स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कैंसर की दवा पर सीमा शुल्क में कटौती का किया स्वागत

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 23 Jul 2024 09:46 PM
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कैंसर की दवा पर सीमा शुल्क में कटौती का किया स्वागत
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नयी दिल्ली. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कैंसर की तीन और दवाओं को आयात शुल्क से छूट दिए जाने के केंद्र सरकार के फैसले का मंगलवार को स्वागत किया लेकिन साथ ही स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च बढ़ाकर सकल घरेल उत्पाद (जीडीपी) का 2.5 प्रतिशत करने की काफी समय से लंबित मांग इस साल के बजट में भी पूरी नहीं होने पर निराशा जताई.

केंद्र सरकार ने ट्रैस्टुजुमैब डेरक्सटेकन (स्तन कैंसर या गैस्ट्रोएसोफेगल एडेनोकार्सिनोमा के लिए), ओसिर्मिटनिब (विशिष्ट उत्परिवर्तन वाले फेफड़ों के कैंसर के लिए) और डुरवालुमैब (फेफड़ों और पित्त नली के कैंसर के लिए)के आयात पर सीमा शुल्क से छूट देने का बजट में प्रस्ताव किया है. फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ.आशुतोष रघुवंशी ने कहा कि इन दवाओं के आयात पर सीमा शुल्क की छूट देकर सरकार ने कैंसर के इलाज के दौरान पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करने में ठोस कदम उठाया है.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम के तहत एक्स-रे ट्यूब और फ्लैट पैनल डिटेक्टरों के लिए बीसीडी (मूल सीमा शुल्क) में बदलाव का प्रस्ताव करने से घरेलू ओईएम निर्माताओं को लागत कम करने, स्थानीय स्रोत को प्रोत्साहित करने और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के कारण काफी लाभ होगा. रघुवंशी ने हालांकि कहा कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की कुछ दीर्घकालिक मांगें, जैसे स्वास्थ्य सेवा पर खर्च बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.5 प्रतिशत करना, भारत में चिकित्सा यात्रा को बढ़ावा देना, अप्रत्यक्ष कराधान का समाधान करना और अप्रयुक्त न्यूनतम वैकल्पिक कर क्रेडिट, अभी भी अनसुलझे हैं.

उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के संस्थापक और निदेशक डॉ.सुचिन बजाज ने कहा कि स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र को बजट से और उम्मीदें थीं क्योंकि क्षेत्र ने सरकार से स्वास्थ्या चुनौतियों से निपटने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य मुहैया कराने के लिए व्यय बढ़ाने, अवसंरचना और नवोन्मेष पर जोर देने की अपील की थी.

उन्होंने कहा,” कैंसर मरीजों के लिए सीमा शुल्क में छूट स्वागयोग्य कदम है और हम एक्सरे ट्यूब और फ्लैट पैनल डिटेक्टर के लिए बीसीडी में प्रस्तावित बदलाव का स्वागत करते हैं और यह घरेलू स्तर पर क्षमता निर्माण की नीति के अनुरूप है. लेकिन उद्योग के नेता और की उम्मीद कर रहे थे.” रीजेंसी हेल्थ के सीईओ अभिषेक कपूर ने कहा कि जैवप्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं विकास के लिए वित्तपोषण 500 करोड़ से बढ़ाकर 1,100 करोड़ किया गया है जो सरकार की नवोन्मेष एवं स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के विस्तार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है.

एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एएचपीआई) के महानिदेशक डॉ. गिरधर ज्ञानी ने कहा कि हालांकि सरकार ने इस वर्ष के शुरू में अंतरिम बजट में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए कई प्रस्ताव रखे थे लेकिन नया बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता क्योंकि इसमें इस क्षेत्र के लिए विस्तृत आवंटन नहीं किया गया है.

ज्ञानी ने कहा, ”हमें स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे और सेवाओं के लिए अधिक व्यापक वित्त पोषण और सहायता की उम्मीद थी. हमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहतर कवरेज के लिए पीएमजेएवाई के बजट में वृद्धि की उम्मीद थी, जिसमें प्रतिपूर्ति दरों में लंबे समय के बाद बदलाव किया गया था.” मेडलर्न के सह-संस्थापक और सीईओ दीपक शर्मा ने शिक्षा और रोजगार के लिए केंद्रीय बजट में 1.48 लाख करोड़ रुपये के आवंटन का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों, विशेषकर स्वास्थ्य सेवा में कौशल विकास की अहम आवश्यकता को स्वीकार किया गया है. होलिस्टिका वर्ल्ड के संस्थापक और निदेशक डॉ. धर्मेश शाह ने कहा कि डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता और पहुंच सुनिश्चित होगी.

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