
नयी दिल्ली/बाकू/चेन्नई. राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश भर ने फिडे शतरंज विश्व कप उपविजेता आर प्रज्ञानानंदा को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिये बधाई दी है . राष्ट्रपति मुर्मू ने सोशल मीडिया पर लिखा ,” 18 वर्ष के ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने फिडे विश्व कप फाइनल में पहुंचकर और उपविजेता रहकर हर भारतीय का दिल जीत लिया है . उन्होंने शतरंज के दिग्गजों का सामना करते हुए उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन किया.”
उन्होंने लिखा ,”मैं इस प्रदर्शन के लिये उन्हें बधाई देती हूं . उन्होंने पूरे देश को गौरवान्वित किया है .” उन्होंने आगे लिखा ,” उनकी मां नागलक्ष्मी, वेलाम्मल स्कूल , उनके सभी मेंटोर और कोचों का विशेष तौर पर जिक्र करना होगा जिन्होंने चुनौतियों और कठिनाइयों के बीच उनके इस असाधारण सफर में योगदान दिया . मैं प्रज्ञानानंदा को भविष्य में और भी ऊंचाइयों को छूने के लिये शुभकामना देती हूं .” प्रज्ञानानंदा बाकू में हुए फाइनल में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन से बृहस्पतिवार को टाइब्रेक में 1.5 – 0.5 से हार गए
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा ,” हमें फिडे विश्व कप में शानदार प्रदर्शन करने वाले प्रज्ञानानंदा पर गर्व है . उन्होंने असाधारण कौशल का प्रदर्शन करके मैग्नस कार्लसन जैसे दिग्गज को फाइनल में कड़ी टक्कर दी .” उन्होंने आगे लिखा ,” यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है . उन्हें आगामी टूर्नामेंटों के लिये शुभकामनायें .” पूर्व खेलमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौ.ड़ ने लिखा ,” आप जीतते हैं या सीखते हैं . आपने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और 140 करोड़ भारतीयों के दिल जीते . यही मायने रखता है .” चैम्पियन क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने लिखा ,” असाधारण टूर्नामेंट के लिये बधाई . अपने सपने पूरे करने और भारत को गौरवान्वित करने में लगे रहो .” अभिनेता रितिक रोशन ने लिखा ,” फतेह अंतिम नतीजे तक ही सीमित नहीं है . आप सही मायने में चैम्पियन हो . बधाई आर प्रज्ञानानंदा .”
फिडे विश्व कप फाइनल तक का प्रज्ञानानंदा का सफर
ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने फिडे विश्व कप फाइनल खेलने वाले विश्वनाथन आनंद के बाद दूसरे और सबसे युवा भारतीय खिलाड़ी बनकर भारतीय शतरंज के इतिहास का सुनहरा अध्याय लिख डाला. भारत के 18 वर्ष के इस खिलाड़ी को फाइनल में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन ने हराया.
इस टूर्नामेंट में उनका सफर इस तरह रहा.
* पहले दौर में बाय मिला
* दूसरे दौर में फ्रांस के ग्रैंडमास्टर मैक्सिम लागार्डे को 1.5 . 0.5 से हराया * तीसरे दौर में चेक गणराज्य के ग्रैंडमास्टर डेविड नवारा को 1.5 . 0.5 से हराया * चौथे दौर में दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी अमेरिका के हिकारू नकामूरा को 3 . 1 से मात दी * पांचवें दौर में हंगरी के फेरेंग बेरकेस को 1.5 . 0.5 से हराया * छठे दौर में हमवतन अर्जुन एरिगेसी को 5 . 4 से हराया * इटली . अमेरिका के ग्रैंडमास्टर और दुनिया के तीसरे नंबर के खिलाड़ी फेबियानो कारूआना को सेमीफाइनल में 3.5 . 2.5 से हराया । विश्व कप फाइनल में पहुंचने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने * फाइनल का पहला मुकाबला 35 चालों के बाद ड्रॉ रहा * दूसरा मुकाबला 30 चालों के बाद ड्रॉ रहा * मैग्नस कार्लसन ने टाइब्रेक में प्रज्ञानानंदा को हराया.
‘वंडरकिड’ से शतरंज का अगला बादशाह बनने की राह पर हैं प्रज्ञानानंदा
जिस आर प्रज्ञानानंदा का उनके माता-पिता ने टेलीविजन से दूर रखने के लिए शतरंज से परिचय कराया, वही किशोर खिलाड़ी अब विश्वनाथन आनंद के बाद 64 खानों के इस खेल का नया बादशाह बनने की राह पर है. प्रज्ञानानंदा विश्व कप भले ही नहीं जीत सके हों लेकिन दिग्गजों को धराशायी करके उन्होंने शतरंज को अखबारों के पहले पन्ने पर ला दिया . खेल की लोकप्रियता में इजाफा किया जो अमूमन देश के कुछ राज्यों में ही मशहूर है .
इस 18 वर्षीय खिलाड़ी को पिछले कुछ समय से पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है और उन्होंने बाकू में फिडे विश्व कप में शानदार प्रदर्शन करके इसे सही साबित भी कर दिया. प्रज्ञानानंदा को अब कैंडिडेट टूर्नामेंट में भाग लेने का मौका मिलेगा जिसका विजेता मौजूदा विश्व चैंपियन डिंग लीरेन के सामने चुनौती पेश करेगा. आनंद के बाद प्रज्ञानानंदा दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्होंने कैंडिडेट टूर्नामेंट में जगह बनाई है. प्रज्ञानानंदा ने साढ़े चार साल की उम्र से शतरंज खेलना शुरू किया था तथा अपने करियर में वह अभी तक कई उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं.
