अर्थव्यवस्था को लेकर ‘अतार्किक उत्साह’, ट्रंप टैरिफ का ‘झटका’ अभी नहीं दिखा: कांग्रेस

कांग्रेस ने मोदी-शी वार्ता के बाद सरकार पर 'कायरतापूर्ण तरीके से घुटने टेकने' का आरोप लगाया

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने सोमवार को अप्रैल-जून 2025 के जीडीपी के आंकड़ों को लेकर सरकार की आलोचना की और कहा कि इनसे ‘अतार्किक उत्साह’ पैदा हुआ है और इनमें अभी तो ‘ट्रंप का टैरिफ का झटका’ दिखाई नहीं दे रहा है जिसके असल परिणाम दूसरी तिमाही में दिखाई देने लगेंगे. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि टैरिफ से बचने के लिए निर्यातकों ने पहले से ही अमेरिका को अतिरिक्त निर्यात (फ्रंट लोडिंग) कर दिया था, जिससे निर्यात वृद्धि और जीडीपी के मुख्य आंकड़ों में वृद्धि हुई है.

रमेश ने ‘एक्स’ पर कहा, ”अप्रैल-जून 2025 की अवधि के जीडीपी आंकड़े अतार्किक उत्साह का कारण बने हैं, लेकिन इनमें कुछ स्पष्ट विरोधाभास भी हैं जिन पर एक जानेमाने बैंक की रिपोर्ट ने सवाल उठाए हैं और जिन्हें नंजरअंदाज नहीं किया जा सकता.” उन्होंने दावा किया, ”शहरी खपत अब भी काफी कमजोर है और ग्रामीण खपत संरचनात्मक बाधाओं का सामना कर रही है.” रमेश ने कहा कि नाममात्र जीडीपी वृद्धि दर (यानी मुद्रास्फीति को समायोजित किए बिना) अब भी धीमी है और वास्तव में, जनवरी-मार्च 2025 तिमाही की तुलना में काफी कम है.

उन्होंने कहा, ”उपभोग, निवेश और व्यापार जीडीपी वृद्धि के मुख्य निर्धारक हैं. लेकिन आश्चर्यजनक ढंग से तिमाही वृद्धि दर का पूरा 1.8 प्रतिशत अंक इन तीन निर्धारकों से नहीं समझाया जा सकता. यह विसंगति बहुत बड़ी है और इसे स्पष्ट करने की आवश्यकता है.” रमेश ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में बिक्री वृद्धि, मुनाफे की वृद्धि के विपरीत, लगातार धीमी हो रही है.

कांग्रेस नेता ने कहा, ”ट्रंप टैरिफ का झटका इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में दिखाई नहीं देता. दरअसल टैरिफ से बचने के लिए निर्यातकों ने पहले से ही अमेरिका को अतिरिक्त निर्यात (फ्रंट लोडिंग) कर दिया था, जिससे निर्यात वृद्धि और जीडीपी के मुख्य आंकड़ों में वृद्धि हुई है.” रमेश ने कहा कि टैरिफ के वास्तविक प्रभाव निश्चित रूप से दूसरी तिमाही से दिखने शुरू हो जाएंगे.

भारत की अर्थव्यवस्था अप्रैल-जून में अपेक्षा से अधिक 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो पांच तिमाहियों में सबसे तेज. गति की थी. अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ लगाए, जिससे कपड़ा जैसे प्रमुख निर्यातों के लिए खतरा पैदा हो रहा है. शुक्रवार को जारी नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र के अच्छे प्रदर्शन से प्रेरित थी, तथा व्यापार, होटल, वित्तीय और रियल एस्टेट जैसी सेवाओं से भी इसमें मदद मिली.

कांग्रेस ने मोदी-शी वार्ता के बाद सरकार पर ‘कायरतापूर्ण तरीके से घुटने टेकने’ का आरोप लगाया

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ बातचीत के बाद सोमवार को सरकार पर निशाना साधा और उस पर ”कायरतापूर्ण तरीके से घुटने टेकने” और ”तथाकथित ड्रैगन” के सामने आत्मसमर्पण करने का आरोप लगाया. पार्टी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान-चीन की ”जुगलबंदी” पर मोदी की चुप्पी को ”राष्ट्र विरोधी” बताया. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत लंबे समय से चीन पर आतंकवाद के मुद्दे पर ”दोहरे मानदंड” और ”दोहरी भाषा” अपनाने का आरोप लगाता रहा है.

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”अब प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग से कहा कि भारत और चीन दोनों आतंकवाद के शिकार हैं. अगर यह तथाकथित हाथी का तथाकथित ड्रैगन के आगे झुकना नहीं है, तो फिर क्या है?” रमेश ने कहा, ”इससे भी ज्यादा राष्ट्र-विरोधी बात यह है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन और पाकिस्तान की जुगलबंदी के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ बातचीत में एक शब्द तक नहीं कहा, जबकि इसका खुलासा खुद भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारियों ने किया था.” कांग्रेस नेता ने कहा, ”स्वघोषित 56 इंच सीने वाला नेता अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है. उन्होंने 19 जून 2020 को चीन को क्लीन चिट देकर राष्ट्रहित के साथ विश्वासघात किया. अब, 31 अगस्त 2025 भी तियानजिन में उनके कायरतापूर्ण दंभ के लिए बदनामी के दिन के रूप में याद किया जाएगा.”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भारत-चीन सीमा मुद्दे के “निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य” समाधान की दिशा में काम करने पर रविवार को सहमति जताई. उन्होंने वैश्विक व्यापार को स्थिर करने में दोनों अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को स्वीकार करते हुए व्यापार एवं निवेश संबंधों को विस्तार देने का संकल्प भी लिया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि अपनी बातचीत में मोदी और शी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश विकास में साझेदार हैं, न कि प्रतिद्वंद्वी तथा उनके मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए.

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