किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि बजट ने किसानों को ”खाली हाथ” छोड़ दिया क्योंकि यह प्रमुख मांगों को पूरा करने में विफल रहा. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अध्यक्ष अजय झुनझुनवाला ने खाद्य तेलों के लिए राष्ट्रीय मिशन का स्वागत करते हुए कहा, ”हमें विश्वास है कि आने वाले वर्षों में आयात निर्भरता को कम करने में परिवर्तनकारी परिणाम सुनिश्चित करने के लिए इस महत्वपूर्ण मिशन को पर्याप्त रूप से वित्तपोषित किया जाएगा.” टिकैत ने ”जलवायु परिवर्तन के नाम पर कृषि अनुसंधान में निजी क्षेत्र को धन मुहैया कराने, विदेशी लॉबी समूहों और बड़ी कंपनियों को अपना एजेंडा आगे बढ़ाने देने” पर चिंता व्यक्त की.

गुड फूड इंस्टिट्यूट इंडिया की कार्यवाहक प्रबंध निदेशक स्नेहा सिंह ने कहा, ”हम आयात पर निर्भरता कम करने और प्लांट प्रोटीन जैसे मूल्यर्विधत उत्पादों के लिए अधिक रास्ते बनाने के लिए दालों और तिलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर विशेष ध्यान देने की सराहना करते हैं.” धानुका समूह के अध्यक्ष आर जी अग्रवाल ने कहा, ”बजट ने अनुसंधान और विकास में कम निवेश और कम फसल पैदावार की दोहरी चिंताओं को दूर करने की कोशिश की है.” वेदर रिस्क मैनेजमेंट र्सिवसेज (डब्ल्यूआरएमएस) के सह-संस्थापक और सीटीओ, आशीष अग्रवाल ने कहा, ”इस प्रगति का पूरा लाभ उठाने के लिए, आईओटी, एआई और डेटा एनालिटिक्स में निवेश बढ़ाना महत्वपूर्ण है.” प्राइमस पार्टनर्स के प्रबंध निदेशक देवरूप धर ने किसान और भूमि रजिस्टर पहल पर टिप्पणी की, ”इसे एक मिशन मोड में शुरू किया जाना चाहिए और फिर पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए.”

डेलॉयट एशिया प्रशांत के भागीदार और उपभोक्ता उद्योग लीडर राजीव सिंह ने कहा, ”खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को दालों में आत्मनिर्भरता के मिशन, झींगा मछली उत्पादन को प्रोत्साहित करने और सब्जी उत्पादन क्लस्टर पर ध्यान केंद्रित करने से लाभ होगा.” बेयर क्रॉपसाइंस के उपाध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और सीईओ, साइमन वीबुश ने कहा, ”जलवायु प्रतिरोधी फसलों पर ध्यान केंद्रित करने और नई तकनीक तक पहुंच से खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ तिलहन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता आएगी.” एफएमसी कॉरपोरेशन के निदेशक (उद्योग और सार्वजनिक मामले) राजू कपूर ने कहा, ”सरकार ने एक ‘आगे की ओर देखने वाला’ और ‘विकासोन्मुखी’ बजट पेश किया है जो भारतीय कृषि के परिवर्तन को सही मायने में प्राथमिकता देता है.”

श्री रेणुका शुगर्स के कार्यकारी अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने कहा, ”कृषि और आर्थिक विकास पर केंद्रित बजट सराहनीय है. यह भारतीय कृषि को नया आकार देने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.” पीडब्ल्यूसी इंडिया के भागीदार (कृषि) शशि कांत सिंह ने कहा, ”केंद्रीय बजट ने कृषि क्षेत्र के सतत विकास को सुनिश्चित करने के लिए एक स्पष्ट रास्ता तय किया है. 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के आवंटन के साथ-साथ उत्पादकता और टिकाऊपन पर स्पष्ट ध्यान देने से इस क्षेत्र को बहुत ज़रूरी बढ़ावा मिला है.” क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीसीएफआई) के उपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा, ”उत्पादकता और टिकाऊ खेती पर ध्यान केंद्रित करके यह बजट किसानों के जीवन को बदलने और समग्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का वादा करता है.”

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