
यरुशलम/खान यूनिस. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को चेतावनी दी कि इजराइल में नागरिकों को निशाना बनाने की ईरान को ”बहुत भारी कीमत” चुकानी होगी. नेतन्याहू ने यह टिप्पणी तेल अवीव के नजदीक बात याम शहर में सुबह-सुबह ईरानी मिसाइल हमले के स्थल का दौरा करते हुए की. इस हमले में कम से कम सात लोग मारे गए और कई दर्जन अन्य घायल हो गए हैं.
इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा नेतन्याहू के हवाले से जारी बयान में कहा गया, ”ईरान को नागरिकों – महिलाओं, बच्चों – की हत्या के लिए बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, जिसे उसने जानबूझकर अंजाम दिया है. हम अपने उद्देश्यों को प्राप्त करेंगे, और हम उन पर पूरी ताकत से हमला करेंगे.” इजराइल ने शुक्रवार की सुबह ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ शुरू किया, जिसमें ईरान के परमाणु, मिसाइल और सैन्य ढांचे को निशाना बनाया गया. बाद में ईरान ने इजराइल पर जवाबी हमले शुरू किए. इससे इजराइल पर ईरान की ओर से और जोरदार हमले की आशंका पैदा हो गई है क्योंकि ईरान की कुछ मिसाइलें इजराइल की हवाई सुरक्षा प्रणाली को भेद कर देश के बीच में बने इमारतों को निशाना बनाने में सफल हुई हैं.
एक अलग घटना में, उत्तरी अरब शहर तमरा में चार लोग मारे गए, जिससे इजराइल द्वारा अभियान शुरू किए जाने के बाद से मरने वालों की संख्या 14 हो गई है. इजराइल का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकना और उसके मिसाइल विकास कार्यक्रम को विफल करना है.
नेतन्याहू ने कहा, ”हम यहां इसलिए हैं क्योंकि हम अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं – जो अब इजराइल के हर नागरिक के लिए स्पष्ट है. सोचिए कि अगर ईरान के पास इजराइल के शहरों पर गिराने के लिए परमाणु हथियार होता तो क्या होता.” उन्होंने कहा, ”सोचिए अगर ईरान के पास इस तरह की 20,000 मिसाइलें होतीं? यह इजराइल के लिए अस्तित्व का खतरा है. इसीलिए हमने विनाश के दोहरे खतरे के खिलाफ मुक्ति का युद्ध शुरू किया है, हम इसे पूरी ताकत के साथ कर रहे हैं. हमारे सैनिक, हमारे पायलट, ईरान के आसमान में हैं.” उन्होंने नागरिकों को ईरानी मिसाइल हमलों के दौरान ‘होम फ्रंट कमांड’ के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी.
इस बीच, इजराइल रक्षा बल (आईडीएफ) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आने वाले दिनों में इजराइल पर ईरान के और अधिक बैलिस्टिक मिसाइल हमले होने की आशंका है. उन्होंने कहा, ”आगे चुनौतीपूर्ण दिन हैं. आने वाले दिनों में और भी हमले और प्रभाव होंगे. इजराइली वायु सेना एक पल के लिए भी (ईरान में) हमला करना बंद नहीं कर रही है.” आईडीएफ प्रवक्ता ने कहा, ”इस समय भी हम तेहरान में दर्जनों ठिकानों पर हमला कर रहे हैं. हम (ईरान के) परमाणु कार्यक्रम और सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं, ताकि घरेलू मोर्चे पर जोखिम को कम किया जा सके.” आईडीएफ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान के विपरीत, जो नागरिक आबादी को निशाना बना रहा है, इजराइल ईरानी आबादी को नुकसान नहीं पहुंचाने की कोशिश कर रहा है.
आईडीएफ ने लिखा, ”यही वह संदेश है जो हम ईरानी नागरिकों तक पहुंचा रहे हैं. इसके उलट ईरान बिना किसी चेतावनी के हमला करने का विकल्प चुनता है, हम निर्दोष लोगों को चेतावनी देने का विकल्प चुनते हैं . हम उन्हें कई माध्यम से फारसी में चेतावनी देते हैं.” उसने कहा, ”क्योंकि मानव जीवन हमारे लिए सर्वप्रथम है. यही हमारे और हमारे शत्रु के बीच का अंतर है.” इजराइल के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार से अबतक ईरान ने कम से कम 270 मिसाइलें दागी हैं, जिनसे 22 स्थल प्रभावित हुए, तीन नाबालिगों और 10 वयस्कों सहित 13 लोगों की मौत हो गई तथा 390 लोग घायल हुए हैं.
गाजा में इजराइल और अमेरिका सर्मिथत खाद्य वितरण केंद्र के निकट नवीनतम गोलीबारी में आठ लोगों की मौत
गाजा पट्टी में रविवार को इजराइल और अमेरिका सर्मिथत खाद्य वितरण केंद्रों के पास हुई गोलीबारी में कम से कम आठ फलस्तीनी मारे गए और दर्जनों अन्य लोग घायल हो गए. फलस्तीन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह जानकारी दी. प्रत्यक्षर्दिशयों ने इजराइली सेना को दोषी ठहराया जिसने अभी कोई टिप्पणी नहीं की है. हमास के सात अक्टूबर के हमले के 20 महीने से अधिक समय बाद भी गाजा में युद्ध जारी है. उस हमले ने घटनाओं की एक श्रृंखला शुरू कर दी, जिसके कारण शुक्रवार को इजराइल ने ईरान पर अचानक हमला कर दिया.
प्रत्यक्षर्दिशयों ने कहा कि इजराइली सेना ने राफा में दो सहायता स्थलों की ओर जा रहे हताश फलस्तीनियों की भीड़ पर भोर में गोलीबारी की. विशेषज्ञों और सहायता कार्यकर्ताओं का कहना है कि इजराइल की नाकाबंदी और सैन्य अभियान ने व्यापक स्तर पर भूख का संकट उत्पन्न किया है और अकाल का खतरा बढ़ा दिया है.
राहत समाग्री वितरण केंद्रों के पिछले महीने खुलने के बाद से ही इन केंद्रों के आस-पास लगभग हर रोज गोलीबारी हो रही है.
प्रत्यक्षर्दिशयों का कहना है कि इजराइली सेना ने भीड़ पर बार-बार गोलीबारी की है और स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इसमें कई लोग मारे गए हैं. इजराइल की सेना का कहना है कि उसने अपने बलों के पास आने वाले संदिग्धों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाई थीं.
एक सहायता केंद्र से खाली हाथ लौटे अहमद अल-मसरी ने रविवार को कहा, ”वहां घायल और मृत लोग थे.” उम्म होस्नी अल-नज्जर ने कहा कि वह सुबह 4:30 बजे राफा के ताल अल-सुल्तान इलाके में सहायता केंद्र की ओर जा रही भीड़ में शामिल हो गई थीं. उन्होंने कहा कि गोलीबारी तब शुरू हुई जब लोग उसके पहुंचने के कुछ मिनट बाद ही सहायता केंद्र की ओर बढ़ने लगे. उसने कहा, ”वहां कई लोग घायल और शहीद हो गए. कोई भी उन्हें निकालने में सक्षम नहीं था.” निकटवर्ती शहर खान यूनिस के नासेर अस्पताल ने बताया कि गोलीबारी के बाद उन्हें आठ शव मिले हैं.



