सरकार वैज्ञानिक अनुमति के बिना जैव-उत्प्रेरक पदार्थों की बिक्री की अनुमति नहीं देगी: चौहान

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 15 Jul 2025 08:40 PM
सरकार वैज्ञानिक अनुमति के बिना जैव-उत्प्रेरक पदार्थों की बिक्री की अनुमति नहीं देगी: चौहान

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नयी दिल्ली. जैव-उत्प्रेरक (बायोस्टिमुलेंट) पदार्थों के बाजार में अनियमितताओं से चिंतित कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि सरकार वैज्ञानिक अनुमति के बिना ऐसे उत्पादों की बिक्री की अनुमति नहीं देगी. एक समीक्षा बैठक में, चौहान ने मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अधिकारियों की किसानों द्वारा जैव-उत्प्रेरक पदार्थों की गुणवत्ता और उनके प्रभावी नहीं होने की शिकायतों के बावजूद उनकी बढ़ती बिक्री पर ‘आंख मूंदकर’ नज.र रखने के लिए आलोचना की.

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मंत्री ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों को उन जैव-उत्प्रेरक पदार्थों की बिक्री की अनुमति देने का निर्देश दिया जो कृषि क्षेत्र में प्रभावी हैं और गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हैं. उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों को नियम और विनियम निर्धारित करके एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का भी निर्देश दिया.

उन्होंने कहा, ”अब वैज्ञानिक रूप से अनुमोदित होने के बाद ही अनुमति दी जाएगी और इसकी पूरी ज.म्मिेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी.” बायोस्टिमुलेंट या जैव-उत्प्रेरक ऐसे पदार्थ या सूक्ष्मजीव (जैसे लाभकारी बैक्टीरिया, कवक या पौधों के अर्क) होते हैं जो बीजों, पौधों या मिट्टी पर डालने पर प्राकृतिक पादप प्रक्रियाओं को उत्तेजित करते हैं. इस क्षेत्र में अनियमितताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए, चौहान ने कहा कि देश में बायोस्टिमुलेंट कई साल से बेचे जा रहे हैं और बिक्री की अनुमति अवधि एक-एक वर्ष बढ़ाई जा रही है, लेकिन कई बार क्षेत्र से शिकायतें आती हैं कि इससे कोई लाभ नहीं हो रहा है, फिर भी इसे बेचा जा रहा है.

चौहान ने कहा, ”इनकी गहन समीक्षा करना आवश्यक है ताकि यह देखा जा सके कि किसानों को इससे कितना लाभ मिल रहा है और यदि नहीं मिल रहा, तो इसे बेचने की अनुमति नहीं दी जा सकती.” उन्होंने कहा कि हजारों कंपनियों ने बिना किसी नियम के जैव-उत्प्रेरक बेचना शुरू कर दिया है, लेकिन सरकार किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं होने देगी. उन्होंने कहा कि सरकार इनके संदिग्ध विनिर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई करेगी.

वर्तमान में, उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित) (नियंत्रण) आदेश, 1985 (एफसीओ) में संशोधनों के माध्यम से जैव-उत्प्रेरक के लिए एक व्यापक नियामकीय ढांचा मौजूद है, जिसे 2024 और 2025 में नवीनतम जानकारियों के साथ अद्यतन किया जाएगा.
भारत में जैव-उत्प्रेरक बाजार का मूल्य 2024 में लगभग 35.5-36.2 करोड़ डॉलर था और 2032 तक इसके 1.13 अरब डॉलर से 1.2 अरब डॉलर के बीच पहुंचने का अनुमान है.

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