रेलवे में पिछले एक दशक में पांच लाख लोगों को रोजगार दिया गया, आरक्षण का ध्यान रखा गया: वैष्णव

नयी दिल्ली. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे में रोजगार और रेल भर्ती परीक्षाओं को लेकर विपक्ष की चिंताओं को खारिज करते हुए मंगलवार को लोकसभा में कहा कि पिछले एक दशक में रेलवे में पांच लाख रोजगार दिए गए हैं और इसमें आरक्षण के सभी नियमों का पालन किया गया है.

रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान मांगों पर निचले सदन में हुई चर्चा पर जवाब देते हुए वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार में रेलवे में पांच लाख लोगों को रोजगार दिया गया है और आज भी एक लाख लोगों के लिए रेलवे में भर्ती की प्रक्रिया जारी है.
उन्होंने दावा किया कि देश में रेल भर्ती की परीक्षाएं बिना किसी पेपर लीक एवं अन्य व्यवधान के संपन्न कराई जा रही हैं.

रेलवे भर्ती की परीक्षाओं का केंद्र अभ्यर्थी के गृह क्षेत्र से बाहर होने संबंधी मुद्दे पर कुछ सदस्यों की चिंताओं का जवाब देते हुए वैष्णव ने कहा कि गृह क्षेत्र से बाहर परीक्षा केंद्र रखने की नीति देशभर में लागू है ताकि परीक्षा की शुचिता पर प्रश्न नहीं उठे. उन्होंने कहा कि रेलवे में सभी पांच लाख नौकरियों में आरक्षण के सभी नियमों और कानूनों का पालन किया गया है. रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे में 60 साल में पहली बार वार्षिक कलैंडर की व्यवस्था की गई है.

उन्होंने राज्यों के साथ भेदभाव संबंधी केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के कुछ सदस्यों के आरोपों के जवाब में कहा कि किसी भी प्रदेश के साथ केंद्र सरकार कोई भेदभाव नहीं कर रही और सभी राज्यों का रेल बजट पहले की तुलना में काफी बढ.ाया गया है, चाहे वहां किसी भी दल की सरकार हो.

उन्होंने सभी सदस्यों से अनुरोध किया कि वे अपने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से निवेदन करके भूमि अधिग्रहण में रेलवे की मदद करें.
वैष्णव ने कहा कि केरल में मात्र 14-15 प्रतिशत अधिग्रहण हुआ है, वहीं तमलिनाडु में केवल 23 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण हो सका है.
उन्होंने कहा कि कोलकाता मेट्रो में स्थापना के बाद से 42 साल में केवल 28 किलोमीटर काम हुआ था, लेकिन मोदी सरकार के दस वर्ष में 38 किलोमीटर मेट्रो लाइन का काम हुआ है.

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