सरकार को सेबी की अदाणी जांच में हितों के टकराव को दूर करना चाहिए: कांग्रेस

सेबी की शुचिता से गंभीर समझौता हुआ : राहुल गांधी ने हिंडनबर्ग विवाद पर कहा

नयी दिल्ली. अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की प्रमुख माधवी बुच पर लगाए गए आरोपों की पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने रविवार को कहा कि सरकार को अदाणी ग्रुप की विनायमक द्वारा की गयी जांच में हितों के सभी टकरावों को तत्काल दूर करना चाहिए. उसने इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की अपनी मांग भी दोहरायी.

विपक्षी पार्टी ने यह भी कहा कि ‘देश के शीर्ष अधिकारियों की कथित मिलीभगत’ का समाधान केवल इस ‘घोटाले’ के पूरे दायरे की जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति गठित करके ही किया जा सकता है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सेबी ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष मोदी जी के करीबी मित्र अदाणी को हिंडनबर्ग के जनवरी 2023 के खुलासों में ‘क्लीनचिट’ दी थी. उन्होंने कहा कि हालांकि, सेबी प्रमुख से जुड़े ‘ परस्पर फायदा पहुंचाने’ के नए आरोप सामने आए हैं.

उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा,” मध्यम वर्ग से संबंधित छोटे और मध्यम निवेशकों, जो अपनी मेहनत की कमाई शेयर बाजार में निवेश करते हैं, को संरक्षित करने की आवश्यकता है, क्योंकि वे सेबी पर विश्वास करते हैं. ” उन्होंने कहा, ”जब तक इस महा-घोटाले में जेपीसी जांच नहीं होगी, तब तक मोदी जी अपने मित्र की मदद करते रहेंगे और देश की संवैधानिक संस्थाएं तार-तार होती रहेंगी.” हिंडनबर्ग रिसर्च ने शनिवार को आरोप लगाया कि सेबी की अध्यक्ष बुच और उनके पति के पास कथित अदाणी धन हेराफेरी घोटाले में इस्तेमाल किए गए अस्पष्ट ‘विदेशी फंड’ में हिस्सेदारी थी.

हिंडनबर्ग ने अदाणी पर अपनी पिछली रिपोर्ट के 18 महीने बाद एक ‘ब्लॉगपोस्ट’ में कहा, “सेबी ने अदाणी के मॉरीशस और विदेश स्थित इकाइयों के कथित अघोषित जाल में आश्चर्यजनक रूप से रुचि नहीं दिखाई है.” सेबी प्रमुख बुच और उनके पति ने एक संयुक्त बयान जारी कर हिंडनबर्ग के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है. उन्होंने कहा कि उनकी वित्तीय स्थिति (विनिमय) एक खुली किताब की तरह है.

अदाणी समूह ने रविवार को कहा कि हिंडनबर्ग के नए आरोप सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं का दुर्भावनापूर्ण, शरारती और छेड़छाड़ करने वाला चयन है तथा उसका बाजार नियामक सेबी की अध्यक्ष या उनके पति के साथ कोई वाणिज्यिक संबंध नहीं है.
कांग्रेस ने ट्विटर पर सेबी का ‘एकाउंट’ बंद किये जाने को लेकर भी सवाल खड़ा किया. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ट्विटर पर सेबी का एकाउंट ‘बंद’ है और यह आम लोगों के लिए सुलभ नहीं है.

रमेश ने कहा, ” कुछ खबरों से पता चलता है कि हो सकता है कि यह कुछ समय के लिए बंद किया गया हो, लेकिन इस तरह की निरंतर अनुपलब्धता – ऐसे समय में जब इसके शीर्ष नेतृत्व द्वारा हितों के टकराव के सबूत सामने आए हैं – हैरान करने वाली है. मोदानी घोटाला कई महीनों से चल रहा है और सेबी की नि्क्रिरयता बार-बार निराशाजनक रही है.” उन्होंने कहा कि सवाल उठते हैं कि ‘एकाउंट’ क्यों बंद कर दिया गया.

रमेश ने कहा, ” इस अस्पष्टता से यह सवाल उठता है कि क्या यह मंच चुपचाप उन पुराने परामर्शों/प्रेस विज्ञप्तियों को हटा रहा है, जो मोदानी घोटाले में संगठन/इसके नेतृत्व पर दोषारोपण कर रहे हों.” उन्होंने कहा कि यह मंच एक राष्ट्रीय संपत्ति है तथा प्राधिकारियों को उसतक आम लोगों की पहुंच बाधित नहीं करना चाहिए.

