
नयी दिल्ली/मुंबई. अदाणी समूह ने अमेरिकी शोध एवं निवेश फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च के नवीनतम आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और चुनिंदा सार्वजनिक सूचनाओं से छेड़छाड़ करने वाला बताते हुए रविवार को कहा कि उसका बाजार नियामक सेबी की चेयरपर्सन या उनके पति के साथ कोई वाणिज्यिक संबंध नहीं है.
अदाणी समूह ने शेयर बाजार को दी एक सूचना में कहा, “हिंडनबर्ग के नए आरोप सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं का दुर्भावनापूर्ण, शरारती और छेड़छाड़ करने वाला चयन है. ऐसा तथ्यों और कानून की अवहेलना करते हुए निजी मुनाफाखोरी के लिए पूर्व-निर्धारित निष्कर्षों पर पहुंचने के इरादे से किया गया है.” समूह ने कहा, “हम अदाणी समूह के खिलाफ इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं. ये उन अस्वीकार किए जा चुके दावों का दोहराव हैं जिनकी गहन जांच की गई है, जो निराधार साबित हुए हैं और जनवरी, 2024 में उच्चतम न्यायालय द्वारा पहले ही खारिज कर दिए गए हैं.” हिंडनबर्ग ने शनिवार रात को जारी एक ब्लॉगपोस्ट में कहा कि सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच और उनके पति ने विदेश में स्थित उन इकाइयों में निवेश किया, जो कथित तौर पर इंडिया इन्फोलाइन द्वारा प्रबंधित एक फंड का हिस्सा थे और उसमें अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के बड़े भाई विनोद अदाणी ने भी निवेश किया था.
हिंडनबर्ग के मुताबिक, बुच दंपति के ये निवेश 2015 के हैं जो सेबी के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में माधवी की 2017 में नियुक्ति और मार्च 2022 में चेयरपर्सन के रूप में उनकी पदोन्नति से काफी पहले के हैं. अमेरिकी निवेश फर्म ने कहा कि बरमूडा स्थित ग्लोबल ऑपर्च्युनिटीज फंड भी इस फंड में निवेश करने वालों में शामिल था. अदाणी समूह से जुड़ी इकाइयों द्वारा समूह की कंपनियों के शेयरों में कारोबार के लिए कथित तौर पर ग्लोबल ऑपर्च्युनिटीज फंड का ही इस्तेमाल किया गया था.
निवेश कंपनी ने ‘व्हिसलब्लोअर दस्तावेजों’ का हवाला देते हुए कहा, “सेबी की वर्तमान प्रमुख बुच और उनके पति के पास अदाणी समूह में धन के हेराफेरी घोटाले में इस्तेमाल किए गए दोनों अस्पष्ट ‘ऑफशोर फंड’ में हिस्सेदारी थी.” विदेशी बाजारों में निवेश करने वाले फंड को ऑफशोर फंड या विदेशी कोष कहते हैं. हिंडनबर्ग ने दावा किया है कि अदाणी समूह के मॉरीशस और विदेशी फर्जी इकाइयों के कथित अस्पष्ट जाल को लेकर सेबी ने आश्चर्यजनक रूप से रुचि नहीं दिखाई है.
अदाणी समूह ने इन आरोपों का जवाब देते हुए नियामकीय सूचना में कहा, “हम यह दोहराते हैं कि हमारी विदेशी होल्डिंग संरचना पूरी तरह से पारदर्शी है, जिसमें सभी प्रासंगिक विवरण नियमित रूप से कई सार्वजनिक दस्तावेजों में जाहिर किए जाते हैं.” इसमें कहा गया कि अनिल आहूजा अदानी पावर (2007-2008) में थ्री-आई निवेश फंड के नामित निदेशक थे और बाद में 2017 तक अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक रहे थे.
समूह ने कहा, “हमारी प्रतिष्ठा को बदनाम करने के लिए जानबूझकर किए गए इस प्रयास में उल्लिखित व्यक्तियों या मामलों के साथ हमारा कोई वाणिज्यिकि संबंध नहीं है. हम पारर्दिशता और सभी कानूनी एवं नियामकीय प्रावधानों के अनुपालन के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध हैं.” इसके साथ ही अदाणी समूह ने हिंडनबर्ग को ‘भारतीय प्रतिभूति कानूनों के कई उल्लंघनों के लिए जांच के दायरे में आया एक बदनाम शॉर्ट-सेलर’ बताते हुए कहा, “हिंडनबर्ग के आरोप भारतीय कानूनों के प्रति पूरी तरह से अवमानना ??करने वाली एक हताश इकाई के भुलावे से अधिक कुछ नहीं हैं.”
अपने फंड के जरिये अदाणी के शेयरों में कोई निवेश नहीं किया: 360 वन
संपदा प्रबंधन कंपनी 360 वन ने हिंडनबर्ग रिसर्च की नई रिपोर्ट में किए गए दावों पर रविवार को कहा कि उसके पूर्ववर्ती आईपीई-प्लस फंड-1 ने अदाणी समूह के शेयरों में कोई निवेश नहीं किया था. कंपनी 360 वन (पूर्व में आईआईएफएल वेल्थ मैनेजमेंट) ने एक बयान में कहा कि सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच का इस निवेश फंड में कुल प्रवाह का 1.5 प्रतिशत से भी कम निवेश था और किसी भी निवेशक की निवेश निर्णयों में कोई संलिप्तता नहीं थी.
कंपनी ने कहा कि इस फंड ने नियामकीय नियमों का पूरी तरह पालन किया था. यह फंड अक्टूबर, 2013 से लेकर अक्टूबर, 2019 के बीच सक्रिय था. कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा, “फंड की पूरी अवधि के दौरान आईपीई-प्लस फंड-1 ने किसी भी फंड के जरिये प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अदाणी समूह के किसी भी शेयर में शून्य निवेश किया है.” फंड के लिए प्रबंधन के तहत अधिकतम परिसंपत्तियां लगभग 4.8 करोड़ डॉलर थीं और एयूएम का 90 प्रतिशत से अधिक लगातार बॉन्ड में निवेश किया गया था.
हिंडनबर्ग ने शनिवार को कहा कि सेबी की चेयरपर्सन और उनके पति ने विदेशी इकाइयों में निवेश किया था, जो कथित तौर पर इंडिया इन्फोलाइन (आईआईएफएल) द्वारा प्रबंधित फंड संरचना का हिस्सा थे और उसमें विनोद अदाणी का भी निवेश रहा. हिंडनबर्ग के मुताबिक, साल 2015 में कथित तौर पर ये निवेश वर्ष 2017 में सेबी के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में माधवी पुरी बुच की नियुक्ति और मार्च, 2022 में इसका चेयरपर्सन बनने से काफी पहले किए गए थे.
इसके मुताबिक, बरमूडा स्थित ग्लोबल अपॉर्च्युनिटीज फंड भी इस फंड में निवेश करने वालों में शामिल था. अदाणी समूह से जुड़ी इकाइयों द्वारा समूह की कंपनियों के शेयरों में कारोबार के लिए कथित तौर पर ग्लोबल ऑपर्च्युनिटीज फंड का ही इस्तेमाल किया गया था. बुच और उनके पति 2015 में इनमें से एक उप-फंड में निवेशक थे. इस बीच, म्यूचुअल फंड उद्योग निकाय एम्फी ने रविवार को सेबी प्रमुख बुच का समर्थन किया.