पिछले साल उन्होंने विश्व के नंबर एक खिलाड़ी और पूर्व क्लासिकल चैंपियन मैगनस कार्लसन को एक ऑनलाइन टूर्नामेंट में हराया था. प्रज्ञानानंदा ने अब तक दिखाया है कि वह दबाव झेलने और खेल के चोटी के खिलाड़ियों को हराने में सक्षम हैं. भारतीय शतरंज के गढ़ चेन्नई के रहने वाले प्रज्ञानानंदा ने छोटी उम्र से ही इस खेल में नाम कमाना शुरू कर दिया था. उन्होंने राष्ट्रीय अंडर सात का खिताब जीता और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. वह 10 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय मास्टर और उसके दो साल बाद ग्रैंड मास्टर बन गए थे. प्रज्ञानानंदा ने 2019 में 14 साल और तीन महीने की उम्र में अपनी ईएलओ रेटिंग 2600 पर पहुंचा दी थी.
कोविड-19 के दौर में उन्होंने ऑनलाइन टूर्नामेंट में अपना जलवा दिखाया. उन्होंने 2021 में मेल्टवॉटर चैंपियंस टूर में सर्गेई कारजाकिन, तैमूर राडजाबोव और जान क्रिजिस्टॉफ डूडा जैसे शीर्ष खिलाड़ियों को हराया जबकि कार्लसन को बराबरी पर रोका.
प्रज्ञानानंदा ने वर्ष 2022 में एयरथिंग मास्टर्स रैपिड टूर्नामेंट में कार्लसन को हराया. इस तरह से वह आनंद और हरिकृष्णा के बाद कार्लसन को हराने वाले तीसरे भारतीय खिलाड़ी बने. इसके बाद वह विभिन्न टूर्नामेंट में अपनी छाप छोड़ते रहे.
प्रज्ञानानंदा ने विशेषकर विश्वकप में दिखाया कि वह कभी हार नहीं मानते. दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी हिकारू नाकामुरा के खिलाफ उन्होंने अपने जज्बे का शानदार नमूना पेश किया तथा अपने से अधिक रेटिंग वाले खिलाड़ी को हराया. सेमीफाइनल में उनका मुकाबला विश्व के तीसरे नंबर के खिलाड़ी फैबियानो कारूआना से था जिन्हें उन्होंने रक्षण का अच्छा नमूना पेश करके टाई ब्रेकर में पराजित किया..
विश्वकप के लिए भारतीय टीम के कोच ग्रैंड मास्टर एम श्याम सुंदर ने कहा,”उनकी सबसे बड़ी विशेषता खराब परिस्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन करना है.” प्रज्ञानानंदा को आनंद की तरह शुरू से ही अपने परिवार विशेषकर अपनी मां का साथ मिला. उनकी मां नागालक्ष्मी प्रत्येक टूर्नामेंट के दौरान उनके साथ रहती है जिसका इस युवा खिलाड़ी को भावनात्मक लाभ मिलता है.
चंद्रयान3 की सफलता के अगले दिन प्रज्ञानानंदा का रजत देश के लिये गर्व की बात, कहा पिता ने
फिडे विश्व कप फाइनल में मैग्नस कार्लसन से हारने के बावजूद इतिहास रचने वाले भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा के पिता रमेश बाबू ने उनके प्रदर्शन पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग के अगले दिन उनके इस प्रदर्शन ने भारत को फिर गर्व करने का मौका दिया है .
दिग्गजों को हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाने वाले 18 वर्ष के प्रज्ञानानंदा आखिरी बाधा पार नहीं कर सके और बाकू में फाइनल में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी कार्लसन से बृहस्पतिवार को टाइब्रेक में 1.5 – 0.5 से हार गए . उनके पिता रमेश बाबू ने चेन्नई से भाषा से बातचीत में कहा ,” हमने कभी उस पर दबाव नहीं डाला . मैं उसके प्रदर्शन से बहुत खुश हूं . वह दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी से खेल रहा था और रजत पदक भी बड़ी उपलब्धि है .”
उन्होंने कहा ,” उसने मेरी उम्मीद से बढकर प्रदर्शन किया है . हर मुकाबले के साथ उसके खेल में निखार आया . कल चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग के बाद उसने आज फिडे विश्व कप में ऐसा प्रदर्शन करके देश को गर्व करने का एक और मौका दिया .” यह पूछने पर कि जीत का जश्न उनका परिवार कैसे मनायेगा , उन्होंने कहा ,” अभी तो वह जर्मनी में एक और टूर्नामेंट खेलने जा रहा है . आम तौर पर उसकी जीत के बाद हम मंदिर में पूजा करने जाते हैं और यही करेंगे .”
बैंक में उप महाप्रबंधक के तौर पर कार्यरत रमेश बाबू काम के साथ घर की जिम्मेदारी भी संभाल लेते हैं क्योंकि उनकी पत्नी प्रज्ञानानंदा के साथ अक्सर टूर्नामेंटों के लिये जाती है . उनकी बेटी आर वैशाली भी शतरंज खिलाड़ी है और उसे देखकर ही प्रज्ञानानंदा की भी रूचि जगी थी .
रमेश बाबू ने कहा ,” वैशाली बचपन में बहुत टीवी देखती थी तो हमने उसका ध्यान हटाने के लिये शतरंज में डाला . मैं या उसकी मां दोनों को शतरंज खेलना नहीं आता लेकिन बहन को देखकर प्रज्ञानानंदा की भी रूचि जगी और फिर वह आगे बढता रहा .” खुद सचिन तेंदुलकर के प्रशंसक रमेश बाबू ने कहा ,” प्रधानमंत्री जी ने और सचिन ने भी प्रज्ञानानंदा को बधाई दी है . हमारे लिये यह गर्व की बात है.”