कांग्रेस नेता ने कहा, ” संकट के समय में आम लोगों को यह अनुपलब्धता परिपक्व, पेशेवर स्वतंत्र बाजार नियामक का संकेत नहीं है.
इस घटनाक्रम पर एक बयान में रमेश ने कहा था कि सेबी की ”अदाणी महाघोटाले की जांच करने में विचित्र अनिच्छा” को खासकर उच्चतम न्यायालय की विशेषज्ञ समिति द्वारा लंबे समय से देखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि समिति ने इस बात पर गौर किया है कि सेबी ने 2018 में विदेशी निधियों के अंतिम लाभकारी (अर्थात वास्तविक स्वामित्व) से संबंधित रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को कमजोर किया था तथा 2019 में इसे पूरी तरह से हटा दिया था.

उन्होंने कहा , ” ऐसा होने से प्रतिभूति बाजार नियामक के हाथ इस हद तक बंध गये कि उसे गलत कार्यों का संदेह तो है लेकिन उसे विभिन्न विनियमों में विभिन्न शर्तों का अनुपालन भी दिखाई देता है. यही वह विरोधाभास है जिसके कारण सेबी इस मामले पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है .” उन्होंने कहा, ”जनता के दबाव में अदाणी मामले में काफी नुकसान हो जाने के बाद सेबी ने 28 जून, 2023 को सख्त रिपोर्टिंग नियम लागू किये. इसने 25 अगस्त, 2023 को विशेषज्ञ समिति को बताया कि वह संदिग्ध लेन-देन की जांच कर रहा है, फिर भी जांच का कोई नतीजा नहीं निकाला.” कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने रविवार को कहा कि स्तब्धकारी खुलासे से न केवल सेबी प्रमख और अदाणी ग्रुप के बीच के “गहरे संबंध” उजागर होते हैं, बल्कि यह भी पता चलता है कि इस सरकार में निगरानी संस्थाओं में नियुक्तियां कैसे की जाती हैं.

सेबी की शुचिता से गंभीर समझौता हुआ : राहुल गांधी ने हिंडनबर्ग विवाद पर कहा

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की अध्यक्ष के खिलाफ लगे आरोपों से संस्था की शुचिता के साथ ”गंभीर समझौता” हुआ है और उन्होंने पूछा कि क्या उच्चतम न्यायालय इस मामले पर फिर स्वत: संज्ञान लेगा.

गांधी की यह टिप्पणी हिंडनबर्ग की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें अमेरिकी शोध एवं निवेश फर्म ने शनिवार रात जारी अपनी रिपोर्ट में संदेह जताया है कि अडाणी समूह के खिलाफ कार्रवाई करने में पूंजी बाजार नियामक सेबी की अनिच्छा का कारण सेबी प्रमुख माधवी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच की अडाणी समूह से जुड़े विदेशी कोष में हिस्सेदारी हो सकती है.

गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”छोटे खुदरा निवेशकों की संपत्ति की सुरक्षा का दायित्व निभाने वाले प्रतिभूति नियामक सेबी की शुचिता, इसकी अध्यक्ष के खिलाफ लगे आरोपों से गंभीर रूप से प्रभावित हुई है.” कांग्रेस नेता ने कहा, ”देश भर के ईमानदार निवेशकों के मन में सरकार के लिए कई सवाल हैं : सेबी की अध्यक्ष माधवी पुरी बुच ने अभी तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया? अगर निवेशकों की गाढ़ी कमाई डूब जाती है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, सेबी अध्यक्ष या गौतम अडाणी?”

सेबी प्रमुख के खिलाफ हिंडनबर्ग के आरोपों पर उच्चतम न्यायालय संज्ञान ले : आप

आम आदमी पार्टी (आप) ने रविवार को कहा कि कि अमेरिकी शोध एवं निवेश फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा सेबी प्रमुख माधवी पुरी बुच के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर उच्चतम न्यायालय को संज्ञान लेना चाहिए. आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सेबी ने उच्चतम न्यायालय के एक पैनल से कहा था कि अडाणी समूह के संबंध में जांच ”दिशाहीन” है. उन्होंने कहा, ”सेबी प्रमुख और उनके पति का पैसा मुखौटा कंपनियों में निवेश किया गया था. ये तथ्य उच्चतम न्यायालय से क्यों छिपाए गए? उच्चतम न्यायालय को नए घटनाक्रम पर ध्यान देना चाहिए और देखना चाहिए कि किस तरह तथ्यों को छिपाया गया.”

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