झामुमो वंशवाद की राजनीति में विश्वास रखता है तभी हेमंत सोरेन, पत्नी और भाई को टिकट दिया: हिमंत

भाजपा सत्ता में आई तो हुसैनाबाद को जिला बनाया जाएगा, राम या कृष्ण के नाम पर होगा नामकरण

रांची/मेदिनीनगर. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार को कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) वंशवाद की राजनीति में विश्वास रखता है तभी उसने पार्टी नेता हेमंत सोरेन, पत्नी कल्पना सोरेन और भाई बसंत सोरेन को चुनाव मैदान में उतारा है. दरअसल झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए झामुमो ने बुधवार को 35 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी कल्पना सोरेन और भाई बसंत के नाम शामिल हैं. असम के मुख्यमंत्री ने इसी सूची को लेकर पार्टी पर निशाना साधा है. शर्मा झारखंड चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के सह प्रभारी हैं.

उन्होंने उम्मीदवारों के बीच पारिवारिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा, ”झामुमो की उम्मीदवार सूची स्पष्ट रूप से वंशवाद की राजनीति को दर्शाती है.” उन्होंने तंज किया कि झामुमो में विविध उम्मीदवार नहीं हैं और अगर जरूरत पड़ी तो भाजपा अतिरिक्त उम्मीदवार दे सकती है. उनका इशारा भाजपा से हाल में झामुमो में शामिल हुए नेताओं की ओर था. राज्य की 81 सदस्यीय विधानसभा के लिए 13 और 20 नवंबर को मतदान होगा और मतगणना 23 नवंबर को होगी.

हेमंत सोरेन साहिबगंज जिले की बरहेट (सुरक्षित) विधानसभा सीट से विधायक हैं. उन्होंने 2019 के विधानसभा चुनाव में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साइमन माल्टो से 25,740 मतों से यह सीट जीती थी. आगामी विधानसभा चुनाव में भी सोरेन इसी सीट से किस्मत आजमाएंगे. सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने गांडेय सीट पर उपचुनाव में भाजपा के दिलीप कुमार वर्मा को 27,149 मतों से पराजित किया था. यह सीट झामुमो विधायक सरफराज अहमद के इस्तीफे से रिक्त हुई थी.

बसंत सोरेन ने झामुमो का गढ़ माने जाने वाली दुमका सीट से भाजपा के पूर्व मंत्री लुईस मरांडी को 6,842 से अधिक मतों से हराया था.
उनके बड़े भाई हेमंत सोरेन ने यह सीट खाली की थी, जिन्होंने दिसंबर 2019 के विधानसभा चुनाव में दुमका और बरहेट दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी और बाद में उन्होंने बरहेट सीट को अपने पास रखने का फैसला किया था. हेमंत सोरेन ने दुमका में मरांडी के खिलाफ 13,188 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी.

शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के अन्य शीर्ष नेता तीन नवंबर के बाद झारखंड आएंगे. झारखंड की 43 विधानसभा सीटों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया शुक्रवार को शुरू हो गई और यह 25 अक्टूबर तक जारी रहेगी. पहले चरण के तहत इन सीट पर 13 नवंबर को मतदान होना है. चुनावों में कुल 2.60 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं, जिनमें 11.84 लाख पहली बार के मतदाता, 1.13 लाख दिव्यांगजन (पीडब्ल्यूडी), थर्ड जेंडर और 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं.

भाजपा सत्ता में आई तो हुसैनाबाद को जिला बनाया जाएगा, राम या कृष्ण के नाम पर होगा नामकरण: हिमंत

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार को कहा कि झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने पर हुसैनाबाद अनुमंडल को जिला बनाया जाएगा और इसका नामकरण भगवान राम या कृष्ण के नाम पर होगा. भाजपा के झारखंड चुनाव सह-प्रभारी शर्मा ने यह भी कहा कि राज्य से घुसपैठियों को बाहर निकालना पार्टी की प्राथमिकता होगी.

उन्होंने कहा, ”अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो हुसैनाबाद का जिला बनना तय है. इसका नाम भगवान राम या कृष्ण के नाम पर रखा जाएगा.” असम के मुख्यमंत्री पलामू जिला स्थित जपला के कर्पूरी मैदान में हुसैनाबाद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार कमलेश सिंह के समर्थन में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे.

सिंह, झारखंड में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के एकमात्र विधायक थे और वह चार अक्टूबर को भाजपा में शामिल हो गए.
शर्मा ने रैली में आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण झारखंड की जनसांख्यिकी बदल रही है लेकिन सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) इस मुद्दे पर चुप है क्योंकि वे उसका वोट बैंक हैं.

उन्होंने कहा, ”घुसपैठियों को बाहर निकालना भाजपा की प्राथमिकता है. हम झारखंड से बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करेंगे.” शर्मा ने दावा किया कि झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी घट रही है, जबकि बांग्लादेशी घुसपैठियों की आबादी बढ़ रही है.

उन्होंने कहा, ”वे संथाल परगना होकर झारखंड में प्रवेश करते हैं और पूरे राज्य में फैल रहे हैं. आने वाले समय में, झारखंड उसी स्थिति का सामना करेगा जैसा वर्तमान में असम कर रहा है.” उन्होंने दावा किया कि असम में मुसलमानों की आबादी 1951 में 20 प्रतिशत से अधिक नहीं थी जो बांग्लादेशी घुसपैठियों के चलते अब बढ़कर 45 प्रतिशत हो गई है. झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 13 और 20 नवंबर को दो चरणों में होगा और मतगणना 23 नवंबर को होगी.

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