
न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. दो प्रमुख भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता से बेदखल होने के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ जारी हिंसा को तत्काल रोके जाने का आ”ान किया है. सांसदों ने अंतरिम सरकार के मनोनीत प्रधानमंत्री नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस से भी आग्रह किया है कि वह देश की बागडोर संभालने पर कानून का शासन बनाए रखें.
दो प्रभावशाली सांसदों की यह टिप्पणी बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ अपराध में वृद्धि और हिंदू मंदिरों को नष्ट किए जाने के बीच कई हिंदू-अमेरिकी समूहों द्वारा विदेश विभाग के अधिकारियों से मुलाकात करने के एक दिन बाद आई है. उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की निंदा करने में अमेरिकी संसद और प्रशासन की विफलता अस्वीकार्य है. बांग्लादेश में अनेक हिंदू मंदिरों, घरों और व्यवसायों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुई हैं. हसीना के इस्तीफा देकर सोमवार को भारत पहुंचने के बाद से हिंसा में हसीना की अवामी लीग पार्टी से जुड़े कम से कम दो हिंदू नेता मारे गए हैं.
सांसद रो खन्ना ने बृहस्पतिवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”बांग्लादेशी छात्रों को प्रधानमंत्री हसीना के खिलाफ सिर्फ मानवाधिकार की चिंता थी. यह अच्छा है कि वह चली गईं. लेकिन अब हिंदुओं को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा गलत है. प्रधानमंत्री यूनुस को कानून का शासन बनाए रखना चाहिए और मंदिरों या किसी भी राजनीतिक दल या आस्था के लोगों को हिंसा से बचाना चाहिए.”
सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा, ”बांग्लादेश अपनी अंतरिम सरकार को शपथ दिलाने की तैयारी कर रहा है, मैं सभी सरकारी अधिकारियों, नए प्रशासन और पुलिस प्रमुख तथा बांग्लादेश के लोगों से देश भर में फैली हिंसा को खत्म करने के लिए हरसंभव प्रयास करने का आग्रह करता हूं. इस हिंसा में देश के हिंदू अल्पसंख्यकों, उनके घरों, व्यवसायों और उनके मंदिरों को क्रूरता से निशाना बनाया जाना शामिल है.” कृष्णमूर्ति ने बुधवार को एक बयान में कहा कि हिंसा को रोकना होगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए ताकि बांग्लादेश एक राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ सके.
‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’ (एफआईआईडीएस) ने एक अलग बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश विभाग, अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता (आईआरएफ) दूत और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों से बांग्लादेश में शांति फिर से स्थापित करने, ‘अल्पसंख्यकों की रक्षा’ सुनिश्चित करने तथा एक और संभावित हिंदू नरसंहार को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया.



