
वारसॉ. पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ वार्ता के बाद कहा कि यूक्रेन में संघर्ष की शीघ्र और न्यायसंगत समाप्ति में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. मोदी कीव की ऐतिहासिक यात्रा पर जा रहे हैं. मोदी के साथ वार्ता के बाद अपने प्रेस वक्तव्य में टस्क ने कहा कि उन्होंने और भारत के प्रधानमंत्री ने वर्तमान में पूरे विश्व के लिए चिंता का कारण बने मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट रूप से व्यक्त किया है.
टस्क ने कहा, ”मैं बहुत खुश हूं कि प्रधानमंत्री (मोदी) ने युद्ध की शांतिपूर्ण, न्यायसंगत, शीघ्र समाप्ति के प्रति अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता जताई है. हम दोनों इस बात से सहमत हैं कि भारत यहां (यूक्रेन में) एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक भूमिका निभा सकता है.” पोलिश प्रेस एजेंसी ने उन्हें उद्धृत करते हुए कहा, ”हम दोनों इस बात से सहमत हैं कि भारत इस विषय में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक भूमिका निभाने में सक्षम है.” टस्क ने कहा कि यह घोषणापत्र विशेष महत्व रखता है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी कुछ ही घंटों में कीव की यात्रा करेंगे.
उन्होंने कहा, ”इस यात्रा के संबंध में, हम सभी इससे सहमत हैं कि यह ऐतिहासिक महत्व का हो सकता है.” वहीं, मोदी ने कहा कि भारत का दृढ़ता से मानना है कि किसी भी समस्या का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं किया जा सकता और यह (भारत) क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बहाल करने के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है. टस्क ने कहा कि इतिहास ने दोनों राष्ट्रों को सीख दी है कि ”नियमों, सीमाओं, क्षेत्रीय अखंडता, देशों की संप्रभुता, कानून का शासन का सम्मान करना” कितना महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा कि ”निरंतर इसकी (भारत की) सरकारों की लोकतांत्रिक प्रकृति रहने को लेकर” पूरा विश्व भारत की प्रशंसा करता है. उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी चीज है जो दुनिया के उस हिस्से में आम बात नहीं थी. टस्क ने यह भी कहा कि पोलैंड और भारत अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले गए हैं.
उन्होंने कहा, ”ये केवल ‘शब्द’ नहीं हैं. इसके मूल में कई क्षेत्रों में सहयोग करने का हमारा दृढ़ संकल्प और तत्परता है.” प्रधानमंत्री मोदी बृहस्पतिवार रात पोलैंड से ‘रेल फोर्स वन’ ट्रेन से कीव जाएंगे, जिसमें करीब 10 घंटे लगेंगे. वापसी की यात्रा भी इतनी ही अवधि की होगी.
मोदी की कीव यात्रा मॉस्को की उनकी हाई-प्रोफाइल यात्रा के करीब छह सप्ताह बाद हो रही है, जिसकी अमेरिका और उसके कुछ पश्चिमी सहयोगियों ने आलोचना की थी. भारत ने यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की अबतक निंदा नहीं की है और वह वार्ता एवं कूटनीति के माध्यम से संघर्ष के समाधान की अपील करता रहा है.



