असम में घुसपैठिए को पकड़ा, बांग्लादेश वापस भेजा गया: हिमंत विश्व शर्मा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 20 Oct 2024 08:46 PM
असम में घुसपैठिए को पकड़ा, बांग्लादेश वापस भेजा गया: हिमंत विश्व शर्मा
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गुवाहाटी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को कहा कि एक बांग्लादेशी नागरिक को करीमगंज जिले में अवैध रूप से भारत की सीमा में प्रवेश करते समय पकड़ लिया और उसे पड़ोसी देश वापस भेज दिया गया. शर्मा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ”बांग्लादेशी घुसपैठिए मोहिबुल्ला को अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट गिरफ्तार किया गया और करीमगंज में सीमा पार भेज दिया गया.” असम के करीमगंज, कछार, धुबरी और दक्षिण सलमारा-मनकाचर जिले बांग्लादेश के साथ 267.5 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं.

शर्मा ने कहा, ”हमारी असम पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) सीमा पर घुसपैठ की सभी कोशिशों को नाकाम करने के लिए चौबीसों घंटे सतर्क रहती हैं. हमारी टीम ने बहुत बढि.या काम किया.” करीमगंज के सुतारकंडी में एक एकीकृत जांच चौकी (आईसीपी) है. पूर्वोत्तर में कुल तीन आईसीपी हैं, जिनमें से दो मेघालय के दावकी और त्रिपुरा के अखौरा में स्थित हैं.

असम के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जी.पी. सिंह ने पहले कहा था कि राज्य पुलिस और बीएसएफ कानून के अनुसार गैर-भारतीयों द्वारा बांग्लादेश से देश की सीमा में प्रवेश करने के किसी भी प्रयास को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. उन्होंने कहा था कि सभी भारतीय पासपोर्ट धारकों को संकटग्रस्त बांग्लादेश से राज्य के प्रवेश द्वार से लौटने की अनुमति होगी.

असम संधि पर न्यायालय का फैसला ऐतिहासिक नहीं, मेरी मिली-जुली प्रतिक्रिया : मुख्यमंत्री शर्मा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने असम संधि के तहत ‘कट ऑफ’ तारीख पर उच्चतम न्यायालय के फैसले को लेकर रविवार को ‘खुशी और गम की मिली जुली प्रतिक्रया’ दी. एक आधिकारिक समारोह के अवसर पर रविवार को संवाददाताओं से बात करते हुए शर्मा ने कहा कि असमिया लोगों को ‘संघर्षों’ के माध्यम से आगे बढ़ना होगा.

शर्मा ने न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर कहा, ”मुझे नहीं पता कि यह फैसला ऐतिहासिक है या नहीं. सरकार ने असम संधि लागू की थी, इसलिए अदालत में उसका रुख यह था कि कट-ऑफ तारीख 1971 होनी चाहिए. हालांकि, असम में कई लोग चाहते थे कि कट-ऑफ तारीख 1951 होनी चाहिए.” उच्चतम न्यायालय की पीठ ने बृहस्पतिवार को बहुमत के फैसले में नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, जो एक जनवरी, 1966 और 25 मार्च, 1971 के बीच असम में आए प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करती है.

शर्मा ने कहा, ”मुझे लगता है कि यह फैसला 1971 को कट-ऑफ तिथि के रूप में स्थापित करता है, और मेरी प्रतिक्रिया मिश्रित है. इसमें खुशी और अफसोस दोनों हैं. इसलिए, मैं इसे ऐतिहासिक निर्णय नहीं कहना चाहता; यह बस दोनों भावनाओं का मिश्रण है.” न्यायालय के फैसले के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में कुछ स्पष्ट किए बिना कहा, ”असमिया समुदाय को इस तरह के संघर्षों के साथ आगे बढ़ना होगा.”

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