‘सत्ता की भूख’ में कांग्रेस देश की लोकतांत्रिक प्रणाली पर चोट करने को आमादा: स्मृति ईरानी

नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस पर भारतीय लोकतंत्र को चोट पहुंचाने के लिए ‘बाहरी ताकतों’ के इस्तेमाल का आरोप लगाया और दावा किया लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही इस प्रकार की गतिविधियों का बढ़ना इस बात का संकेत है कि ‘सत्ता की भूख’ में वह देश की लोकतांत्रिक प्रणाली पर चोट करने को आमादा है.

केंद्रीय महिला एंव बाल विकास और अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री ईरानी ने विपक्षी एकजुटता के प्रयासों के लिए विरोधी दलों पर भी निशाना साधा और कहा कि जिस प्रकार बिहार के भागलपुर में एक पुल पानी में बह गया वैसे ही उनके अरमान भी 2024 के लोकसभा चुनावों में बह जाएंगे.

अपने अधीन मंत्रालयों में पिछले नौ साल के दौरान शुरू की गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सरकार की उपलब्धियां गिनाने के बाद यहां पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि भाजपा पहले से ही कहती रही है कि कैसे कांग्रेस का नेतृत्व भारत के लोकतंत्र पर चोट करने के लिए ‘बाहरी ताकतों का इस्तेमाल’ कर रहा है.”

उन्होंने कहा, ”जैसे-जैसे चुनाव पास आ रहा है, वैसे-वैसे कांग्रेस के नेताओं की इस प्रकार की गतिविधि का बढ़ना, अपने आप में इस बात का संकेत है कि कांग्रेस सत्ता की भूख में अपने देश की लोकतांत्रिक प्रणाली पर चोट करने के लिए आमादा है.” ईरानी ने सवाल किया, ”इतने बेचैन क्यों हैं गांधी खानदान के लोग?” बिहार की राजधानी पटना में प्रस्तावित विपक्षी दलों की बैठक से जुड़े एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो विपक्षी दल अपने पैरों पर खड़ा होने में विफल रहे हैं वह एक दूसरे में सहारा ढूंढ रहे हैं.

उन्होंने भागलपुर में पुल ढहने की हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा, ”अभी 1750 करोड़ रूपये की लागत का एक पूरा ढांचा वहां पानी में बह गया. उनके अरमान भी 2024 में इसी प्रकार बह जाएंगे, यह मेरा विश्वास है.” राहुल के ‘मोहब्बत की दुकान’ नारे पर तंज कसते हुए ईरानी ने सवाल किया कि यह कैसी मोहब्बत है जो सिखों का नरसंहार करे, कोयला और चारा लूटने वालों के साथ हाथ मिलाए, जो संसद में स्थापित सैंगोल का अपमान करें, संसद का बहिष्कार करें? भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर राहुल द्वारा उठाए गए मुद्दे से जुड़े एक सवाल पर ईरानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की प्राथमिकता में हर वर्ग है और उसने सभी वर्गों व समुदायों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं व कार्यक्रमों में वित्तीय आवंटन सुनिश्चित किया है.

उन्होंने सवाल किया कि जो अपने आप को मुस्लिम समुदाय का संरक्षक बताता है उनसे पूछा जाना चाहिए कि उनकी सरकार में अल्पसंख्यकों के कल्याण पर कितना खर्च किया गया. महिलाओं की सुरक्षा के बारे में उन्होंने कहा कि खुद को घोषणाओं तक सीमित रखने वाली कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने महिला सुरक्षा के लिए एक भी परियोजना क्रियान्वित नहीं की. उन्होंने कहा, ”आज हमारे नौ वर्षों के कार्यकाल में हमारे मंत्रालय ने, निर्भया फंड के अंतर्गत राज्य सरकारों और भारत सरकार के अन्य प्रकल्पों के साथ 12 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाओं को संचालित किया है.”

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