भारत ने दिया करारा जवाब, सिंधु जलसंधि निलंबन से पाकिस्तान पर तगड़ा वार: हिमंत

Author: navabharat digital
UPDATED: Thu, 24 Apr 2025 12:30 PM
भारत ने दिया करारा जवाब, सिंधु जलसंधि निलंबन से पाकिस्तान पर तगड़ा वार: हिमंत
ऑडियो सुनें

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार को कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय आक्रामक कूटनीति के नए युग की शुरूआत है। उन्होंने कहा कि इस संधि को निलंबित करना भारत का पलटवार है क्योंकि जल सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हुई है।

मंगलवार को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन में आतंकवादियों ने हमला कर 26 लोगों की हत्या कर दी थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। हमले के बाद पाकिस्तान को निशाना बनाते हुए भारत ने बुधवार को उससे राजनयिक संबंधों को कम करने की घोषणा की और कई कदम उठाए, जिनमें पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के निष्कासन, 1960 की ंिसधु जल संधि का निलंबन और अटारी भूमि पारगमन चौकी को तत्काल बंद करना शामिल है।

इन निर्णयों की सराहना करते हुए शर्मा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ह्लभारत ने करारा जवाब दिया।उन्होंने कहा कि भारत ने छह दशकों से अधिक समय तक इस संधि का सम्मान किया और अब इसे निलंबित कर यह स्पष्ट कर दिया है कि ह्लआतंकवाद को समर्थन देने वाले राष्ट्र के साथ जल सहयोग जारी नहीं रह सकता। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पाकिस्तान की 90 प्रतिशत से अधिक कृषि ंिसधु नदी प्रणाली पर निर्भर है।

उन्होंने कहा, ह्लजल की उपलब्धता में 10-15 प्रतिशत की कमी से फसलों को हर साल दो से तीन अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान हो सकता है। गेहूं और चावल जैसी प्रमुख निर्यात फसलों की पैदावार में 15-20 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है, जिससे 12 करोड़ से अधिक लोगों की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। शर्मा ने कहा कि पाकिस्तान को 2000 से 3000 मेगावाट बिजली उत्पादन का नुकसान होगा, जो उच्च प्रवाह के दौरान ग्रिड क्षमता का 20झ्र25 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा, ह्लआर्थिक प्रभाव की बात करें तो बिजली कटौती, ऊर्जा आयात लागत और औद्योगिक मंदी के कारण पाकिस्तान को सालाना 1.5 से 2 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलसंधि के निलंबन से पाकिस्तान में शहरी जल आपूर्ति भी प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि लाहौर, मुल्तान, फैसलाबाद, कराची जैसे शहरों में इसका असर ज्यादा होगा जो सिंधु नदी के जल पर अत्यधिक निर्भर हैं।

उन्होंने दावा किया, ह्लपाकिस्तान में चार करोड़ से अधिक शहरी आबादी जल संकट का सामना कर सकती है। आपातकालीन जल आपूर्ति (जैसे टैंकर, डीसेलिनेशन) की लागत सालाना हजारों करोड़ तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा जल-प्रधान क्षेत्रों से आता है और यदि संधि का निलंबन जारी रहता है, तो इससे पाकिस्तान के जीडीपी में सालाना 1.5झ्र2 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है।

शर्मा ने कहा, खाद्य और ऊर्जा कीमतों में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो सकती है, जिससे व्यापक आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पाकिस्तान सिर्फ 30 दिनों के जल भंडारण में सक्षम है, जबकि भारत 170 दिनों तक पानी संग्रह कर सकता है।

उन्होंने कहा, ह्लमौसमी उतार-चढ़ाव या भारत द्वारा नियंत्रित जल कटौती के कारण पाकिस्तान को तत्काल संकट का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं होगा। शर्मा ने कहा कि सिंधु जल संधि को निलंबित करना भारत का विचारित, वैध और रणनीतिक कदम है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद की जिम्मेदारी लेने के लिए मजबूर करना है।

उन्होंने कहा, ह्लयह साहसिक कदम एक ऐसे नए युग की शुरूआत है, जहां जल सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ जोड़ा गया है। शुरूआत हो चुकी है, भारत इसे तार्किक निष्कर्ष तक ले जाएगा। पाकिस्तान को समझना चाहिए कि यह नया भारत है।

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By navabharat digital