न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश कोहली ने मध्यस्थता में न्यायिक संयम के महत्व पर जोर दिया

Author: navabharat digital
UPDATED: Fri, 06 Dec 2024 01:59 PM
न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश कोहली ने मध्यस्थता में न्यायिक संयम के महत्व पर जोर दिया

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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने मध्यस्थता में न्यायिक संयम के महत्व पर बल दिया है तथा ऐसे सुधारों की वकालत की है जो मध्यस्थता कानूनों में बार-बार संशोधन पर अत्यधिक निर्भर न हों।

न्यायमूर्ति कोहली ने तीन दिसंबर को भारतीय विवाद समाधान केंद्र (आईडीआरसी) द्वारा बार काउंसिल आॅफ इंडिया के भारतीय विधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईयूएलईआर) और वियना अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (वीआईएसी) के सहयोग से आयोजित तीसरे ‘भारत में मध्यस्थता सम्मेलन’ को संबोधित किया।

इस कार्यक्रम में भारत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख मध्यस्थता संस्थान के रूप में आईडीआरसी की चौथी वर्षगांठ भी मनाई गई। न्यायमूर्ति कोहली ने कहा, ‘‘लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी को कम करने और न्यायिक दक्षता बढ़ाने के लिए सुधार विचारशील और रणनीतिक होने चाहिए।’’

मध्यस्थता एक कानूनी प्रक्रिया है जिसमें एक तटस्थ तीसरा पक्ष दो पक्षों के बीच विवाद को सुलझाता है। यह एक निजी, बाध्यकारी विवाद समाधान प्रक्रिया है जिसमें पक्ष अपने दावों को एक तटस्थ तीसरे पक्ष, जिसे मध्यस्थ के रूप में जाना जाता है, के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए सहमत होते हैं।

भारत की संस्थागत मध्यस्थता प्रणाली को मजबूत करने के विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि और कई वरिष्ठ अधिवक्ता, नीति निर्माता और उद्योग जगत के नेता भी उपस्थित थे।

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