देश के सेवा क्षेत्र की गतिविधि में दिसंबर में नरमी, नए कारोबार का धीमा विस्तार रहा कारण:पीएमआई

नयी दिल्ली: देश के सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर में दिसंबर में गिरावट दर्ज की गई। नए कारोबार एवं उत्पादन में विस्तार की दर 11 महीनों में सबसे धीमी रही और कंपनियों ने अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती से परहेज किया। मंगलवार को जारी मासिक सर्वेक्षण में यह जानकारी मिली। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया सेवा पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक नवंबर के 59.8 से दिसंबर में 58.0 पर आ गया। यह जनवरी के बाद से सबसे धीमी विस्तार दर को दर्शाता है।

क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) की भाषा में 50 से ऊपर अंक का मतलब गतिविधियों में विस्तार से और 50 से कम का आशय संकुचन से होता है।
सर्वेक्षण के अनुसार, कंपनियां वृद्धि की संभावनाओं को लेकर आशावादी बनी रहीं लेकिन समग्र भावना लगभग साढ़े तीन वर्ष में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गईं।

एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस की अर्थशास्त्र कार्यकारी निदेशक पॉलियाना डी लीमा ने कहा, ‘‘ दिसंबर में भारत के सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा रहा लेकिन 2025 के अंत में कई सर्वेक्षण संकेतकों में आई गिरावट नए साल में वृद्धि की गति में नरमी का संकेत दे सकती है।’’ बा‘ मांग के संदर्भ में सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने एशिया, उत्तरी अमेरिका, पश्चिम एशिया तथा ब्रिटेन से मांग में वृद्धि दर्ज करते हुए एक और सुधार देखा। नए निर्यात आॅर्डर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

सर्वेक्षण के अनुसार, कीमतों के मोर्चे पर कच्चे माल की लागत और उत्पादन शुल्क में मामूली वृद्धि हुई। इस बीच, भारतीय सेवा कंपनियां 2026 में व्यावसायिक गतिविधियों में वृद्धि को लेकर आश्वस्त दिखीं लेकिन बाजार में बढ़ती अनिश्चितता एवं विनिमय दर में उतार-चढ़ाव को लेकर ंिचताओं के बीच सकारात्मक भावना का समग्र स्तर लगातार तीसरे महीने घटकर लगभग साढ़े तीन वर्ष में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।

वहीं निजी क्षेत्र के उत्पादन में दिसंबर में वृद्धि घटकर 11 महीनों के निचले स्तर पर आ गई। दूसरी ओर, एचएसबीसी इंडिया समग्र उत्पादन सूचकांक नवंबर के 59.7 से दिसंबर में 57.8 पर आ गया। विनिर्माण और सेवा प्रदाताओं दोनों में मंदी के बीच यह जनवरी 2025 के बाद से सबसे कमजोर स्तर है।

सर्वेक्षण के अनुसार, भारत के निजी क्षेत्र में कच्चे माल की लागत और उत्पादन शुल्क दोनों में मामूली वृद्धि जारी रही। दिसंबर में समग्र स्तर पर रोजगार सृजन में ठहराव आया जिसका कारण वस्तु उत्पादकों की वृद्धि में मंदी एवं सेवा प्रदाताओं में आंशिक छंटनी थी। इसमें कहा गया कि निजी क्षेत्र की कंपनियां वृद्धि की संभावनाओं को लेकर आशावादी बनी हुई हैं। हालांकि धारणा 41 महीने के निचले स्तर पर आ गई है।

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