आजमगढ़ में छात्रा की मौत का मामला: शिक्षकों की गिरफ्तारी के विरोध में सभी निजी स्कूल बंद

लखनऊ/आजमगढ़: आजमगढ़ के एक स्कूल में कथित रूप से मोबाइल फोन जब्त होने से क्षुब्ध कक्षा 11 की एक छात्रा द्वारा स्कूल की छत से कूदकर खुदकुशी किये जाने के मामले में प्रधानाचार्या और एक शिक्षक की गिरफ्तारी के विरोध में मंगलवार को उत्तर प्रदेश के अधिकांश निजी विद्यालय बंद रहे।

‘एसोसिएशन आॅफ प्राइवेट स्कूल्स उत्तर प्रदेश’ के अध्यक्ष अतुल कुमार ने मंगलवार को बताया कि संगठन के आह्वान पर राज्य के सभी निजी स्कूल बंद रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि आजमगढ़ की घटना की निष्पक्ष जांच कराये बगैर स्कूल की प्रधानाचार्या और शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया गया।

उन्होंने बताया कि संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार शाम गृह विभाग के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद से मुलाकात करके आजमगढ़ प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिये। कुमार ने बताया कि संगठन के सभी सदस्यों के साथ विचार-विमर्श करके आगे की रणनीति तय की जाएगी।

गौरतलब है कि आजमगढ़ शहर स्थित ‘चिल्ड्रन गर्ल्स कॉलेज’ में कक्षा 11 की छात्रा श्रेया तिवारी की पिछली 31 जुलाई को संदिग्ध हालात में विद्यालय की छत से गिरने से मौत हो गयी थी। इस घटना को लेकर छात्रा के परिजन के साथ-साथ कई सामाजिक तथा महिला संगठनों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया था। पुलिस ने इस मामले में स्कूल की प्रधानाचार्या सोनम मिश्र और कक्षा अध्यापक अभिषेक राय के खिलाफ हत्या और खुदकुशी के लिये उकसाने के आरोपों में मामला दर्ज कर पांच अगस्त को उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य के मुताबिक प्रधानाचार्या के पास से छात्रा का मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। मामले की सीसीटीवी फुटेज की जांच में पता चला है कि छात्रा अपनी कक्षा से दोपहर 12 बजे निकलकर प्रधानाचार्या के कार्यालय में गयी और बाद में दफ्तर के बाहर काफी देर तक खड़ी रही। करीब सवा एक बजे वह काफी तेजी से सीढि़यों के रास्ते विद्यालय की तीसरी मंजिल पर जाती नजर आयी।

एक अन्य फुटेज में छात्रा के गिरने का वीडियो भी शामिल है। ऐसा लगता है कि जिस जगह लड़की गिरी वहां खून के धब्बों को धो दिया गया। आर्य ने बताया कि अब तक की विवेचना में यह तथ्य सामने आया है कि छात्रा के पास मोबाइल फोन मिला था। उसकी समुचित काउंसंिलग करने के बजाय अमानवीय रवैया अपनाते हुए छात्रा को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। घटना वाले दिन भी उसे प्रधानाचार्या के कक्ष में मानसिक प्रताड़ना दी गई और सजा के तौर पर कक्ष के बाहर काफी देर तक खड़ा रखा गया। इसी वजह से छात्रा ने यह कदम उठाया। मामले की जांच जारी है।

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