मंत्रियों की संतानों और रिश्तेदारों को टिकट देना वंशवादी राजनीति नहीं: सिद्धरमैया

मैसुरु. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने रविवार को कहा कि मंत्रियों की संतानों और रिश्तेदारों को टिकट देना वंशवादी राजनीति नहीं है बल्कि मतदाताओं की राय को स्वीकार करना है. आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की अपनी दूसरी सूची में, कांग्रेस ने 21 मार्च को राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दामाद और पांच मंत्रियों की संतानों को कर्नाटक के चुनाव मैदान में उतारने की घोषणा की.

सिद्धरमैया ने पत्रकारों से कहा, ”हां, हमने (टिकट) दी है. हमने उन लोगों को टिकट दिया जिनकी सिफारिश क्षेत्र के लोगों ने की थी. यह वंशवादी राजनीति नहीं बल्कि लोगों की राय को स्वीकार करना है.” वह कर्नाटक के मंत्रियों के परिवार के 10 सदस्यों और रिश्तेदारों को कांग्रेस की ओर से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट मिलने के बारे में एक सवाल का जवाब दे रहे थे. खरगे के दामाद राधाकृष्ण डोड्डामणि गुलबर्गा (कालाबुर्गी) लोकसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में होंगे.

लोक निर्माण मंत्री (पीडब्ल्यूडी) मंत्री सतीश जारकीहोली की बेटी प्रियंका जारकीहोली चिक्कोडी से लड़ेंगी. परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी की बेटी सौम्या रेड्डी बेंगलुरू दक्षिण से भाजपा के मौजूदा सांसद तेजस्वी सूर्या के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी एक या दो दिन में कर्नाटक की शेष चार सीट के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी करेगी. उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस राज्य में कम से कम 20 लोकसभा सीट जीतेगी.

यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा और जद(एस) गठबंधन कांग्रेस के लिए समस्याएं पैदा करेगा, सिद्धरमैया ने कहा, ”यह (गठबंधन) हमारे पक्ष में होगा.” मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि उनकी सरकार ने जो पांच गारंटियां शुरू की हैं, वे निश्चित रूप से पार्टी को चुनाव जीतने में मदद करेंगी.

सिद्धरमैया ने कहा, ”हमने इस साल 36,000 करोड़ रुपये खर्च किये हैं. अगले वित्त वर्ष के लिए हम 52,900 करोड़ रुपये निर्धारित करेंगे. हम भाजपा की तरह झूठ नहीं बोलते. हमने जो वादे किये थे, उन्हें पूरा किया है.” मुख्यमंत्री ने पूछा, ”2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 600 वादे किए, लेकिन उनमें से 10 प्रतिशत भी पूरे नहीं किये. क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपको 15 लाख रुपये दिये? दो करोड़ नौकरियां दीं, किसानों की आय दोगुनी की और ‘अच्छे दिन’ लाए? लोग उन पर भरोसा क्यों करेंगे?”

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