भारत की आर्थिक वृद्धि दूसरी तिमाही में 7.5 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान

नयी दिल्ली. देश की जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 7.5 प्रतिशत या उससे अधिक रहने की उम्मीद है. इसका मुख्य कारण सितंबर के अंत में जीएसटी दरों में कटौती के कारण त्योहारी बिक्री में तेज वृद्धि है. एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में मंगलवार को यह कहा गया.

रिपार्ट में कहा गया है कि निवेश गतिविधियों में तेजी, ग्रामीण खपत में सुधार और सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से वृद्धि को मजबूती मिल रही है. इसे जीएसटी को युक्तिसंगत बनाये जाने जैसे संरचनात्मक सुधारों से भी मदद मिल रही है. इससे त्योहारों के दौरान मांग को गति मिली और कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ा है.

एसबीआई की आर्थिक शोध विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है, ”त्योहारों के दौरान बिक्री के अच्छे आंकड़ों के साथ कृषि, उद्योग और सेवाओं में खपत और मांग में तेजी दिखाने वाले प्रमुख संकेतकों का प्रतिशत बढ़कर दूसरी तिमाही में 83 प्रतिशत हो गया जो पहली तिमाही में 70 प्रतिशत था. अनुमानित मॉडल के आधार पर, हमें वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में लगभग 7.5 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान है. इसमें वृद्धि की संभावना मौजूद है.” सरकार इस महीने के अंत में जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के आंकड़े जारी करेगी. भारतीय रिजर्व बैंक ने दूसरी तिमाही के लिए सात प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगाया है.

रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषण से संकेत मिलता है कि नवंबर के लिए सकल घरेलू माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह लगभग 1.49 लाख करोड़ रुपये रह सकता है, जो सालाना आधार पर 6.8 प्रतिशत की वृद्धि है. इसके साथ 51,000 करोड़ रुपये के आईजीएसटी और आयात पर उपकर के साथ, नवंबर का जीएसटी संग्रह दो लाख करोड़ रुपये को पार कर सकता है. इसका कारण कम जीएसटी दर के कारण त्योहारों के दौरान मांग का अधिक रहना है.

इसमें यह भी कहा गया है कि त्योहारों (सितंबर-अक्टूबर) के दौरान, जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने के साथ खपत में बड़ी वृद्धि हुई है. इसका पहला संकेत क्रेडिट और डेबिट कार्ड खर्च के प्रतिरूप के विश्लेषण से मिलता है. क्रेडिट कार्ड में, वाहन, किराना स्टोर, इलेक्ट्रॉनिक्स, र्फिनशिंग और यात्रा जैसी व्यापारिक श्रेणियों ने ई-कॉमर्स मंचों पर भारी वृद्धि का संकेत दिया. लगभग 38 प्रतिशत खर्च जन-उपयोगी और सेवाओं पर हुआ. इसके बाद सुपरमार्केट और किराना पर 17 प्रतिशत और यात्रा एजेंट की हिस्सेदारी लगभग नौ प्रतिशत रही.

शहरों के हिसाब से क्रेडिट कार्ड खर्च से पता चलता है कि मांग सभी क्षेत्रों में बढ़ी है. लेकिन मझोले शहरों में सबसे अधिक बढ़ रही है. ई-कॉमर्स की बिक्री सभी शहरों में काफी हद तक सकारात्मक रही है. रिपोर्ट में कहा गया, ”जीएसटी को युक्तिसंगत बनाये जाने के साथ, इस साल सितंबर-अक्टूबर में बीते वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में सभी प्रमुख राज्यों में डेबिट कार्ड खर्च में भी वृद्धि दिखी है.” इसमें यह भी कहा गया है कि भारत का वृहद आर्थिक दृष्टिकोण सतर्क रुख के साथ संभावनाओं वाला बना हुआ है. इसका कारण मजबूत घरेलू मांग और कम होता मुद्रास्फीतिक दबाव है. इस वृद्धि को मजबूत निवेश गतिविधियों, ग्रामीण खपत में सुधार और सेवाओं एवं विनिर्माण में तेजी से समर्थन मिल रहा है. जीएसटी 2.0 सुधारों से निजी खपत और घरेलू मांग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

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